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Updated: 27 फरवरी, 2019 01:09 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. 1971 के बाद पहली बार भारत ने पाकिस्तान के घर में घुसकर एयर स्ट्राइक की और जैश के महत्वपूर्ण कैम्प को ध्वस्त किया. घटना के बाद जहां एक तरफ भारत में भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं. तो वहीं पाकिस्तान की इमरान सरकार को 'मुर्दाबाद' के अलावा तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. चौतरफा आलोचनाओं से घिरने के बाद इमरान सरकार लगातार यही कह रही है कि भारत के एयर स्ट्राइक के दावे झूठे हैं और कोई एयर स्ट्राइक नहीं हुई है.

मामले के बाद सरकार को आनन फानन में प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ी. जब पत्रकारों की तरफ से सवाल हुआ तो उस सवाल पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना था कि बालाकोट में किसी तरह का कोई आतंकी ठिकाना है ही नहीं. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि यह सब भारत का प्रोपेगेंडा है. पाकिस्तान की इस सफाई पर बात होती रहेगी मगर उससे पहले एक किस्सा बताना बहुत ज़रूरी है.

शाह महमूद कुरैशी, पाकिस्तान, एयर स्ट्राइक, पुलवामा आतंकी हमला    पाकिस्तान के विदेश मंत्री यही कह रहे हैं कि वहां तो भारत की तरफ से कोई हमला हुआ ही नहीं

किस्से का मुख्य पात्र एक लड़का है जो एक गांव में रहता है और जिसका नाम टिंकू है. टिंकू बड़ा शरारती था. टिंकू के बारे में मशहूर था कि शायद ही ऐसी कोई शरारत हो जो उससे छूटी हो. टिंकू की शरारत का आलम ये था कि टिंकू के मोहल्ले वालों की तो छोड़िये उसके अपने मां बाप तक उससे खासे परेशान थे. टिंकू को सुधारने के लिए कई जतन हुए. उसे तरह-तरह के प्रलोभन दिए गए मारा पीटा गया. यानी प्यार दुलार और फटकार सब हुआ मगर नतीजा निकला सिफर. टिंकू की शरारतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही थीं. जैसे-जैसे समय का पहिया घूमा टिंकू सुधरने के बजाए और बिगड़ता चला गया. टिंकू बड़ा हो रहा था तो जाहिर था उसके शौक भी बढ़ रहे थे.

टिंकू को आम बहुत पसंद थे एक दिन उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर दूसरे गांव के रामलाल माली के बाग़ में आम लूटने का प्लान बनाया. तय समय पर टिंकू के नेतृत्व में बाग़ में दाखिल हुए और आम के पेड़ों पर चढ़ाई कर दी. अभी बच्चे आम खा ही रहे थे कि माली आ गया और अफरा तफरी मच गई. लड़के भाग गए. टिंकू को आम का स्वाद इतना भा रहा था कि उसे माली के आने की बिल्कुल भी भनक नहीं लगी. माली ठीक उसी पेड़ के पास आया जिसपर चढ़कर टिंकू आम खा रहा था.

माली ने गुर्राकर आवाज लगाई. आवाज इतनी तेज थी कि टिंकू के हाथ से आम तो नीचे गिरा ही टिंकू भी औंधे मुंह नीचे गिर गया. टिंकू के हाथ पांव और माथे से खून बह रहा था और वो नीचे पड़ा कराह रहा था. थोड़ी देर बाद टिंकू उठा है और सामने खड़े माली से तीन बार कहा कि 'मेरे को तो लगी ही नहीं' अभी माली उससे कुछ कहता इससे पहले ही टिंकू बेहोश हो गया. किस्सा खत्म.

फ़िलहाल पाकिस्तान का हाल भी कुछ टिंकू जैसा ही है. भले ही वो दर्द में है. मगर दिलेरी दिखाने के लिए यही कह रहा है कि मेरे को तो लगी ही नहीं. बहरहाल खबर है कि दुनिया को बताने के लिए कि बालाकोट में कुछ हुआ ही नहीं, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मीडिया को मौके पर ले जाकर घटनास्थल का मुआयना कराएगा.

वहीं मामले पर जानकारी ये भी हाथ लगी है कि पाकिस्तानी सेना ने बालाकोट के इलाके को घेर लिया है और सेना वहां से भारत की एयर स्ट्राइक के सबूत मिटाने का काम कर रही है.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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