समाज | एक अलग नज़रिया | 6-मिनट में पढ़ें
समाज | एक अलग नज़रिया | 4-मिनट में पढ़ें
समाज | एक अलग नज़रिया | बड़ा आर्टिकल
लड़कियां क्यों चाहती हैं कि वर्क फ्रॉम होम खत्म हो जाए?
घर पर हर समय रोक-टोक, उनकी आज़ादी में खलल उन्हें परेशान कर रहा है. उन्हें लगता है कि उनका परिवार उन पर हर समय कैमरे की तरह नज़र रखे हुए है. न तो खुल कर फ्रेंड्स के साथ मस्ती हो पा रही हैं और न ही खुल कर आउटिंग. ऐसे में वे खुद को हर समय बंधा बंधा सा महसूस कर रही हैं.
समाज | एक अलग नज़रिया | 6-मिनट में पढ़ें
समाज | एक अलग नज़रिया | 5-मिनट में पढ़ें
समाज | एक अलग नज़रिया | 6-मिनट में पढ़ें
Bollywood Actress जो तलाक के बाद खुश हैं, 5 संकेत जिन्हें भांपकर अलग हो जाना बेहतर है
भारत में शादी की अवधारणा जनम-जनम के बंधन के रूप में है. कहा जाता है कि पति-पत्नी का रिश्ता हमेशा के लिए है, लेकिन कई मामलों में कुछ दिन साथ रहने के बाद िकिसी और ही हकीकत से सामना होता है और हम खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं.
समाज | 7-मिनट में पढ़ें
दुनिया में सुसाइड करने वाली हर तीसरी महिला भारतीय ही क्यों है? कारण जानिये...
गुजरात की आयशा साबरमती में कूदकर अपनी जान दे चुकी है. कारण दहेज़ को माना गया है. वो मर भी गई, तब भी हम उन सारे कारणों को खोजने में लग जाते हैं जो हमें दोषमुक्त कर दे. लेकिन कब तक? आयशा तो एक नाम भर है जो हमारे समाज की स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करता है. लेकिन आंकड़े जो सच्चाई बयान कर रहे हैं, उनसे आख़िर कैसे मुंह फेरा जा सकता है?
समाज | 5-मिनट में पढ़ें
एक चिट्ठी, इस दुनिया की हर आयशा के नाम...
दहेज़ के चलते साबरमती नदी में कूदकर जान देने वाली आयशा की मौत से पूरा देश क्षुब्ध है. ऐसे में एक खुला पत्र आयशा को ये बताते हुए कि उसकी निडर आवाज और मुस्कान ने डरा कर रख दिया है. न जाने कैसे आयशा ने मौत को सुख पाने का मार्ग समझ लिया. अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि हम इस दुनिया को आयशा के जीने के लायक नहीं बना पाए.
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