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Updated: 19 अगस्त, 2016 10:48 PM
राहुल मिश्र
राहुल मिश्र
  @rmisra
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गूगल सर्च इंजन पूरी दुनिया पर छाया है. आप यकीन करते हैं कि गूगल आप की जिंदगी को आसान बनाता है क्योंकि रोजमर्रा के काम में यह आपको इंटरनेट से जोड़ता है. आपके मोबाइल को इंटरनेट से जोड़ता है. गूगल के नए एप्प आपके कामकाज को आसान करते हैं. अपनी इन्हीं खूबियों के चलते पूरी दुनिया में गूगल एक मात्र ऐसा प्लैटफॉर्म बन चुका है जो आपके बारे में आपके घरवालों और अपनो से ज्यादा जानता है. यहां तक की यह उन चीजों को भी बखूबी जानता है जो आप भूल चुके हैं. आप यहां तक कह सकते हैं कि गूगल आपके ड्रांइंगरूम से आगे बढ़कर पहले बेडरूम और फिर आपके दिमाग में घर कर चुका है.

अब यहीं से शुरू हो जाती हैं वो चीजें जो ज्यादातर लोग गूगल के बारे में नहीं जानते. बीते कुछ महीनों से दुनियाभर में बहस छिड़ी है कि गूगल आपके बारे में क्या-क्या जानता है और उन जानकारियों का वह कैसे इस्तेमाल करता है. इसके साथ ही गूगल के पास मौजूद आपकी ये जानकारियां कैसे आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं. ये सवाल और भी खतरनाक साबित हो जाते हैं जब अमेरिकी कंपनी गूगल पर अमेरिकी सरकार से सांठगांठ का आरोप लगता है. तो सवाल यह है कि आखिर गूगल आपको कितना जानता है?

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गूगल बना नंबर 1 ईमेल आईडी

इंटरनेट से आपका वास्ता यदि दो दशक पहले पड़ा है तो आपको याद होगा कि गूगल ने नए-नए सर्च इंजन के तौर पर एंट्री की. अपने मौजूदा प्रतिद्वंदियों को मात देने के लिए गूगल ने अपनी जीमेल सेवा की सर्च इंजन के साथ शुरुआत की. उस दौर के मेल क्लाइंट दिग्गज हॉटमेल, याहू और रेडिफ को पछाड़ने के लिए गूगल ने 1 गीगा-बाइट का मेलबॉक्स मुफ्त में ऑफर किया जबकि बाकि मेल क्लाइंट इसका महज 10 फीसदी दे रहे थे. नतीजा यह हुआ कि लोगों को गूगल आकर्षित करने लगा. इस 1 गीगा-बाइट मेलबॉक्स से उन्हें अपने पुराने मेल को कभी भी डिलीट करने की जरूरत नहीं पड़ती. देखते ही देखते गूगल सभी को रिप्लेस करते हुए दुनियाभर का प्रमुख मेल क्लाइंट बन गया.

गूगल टॉक ने ऑनलाइन चैट को दिया नया आयाम

युवाओं के बीच गूगल ने ऑनलाइन को नई परिभाषा दी. गूगल से पहले याहू और रेडिफ चैट दुनिया के किसी कोने में बैठे लोगों के बीच रियल टाइम चैट के लिए प्रसिद्ध हो चुके थे. दोनों ने थीम बेस्ड चैटरूम से लाखों लोगों को अपनी ओर खींचा लेकिन यहां मुख्य आकर्षण था कि दो अनजान लोग चैट करने में सक्षम थे. इस दौर में जान पहचान के लोग धीरे-धीरे ऑनलाइन हो रहे थे लेकिन इससे पहले याहू और रेडिफ दो रियल फ्रेंड को जोड़ने का काम करते गूगल ने अपने रियल टाइम गूगल टॉल्क से यह काम कर दिखाया. इस फीचर की शुरुआत उसने अपने मेल क्लाइंट के साथ किया जिससे ऑनलाइन रहने वाले मेल देखने के साथ-साथ चैट भी कर सके.

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 गूगल का सर्वर रूम जहां कैद है अपसे जुड़ी जानकारियां

गूगल ने खड़ा किया बेहिसाब डाटाबेस

एक बड़े मेल क्लाइंट के साथ-साथ रियल टाइम चैट और ऊपर से सर्च इंजन के मॉडल के साथ गूगल ने अपने शुरुआती दौर में जमकर डाटाबेस पर खर्च किया. उसे इस बात का सटीक अंदाजा लगाया कि आने वाले दिनों में दुनियाभर की कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए मार्केटिंग करने में उसकी जरूरत पड़ेगी. हुआ भी ऐसा, और ऐसा होते ही गूगल इंटरनेट बेस्ड दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनी बनकर उभरी. सर्च इंजन के साथ-साथ कई मेल क्लाइंट कंपनियों को उसने बिजनेस में पछाड़ने के बाद ओवरटेक कर दुनियाभर में अपनी हेजेमनी बनाने की सफल कोशिश भी की. देखते ही देखते गूगल आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बनी और अमेरिका, यूरोप और एशिया में इसका कोई अहम प्रतिद्वंदी नहीं रह गया. इस दौर में गूगल शब्द ही इंटरनेट सर्च का पर्यायवाची बन गया.

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अब गूगल की इस गाथा में आपको खतरा कैसे?

अब याद कीजिए गूगल आपके लिए दो दशक पहले 1 गीगा-बाइट का मेलबॉक्स लेकर आया था जिससे आपको कभी अपना मेल डिलीट न करना पड़े. ठीक ऐसा ही उसने अपने लिए किया. जी हां, गूगल ने अपने सर्वर पर लिखे जाने वाले किसी डेटा को कभी डिलीट नहीं किया. उसने शुरूआत से ही अपने सभी यूजर्स के सर्च से लेकर उससे जुड़ी एक-एक जानकारी को अपने लगातार विस्तार होते सर्वर पर सेव करता रहा.

अब गूगल की इस गतिविधी का अंदाजा आपको पहले नहीं लगा क्योंकि उसने कभी जाहिर नहीं किया कि वह आपकी सभी सूचनाओं को अपने पास एकत्रित कर रहा है. आपको लगता रहा कि पासवर्ड से सुरक्षित आपके मेलबॉक्स की जानकारी आपके पास महफूज है. आप सोचते रहे कि अपने पर्सनल कंप्यूटर पर सर्च इंजन पर खोजा गया कोई कंटेंट सिर्फ आप जान रहे हैं. और आपको यकीन था कि गूगल टॉल्क पर दोस्तों से हुए सभी बातों का इल्म सिर्फ आपको और आपके दोस्त को है. लेकिन अब टेक्नोलॉजी के उस पड़ाव पर जहां आपका कंप्यूटर और मोबाइल जुड़ चुका है, गूगल यहां क्या कर रहा है-

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 गूगल का सर्वर रूम जहां कैद है अपसे जुड़ी जानकारियां
  1. आपको उचित प्रचार देने के लिए गूगल आपके द्वारा सर्फ की गई सभी वेबसाइट का आंकड़ा रखता है. इस आंकड़े से वह आपका एक प्रोफाइल तैयार करता है जो मार्केटिंग के अपने क्लाइंट्स को उपलब्ध कराता है. मार्केटिंग कराने वाली उक्त कंपनी आपके सर्फ के आधार पर आपके पसंद और नापसंद का आंकड़ा तैयार कर लेता है और आप तक उसके मुताबिक प्रचार पहुंचा दिया जाता है. (http://www.google.com/settings/ads/)

2. आप यदि एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल करते हैं, तो गूगल आपकी लोकेशन का समय के अनुसार आंकड़ा एकत्रित करता है. इन आंकड़ों की मदद से आप के साथ-साथ गूगल को यह पता रहता है कि आप कहां-कहां जाते हैं, किससे-किससे मिलते हैं और कितनी देर तक किसी एक विशेष लोकेशन पर मौजूद रहते हैं. गूगल के पास ऐसी एकत्रित जानकारी का इस्तेमाल अमेरिकी खुफिया विभाग अपने दुश्मनों की जानकारी एकत्रित करने के लिए करता रहा है. (https://maps.google.com/locationhistory)

3. आपने ने गूगल पर कभी भी कुछ सर्च किया हो तो वह गूगल पर सेव कर लिया जाता है. इसके अलावा अगर आपने कभी भी गूगल पर किसी प्रचार पर क्लिक किया है तो वह भी गूगल के पास द्रज हो जाता है. यह आंकड़ा देखने के लिए आप गूगल की वेब हिस्ट्री पर जाकर सर्च कर सकते हैं. अपने कंप्यूटर या एंड्रॉयड से यदि आप इस आंकड़े को डिलीट भी करदें तो गूगल के सर्वर पर ये आंकड़े हमेशा मौजूद रहते हैं. (https://www.google.com/history/)

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4. गूगल के पास आपसे संबंधित कितने आंकड़ें हैं यदि आप उसे जानना चाहते हैं तो वह आपके साथ साझा कर सकता है. इसके लिए आपको गूगल से प्रति माह सिक्योरिटी और प्राइवेसी रिपोर्ट ले सकते हैं. इसे आपको अपने गूगल ब्राउसर में माई सेटिंग्स में जाकर चुननै होगा और आपके मेल बॉक्स में महीनेवार रिपोर्ट आना शुरू हो जाएगी. (https://www.google.com/settings/dashboard)

5. आपके कंप्यूटर और मोबाइल में इन्सटॉल्ड कई एप्प औऱ प्रोग्राम गूगल के पास मौजूद आपके आंकड़ों को देखती है. इन एप्प और प्रोग्राम को इन्सटॉल करने की शर्त में रहता है कि उक्त एप्प आपके आंकड़ों का इस्तेमाल आपको बेहतर सुविधा देने के लिए कर सकता है. जैसे कि एंड्रॉयड या किसी अन्य फोन पर गूगल मैप चलाने पर वह आपकी मौजूदा लोकेशन की जानकारी लेते वक्त आपको साइन इन करने के लिए कहता है. इसकी इजाजत देते ही उक्त प्रोग्राम आपसे जुड़ी सभी जानकारियों को देख सकता है. (https://security.google.com/settings/security/permissions)

अब तकनीकी की इन बातो से इतर ये जानकारियां कैसे आपको प्रभावित करती हैं? आपका मोबाइल फोन अथवा कंप्यूटर एक बटन दबाने पर आपको दिखा देगा कि दिनभर आपने क्या किया, कहां गए और किससे मिले. आपके वह नजदीकी जो आपके फोन अथवा कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकते हैं वह भी आपकी इन जानकारियों को आसानी से देख सकते हैं.

अब आप गूगल की इन गतिविधियों को रोकना चाहें तो आपको भले यह दिखना बंद हो जाएगा कि आपसे संबंधित कोई जानकारी मौजूद नहीं है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. क्योंकि आज से नहीं बीते दो दशकों से गूगल की नीति रही है कि सर्वर पर आने वाले किसी आंकड़े को डिलीट नहीं किया जाए. इसका फायदा उसे मिलता है क्योंकि आपसे जुड़ी जानकारियों के बाजार में खरीदार मौजूद हैं. अब वह कोई कंपनी हो सकती है जो अपना उत्पाद आप तक पहुंचाना चाहती है, या फिर वह कोई खुफिया एंजेसी हो सकती है जो आपकी जानकारी एकत्रित कर रही है.

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कुछ लोगों को भले इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कंप्यूटर और मोबाइल पर उनकी गतिविधियां उनके लिए मायनो नहीं रखती. लेकिन वह भी हैरान तब हो जाएंगे कि आपकी गतिविधियों पर नजर किसी और की भी रहती है. आप चाह करके भी एकत्रित हो चुकी इन जानकारियों से पीछा नहीं छुड़ा सकते. गूगल के पास आपकी नई जानकारियां न जाए इसके लिए आप इसका इस्तेमाल बंद कर इंटरनेट पर मौजूद अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन पहले से मौजूद जानकारियों का क्या होगा.

मुझे इंटरनेट और गूगल का इस्तेमाल करते लगभग दो दशक बीत चुके हैं. इस दौरान मेरा ज्यादातर काम गूगल की मदद से हुआ है. लिहाजा मैं जानता हूं कि गूगल के सामने मेरी प्राइवेसी का कोई मतलब नहीं है. सबकुछ खुली किताब की तरह है गूगल के सामने.

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लेखक

राहुल मिश्र राहुल मिश्र @rmisra

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में असिस्‍टेंट एड‍िटर हैं

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