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Updated: 10 मार्च, 2019 07:36 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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खेल के मैदान में क्या किसी देश के खिलाड़ियों का उस देश के शहीदों का सम्मान करना गलत है? इस सवाल का जवाब बाकी दुनिया के लिए अलग और शायद पाकिस्तान के लिए अलग होगा. क्योंकि पाकिस्तान में भारत द्वारा की गई हर चीज़ जंग से जोड़कर देखी जाती है. हमारे पड़ोसी देश के दिमाग में हर वक्त जंग होती है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट सीरीज के दौरान विराट कोहली और उनकी टीम यानी की हमारी टीम इंडिया पर ये इल्जाम लगाया है कि ये क्रिकेट नहीं राजनीति है.

मतलब खुद ही सोचिए एक पाकिस्तानी मंत्री ICC से कहता है कि टीम इंडिया के खिलाफ आवाज़ उठाई जाए क्योंकि भारतीय क्रिकेट टीम ने मैच के दौरान आर्मी कैप पहनी हुई थी. सिर्फ इसलिए क्योंकि क्रिकेट के मैदान पर आर्मी कैप पहनी. वो भी इसलिए ताकि पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सके.

इस मामले में भारतीय क्रिकेट टीम को ही राजनीति में घसीट लिया गया. पाकिस्तानी सूचना मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने अपने ट्विटर अकाउंट से इस बारे में ट्वीट की और कहा कि ये खेल नहीं है. ICC को भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए क्योंकि जेंटलमैन्स गेम को उन्होंने राजनीति में घसीट लिया है. पाकिस्तान क्रिकेट टीम को भी काली पट्टी बांधनी चाहिए ताकि भारत जो कर रहा है कश्मीर में उसके खिलाफ विरोध किया जाए. इस मामले में चौधरी फवाद हुसैन ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से ये भी कह दिया कि उन्हें टीम इंडिया के खिलाफ शिकायत करनी चाहिए.

पाकिस्तान के सूचना मंत्री द्वारा की गई ट्वीटपाकिस्तान के सूचना मंत्री द्वारा की गई ट्वीट

इस बात को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी सही माना और कहा कि दुनिया ने ये देखा कि भारतीय क्रिकेट टीम ने मिलिट्री कैप पहनी और अपनी नहीं और ये क्या ICC को नहीं दिखा?

अब पाकिस्तान से कुछ सवाल पूछने बनते हैं-

  1. क्या ये खेल पाकिस्तान के खिलाफ खेला जा रहा था? जवाब है नहीं.
  2. क्या ये खेल पाकिस्तान में खेला जा रहा था? जवाब है नहीं.
  3. क्या क्रिकेट मैदान में आने से पहले क्रिकेट टीम ने कहा था कि ये पाकिस्तान के विरोध में किया जा रहा है? जवाब है नहीं.
  4. क्या किसी भी प्लेयर ने ये कहा कि पाकिस्तान और भारत के युद्ध जैसी स्थिति में हम भारत को सपोर्ट करने के लिए ये टोपी पहन रहे हैं? जवाब है नहीं.

जब इन सारे सवालों के जवाब नहीं हैं, तो फिर पाकिस्तान को क्या दिक्कत है? हमारे प्लेयर्स ने ये कहा कि ये उन्होंने पुलवामा में शहीद हुए जवानों की श्रद्धांजलि के लिए पहनी है और यहां तक कि उस मैच की फीस भी पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों के परिवार को दी जा रही है तो फिर इस पूरे मामले में पाकिस्तान को क्यों किसी की गलती दिखाई दे रही है?

PCB चेयरमैन एहसान मनी ने तो ये भी कहा कि वो ICC से बात कर रहे हैं ताकि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ एक्शन लिया जा सके. ये टोपियां खुद कर्नल की रैंक रखने वाले (सम्मान के तौर पर दी गई कर्नल रैंक) महेंद्र सिंह धोनी ने टीम के खिलाड़ियों को बाटी थीं.

इस पूरे मामले में ये समझना मुश्किल है कि अगर किसी देश के खिलाड़ी अपने देश में शहीद हुए जवानों को सम्मान दे रहे हैं तो इससे उस देश को क्या दिक्कत है जो कहीं भी उस खेल से जुड़ा हुआ है ही नहीं. मतलब दुनिया के किसी भी कोने में भारतीय खिलाड़ी अगर अपने शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो क्या इसका मतलब ये है कि वो पाकिस्तान का अपमान कर रहे हैं?

अपने शहीदों को श्रद्धांजलि देने का ये मतलब तो नहीं कि किसी और देश के साथ रिश्ते खराब करने की बात चल रही है. पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के सदस्य भी तो ऐसा आए दिन करते रहते हैं तब?

पाकिस्तानी क्रिकेटर भी देते हैं सेना को क्रिकेट के मैदान पर सम्मान-

पाकिस्तानी क्रिकेटर भी गाहे-बगाहे खेल के मैदान से लेकर ट्विटर अकाउंट तक हर जगह पाकिस्तानी सेना को सम्मान देते और शहीदों का सम्मान करते देखे जाते हैं. अगर सिर्फ क्रिकेट के मैदान की ही बात की जाए तो एक तस्वीर शायद आपको याद हो.

पाकिस्तानी खिलाड़ी, कोच यूनुस खान को मिलिट्री सलूट करते हुए.पाकिस्तानी खिलाड़ी, कोच यूनुस खान को मिलिट्री सलूट करते हुए.

ये फोटो इंग्लैंड की है. यहां पाकिस्तानी खिलाड़ी जीत के बाद अपने कोच को मिलिट्री सलूट कर रहे हैं. यहां भी पाकिस्तानी खिलाड़ी फील्ड पर ही हैं और जश्न मनाने के लिए मिलिट्री सलूट का सहारा लिया जा रहा है. ये फोटो 2016 की है वो साल जब पठानकोट हमले से लेकर उरी तक बहुत कुछ भारत में हुआ था और भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सुधर नहीं रहे थे.

अभी इस फोटो को देखकर क्या भारत में भी ये बोला जाए कि पाकिस्तानी खिलाड़ी आक्रामकता का सबूत दे रहे हैं और मिलिट्री सलूट फील्ड में करना जेनटलमैन्स गेम के खिलाफ है? फील्ड में मिलिट्री को नहीं लेकर आना चाहिए? ये भी तो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का एक तरीका ही था. उस समय भारत को कुछ नहीं बोलना चाहिए था क्योंकि वो कहीं से कहीं तक जुड़ा हुआ नहीं था इस मामले से. तो फिर क्यों अब जब भारत अपने शहीदों को सम्मान दे रहा है वो भी किसी और देश में किसी और जगह तो पाकिस्तान को लग रहा है कि ये उसके लिए है?

डियर पाकिस्तान हम आपको बता दें कि हर बात में हम आपके लिए नहीं सोचते और कुछ बातें भारतीय दिल से करते हैं और ये भी टीम इंडिया का श्रद्धांजलि देने का एक तरीका था न कि किसी और देश के लिए कुछ साबित करने का. लगभग हर देश के खिलाड़ी ऐसा करते हैं. फुटबॉल प्लेयर्स को ही देख लीजिए. एक गूगल सर्च आपको बता देगी कि कितना आम है खिलाड़ियों के लिए फील्ड पर किसी को सम्मान देना या किसी बात का प्रोटेस्ट करना. कम से कम शहीदों को तो अपनी ओछी सोच से दूर रखिए. वो देश के लिए शहीद हुए हैं उनके लिए अगर कोई कुछ अच्छा करने जा रहा है तो इससे पाकिस्तान को कोई समस्या होनी नहीं चाहिए. और अगर समस्या हो रही है तो ये बेहद गलत बात है. 

खेल और राजनीति बहुत अलग बातें हैं और अगर खेल को राजनीति से जोड़ने के किस्से पाकिस्तान से निकाले जाएं तो न जाने कितने निकल जाएंगे. कम से कम ये सोचिए कि शहीद आपके देश में भी होते हैं और उनका सम्मान अगर आपकी क्रिकेट टीम करेगी तो ये कहीं से भी गलत नहीं होगा. और अगर ये भी आप नहीं समझ सकते तो शायद आपको किसी और पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है.

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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