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Updated: 23 फरवरी, 2019 11:31 AM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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पुलवामा हमले के बाद ये आवाज उठना शुरू हो चुकी है कि अब पाकिस्तान के साथ सारे रिश्ते-नाते तोड़ने का वक्त आ गया है. न तो कोई चाहता है कि पाकिस्तान के साथ कोई कारोबार हो, ना ही उसके साथ कोई भी क्रिकेट खेला जाए. पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय मैच तो भारत पहले से ही नहीं खेलता है, लेकिन जून में होने वाले वर्ल्ड कप में भी पाकिस्तान के साथ क्रिकेट न खेलने की योजना बनाई जा रही है. जहां एक ओर क्रिकेट के बहुत से खिलाड़ी इस बात की पैरवी करते नजर आ रहे हैं कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए, वहीं दूसरी ओर क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन कुछ और ही राय दे रहे हैं.

सचिन तेंडुलकर का मानना है कि पाकिस्तान के साथ मैच खेला जाना चाहिए. वह कहते हैं कि एक बार फिर से वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हराने का वक्त आ गया है, बिना खेले पाकिस्तान को 2 प्वाइंट क्यों दें. सचिन तेंडुलकर अकेले नहीं हैं जो ऐसा सोचते हैं. सुनील गावस्कर की राय भी कुछ ऐसी ही है. वहीं दूसरी ओर हरभजन सिंह, अजहरुद्दीन जैसे क्रिकेटर की राय है कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए. पुलवामा हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के मुद्दे को लेकर पूरा क्रिकेट वर्ल्ड ही दो हिस्सों में बंट गया है.

पुलवामा आतंकी हमला, क्रिकेट, पाकिस्तान, वर्ल्ड कपसचिन तेंडुलकर और हरभजन सिंह की राय इस बार एक दूसरे के खिलाफ दिख रही है.

क्या कहा है सचिन ने?

सचिन तेंडुलकर ने एक ट्वीट में लिखा है- 'वर्ल्ड कप में भारत हमेशा ही पाकिस्तान के खिलाफ जीता है. ये वक्त है दोबारा उसे हराने का. मुझे निजी तौर पर इस बात से नफरत है कि बिना टूर्नामेंट खेले ही पाकिस्तान को 2 अंक दे दिए जाएं.' हालांकि, ट्वीट के दूसरे हिस्से के जरिए उन्होंने अपनी बात को बैलेंस करने की भी कोशिश की है. उन्होंने आगे लिखा है- 'मेरे लिए भारत सबसे पहले आता है, इसलिए देश जो भी फैसला करेगा, मैं पूरे दिल से उसे मानूंगा.'

गावस्कर भी यही चाहते हैं

सचिन तेंडुलकर से पहले सुनील गावस्कर ने भी गुरुवार को कहा था कि अगर भारत 16 जून को पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलने का फैसला करता है, तो ये उसकी हार होगी. आपको बता दें कि 30 मई से ब्रिटेन में विश्व कप शुरू हो रहा है और पूरे देश समेत अधिकतर क्रिकेटर भी यही चाहते हैं कि भारत इस बार के वर्ल्ड कप में ना खेले, ताकि दुनिया को एक मैसेज जाए कि आतंक का समर्थन करने वाले देश के साथ कोई संबंध नहीं रखा जाएगा.

पाकिस्तान के साथ नहीं खेलना चाहते ये खिलाड़ी

वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने के लिए सबसे पहले आवाज उठाई थी हरभजन सिंह ने. उन्होंने साफ कह दिया कि भले ही हमें 2 अंक गंवाने पड़ें और पाकिस्तान को 2 अंक मिल जाएं, लेकिन देश के जवानों के लिए इस बार हमें वर्ल्ड कप नहीं खेलना चाहिए. उनके बाद यजुवेंद्र चहल और पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन ने भी पाकिस्तान के साथ नहीं खेलने और इस बार वर्ल्ड कप का बहिष्कार करने की बात कही.

वर्ल्ड कप का बहिष्कार ही क्यों है विकल्प?

अगर भारत पाकिस्तान के साथ वर्ल्ड कप में शुरुआती क्रिकेट नहीं खेलता है तो हो सकता है कि सेमीफाइनल या फाइनल में पाकिस्तान से मुकाबला हो जाए और तब खेल से बाहर नहीं निकला जा सकता. वहीं दूसरी ओर, अगर भारत वर्ल्ड कप ही ना खेले तो इससे दुनिया को अपनी बात कह सकेगा. ऐसा नहीं है कि ये पहली बार होगा. 1980 में अमेरिका ने रूस में हुए ओलंपिक गेम्स का बहिष्कार किया था और उसके बाद 1984 में रूस ने अमेरिका में हुए ओलंपिक गेम्स का बहिष्कार किया था.

भारत के पास पाकिस्तान के साथ खेलने या ना खेलने के अलवा एक तीसरा विकल्प भी है, जिस पर कोशिश की शुरुआत तो हुई है, लेकिन शायद ही उस पर अमल हो पाए. ये विकल्प है पाकिस्तान को वर्ल्ड कप से बाहर निकलवा देना. हालांकि, ये काफी मुश्किल है, क्योंकि आईसीसी शायद ही इसके लिए राजी हो. अभी सबसे बड़ी बात ये है कि भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट होने को लेकर ही एक राय नहीं है. कुछ खिलाड़ी चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ नहीं खेला जाए, जबकि सचिन और गावस्कर इसके उलट है. खैर, इस पर अभी तक फैसला नहीं लिया गया है कि पाकिस्तान के साथ भारत का मैच होगा या नहीं. लेकिन जो भी फैसला आएगा उससे एक दिलचस्प मोड़ आना तय है.

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