सिनेमा | 4-मिनट में पढ़ें
Chandra Shekhar Azad की जिंदगी पर बनी इन फिल्मों के बारे में कितना जानते हैं?
आज अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की अमर शहादत का दिन है. देश को आजादी दिलाने के लिए अपनी शहादत देने वाले महान क्रांतिकारियों पर बॉलीवुड में बहुत कम फिल्में बनी हैं. कई क्रांतिकारी आज भी सिनेमा में गैर हाजिर हैं. आइए चंद्रशेखर आजाद की जिंदगी पर बनी फिल्मों के बारे में जानते हैं, जिनमें कई बारे में लोग बहुत कम जानते हैं.
सियासत | 7-मिनट में पढ़ें
काकोरी ट्रेन एक्शन डे: जानिये काकोरी में ऐसा क्या हुआ जिसने तब अंग्रेजों के होश उड़ा दिए!
युद्ध का मैदान हो या स्वतंत्रता संग्राम हो, दुश्मन भारत पर कभी भारी नहीं पड़ा, भारत कमज़ोर हुआ तो घर के भेदियों के कारण, काकोरी में ट्रेन लूटने वाले क्रांतिकारी भी शायद कभी पकड़े नहीं जाते, लेकिन उन्हीं के दो साथी अंग्रेजो के मुखबिर बन गये और काकोरी के नायक पकड़े गए.
सियासत | बड़ा आर्टिकल
मैनपुरी की खुशी के आगे अखिलेश यादव को रामपुर का गम कितना कम होगा?
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को सबसे ज्यादा खुशी तो मैनपुरी उपचुनाव (Mainpuri Bypoll) के नतीजे से ही मिली होगी. खतौली में गठबंधन की जीत ने भी काफी राहत दी होगी, लेकिन रामपुर की हार का भी दुख है क्या? क्योंकि वहां तो आजम खान (Azam Khan) की हार हुई है!
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अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर आजाद को ही मायावती का विकल्प मान ही लिया
मायावती (Mayawati) के हाथ खींच लेने के बाद भी अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) यूपी विधानसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) के दबाव में नहीं आये, लेकिन अब दोनों के तेवर नरम पड़ चुके हैं - और सपा नेतृत्व ने भीम आर्मी को बीएसपी का विकल्प मान लिया है.
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मायावती इतनी खफा क्यों हो गईं कि अखिलेश यादव को श्राप देने लगी हैं?
मायावती (Mayawati) ने समाजवादी पार्टी के प्रति अपनी खीझ निकालने के चक्कर में राष्ट्रपति (President Election 2022) पद को भी घसीट लिया है - ऐसे में ये समझना मुश्किल हो रहा है कि बीएसपी नेता को सिर्फ अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से ही चिढ़ मची हुई है या माजरा कुछ और भी है?
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अखिलेश का करहल में मुलायम को उतारना योगी आदित्यनाथ के कश्मीर-केरल करने जैसा ही!
मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के करहल में चुनाव प्रचार के बाद लगता नहीं कि अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को भी उतना ही भरोसा जितना योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को गोरखपुर के लोगों पर - हां, यूपी की जंग का मिजाज अलग हो सकता है.
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मुख्तार अंसारी को चुनाव लड़ा रहे ओमप्रकाश राजभर, मायावती का दांव झेल पाएंगे क्या?
ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) भले ही चुनावों में बीजेपी को नेस्तनाबूद करने के दावे करें, लेकिन जहूराबाद सीट (Zahoorabad Assembly Seat) पर खुद ही घिरे नजर आ रहे हैं - क्योंकि शादाब फातिमा (Syeda Shadab Fatima) भी बीएसपी के टिकट पर मैदान में उतर चुकी हैं.
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