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Updated: 17 जुलाई, 2019 02:10 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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हाल ही में वर्ल्ड कप खत्म हुआ है, जिसमें इंग्लैंड ने अविश्वसनीय तरीके से ट्रॉफी जीत ली. भले ही वर्ल्ड कप का खेल खत्म हो चुका हो, लेकिन उसके फाइनल में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के मुकाबले पर बहस अभी जारी है. बहस इस बात पर हो रही है कि आईसीसी के गलत नियमों के चलते ट्रॉफी इंग्लैंड को मिल गई, जबकि उसका असल हकदार तो न्यूजीलैंड था. सारी बहस की जड़ है मैच टाई होने पर दिया गया फैसला. आपको बता दें कि फाइनल में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच का मैच टाई रहा तो सुपर ओवर किया गया. लेकिन सुपर ओवर में भी मैच टाई हो गया तो अधिक बाउंड्री मारने वाली टीम इंग्लैंड को विजेता चुन लिया गया.

मैच टाई होने पर ऐसा करने को लेकर बहुत से लोग सवाल उठा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर लोगों के मन में ये भी सवाल है कि आखिर क्रिकेट मैच में तो टाई होने पर सुपर ओवर की व्यवस्था है, और अगर फिर भी मैच टाई हो गया तो अधिक बाउंड्री लेने वाले को विजेता बना दिया जाएगा, लेकिन बाकी खेलों का क्या? आखिर टेनिस, फुटबॉल और बाकी खेलों में मैच टाई होने पर क्या होता है. चलिए आज इसी पर एक नजर डालते हैं.

खेल, फुटबॉल, टेनिसफुटबॉल में कुछ प्रतियोगिताओं में पेनाल्टी शूट आउट का प्रयोग किया जाता है.

दो तरीके, जो फुटबॉल मैच टाई होने पर हार-जीत तय करते हैं

फुटबॉल की लीग प्रतियोगिताओं में खेल ड्रा के साथ खत्म हो सकता है, लेकिन कुछ नॉक आउट प्रतियोगिताओं में अगर खेल निर्धारित समय तक टाई रहा तो वह मैच अतिरिक्त समय तक चल सकता है, जो 15-15 मिनट की दो अवधियों का हो सकता है. अगर मैच अतिरिक्त समय के बाद भी टाई रहता है तो कुछ प्रतियोगिताओं में पेनाल्टी शूट आउट (नियम के अनुसार पेनाल्टी चिन्ह से किक मारना) का प्रयोग किया जाता है, जिसमें जो टीम आगे आती है, वह टीम प्रतियोगिता के अगले चरण में जाती है.

यहां एक बात ध्यान देने वाली ये है कि पेनाल्टी शूटआउट सिर्फ टीम को अगले चरण तक ले जाने का जरिया होता है, अंतिम स्कोर में उसकी कोई भूमिका नहीं होती. हालांकि, अगर अतिरिक्त समय में टीम गोल करती है तो वह उसके अंतिम स्कोर का हिस्सा होता है.

टेनिस का खेल टाई होने पर यूं होता है फैसला

इस खेल के एक सेट में दोनों खिलाड़ियों को 6-6 सर्विस गेम मिलते हैं. जो भी खिलाड़ी 6 गेम जीत ले, वह सेट जीत जाता है. हालांकि, कम से कम 2 गेम का अंतर होना जरूरी है. वहीं अगर दोनों खिलाड़ी 6-6 सर्विस गेम जीत जाते हैं और मैच टाई हो जाता है और फिर टाई ब्रेक होता है. यानी एक और गेम, जिसे जीतने वाला सेट जीत जाता है.

बैडमिंटन के खेल का स्कोरिंग सिस्टम है आसान

इस खेल में स्कोरिंग सिस्टम काफी आसान होता है. इसमें 21-21 अंकों के तीन गेम होते हैं. जो भी खिलाड़ी पहले 21 अंक तक पहुंच जाता है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है. लेकिन अगर दोनों खिलाड़ी 20-20 पर अटक जाएं तो क्या? ऐसे स्थिति में जो खिलाड़ी पहले दो अंक का अंतर बना लेता है, वो खेल जीत जाता है. अगर दोनों खिलाड़ी 29 अंक के स्कोर पर पहुंच जाएं तो 30 अंक पर पहले पहुंचने वाला खिलाड़ी मैच जीत जाता है.

हॉकी में होती है ये व्यवस्था

अगर हॉकी के खेल में मैच टाई हो जाता है तो उसमें पेनाल्टी स्ट्रोक कॉम्पटीशन होता है. इसके तहत दोनों टीमें 5-5 स्ट्रोक मारती हैं. दोनों टीम के कौन से 5-5 खिलाड़ी ऐसी स्थिति में पेनाल्टी स्ट्रोक में हिस्सा लेंगे और किस क्रम में खेलेंगे, ये सब पहले से तय होता है. दोनों टीमें एक के बाद एक स्ट्रोक मारती हैं, जब तक कोई टीम जीत ना जाए या फिर 10 स्ट्रोक पूरे ना हो जाएं. अगर इसके बाद भी मैच टाई रहता है तो पेनाल्टी शूट-आउट कॉम्पटीशन होता है. इसमें भी 5-5 खिलाड़ी एक के बाद एक 23 मीटर दूर से गोल मारने की कोशिश करते हैं. जैसे ही सीटी बजती है, उसके बाद गोल कीपर और खिलाड़ी अपनी जगह से हिल सकते हैं और 8 सेकेंड के अंदर खिलाड़ी को गोल करना होता है. अगर इसके बावजूद मैच टाई रहा तो फिर उन्हीं खिलाड़ियों के साथ सडन डेथ (Sudden Death)शुरू होता है, जिसमें खेल तब तक चलता है, जब तक कोई विजेता घोषित नहीं हो जाता. इसमें अंपायर चुनता है कि किस गोल को लक्ष्य बनाना है. कौन सी टीम खेलेगी, ये टॉस के जरिए तय होता है.

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