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Updated: 25 जुलाई, 2019 07:17 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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कभी सोचा है कि भारत जैसे देश में जहां शादी से पहले सेक्स को अपराध की नजर से देखा जाता हो, वहां शादी के बिना अबॉर्शन करवाना किसी भी लड़की के लिए कितना मुश्किल होता होगा? तो क्या हुआ कि वो वयस्क है और अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकती है, लेकिन भारत में वयस्क होना उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना विवाहित होना है.

शादी से पहले गर्भवती होने का कलंक और शर्म कई महिलाओं को असुरक्षित गर्भपात की ओर ले जाता है. हैरानी होगी ये जानकर कि भारत वो देश है जहां असुरक्षित गर्भपात माताओं की मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है. और 80 प्रतिशत भारतीय महिलाओं को पता ही नहीं है कि 20 सप्ताह के भीतर गर्भपात करवाना असल में लीगल है यानी कानूनी रूप से मान्य.

पिछले साल एक शोध में यह पाया गया था कि कानूनी तौर पर मान्य होने के बावजूद भी अविवाहित भारतीय महिलाएं शर्म की वजह से गर्भपात नहीं करवा पातीं. हाल ही में गर्भपात को अपराध के दायरे से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. जिसमें कहा गया है कि प्रजनन महिलाओं की पसंद का मामला है, इसलिए महिलाओं को प्रजनन और गर्भपात के बारे में फैसला करने का अधिकार होना चाहिए. याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के तहत वर्तमान गर्भपात कानून में अविवाहित महिलाओं का उल्लेख कहीं नहीं किया गया है.

abortionशादी से पहले गर्भवती होने का कलंक कई महिलाओं को असुरक्षित गर्भपात की ओर ले जाता है

हाल ही में वेबसाइट vice ने एक अविवाहित भारतीय महिला से बात की जिसने 20 साल की उम्र में गर्भपात करवाया था. निधी इस बात से पर्दा उठा रही है कि भारत में शादी से पहले अबॉर्शन करवाने के क्या मायने हैं. इस महिला की बात से आप भारत की तमाम महिलाओं की परेशानी समझ सकते हैं जिन्हें गर्भपात के बारे में कोई जानकारी ही नहीं होती है.

* निधी, अपने गर्भपात के बारे में बात करने में तुम कितनी सहज हो?

अगर मैं आपसे ये कहूं कि मैं इसपर बात करने में हमेशा से ही सहज रही हूं तो ये झूठ होगा. मैं कभी भी अपने परिवार के सामने इसके बारे में बात नहीं कर पाउंगी. आप शायद सोच भी नहीं सकतीं कि मेरे जैसी कोई लड़की ऐसा महसूस भी करती होगी क्योंकि मैं खुद को बहुत सशक्त मानती हूं और अपने जीवन के फैसले खुद लेती हूं. मैंने अभी तक इस बारे में सिर्फ अपने दोस्तों और सहकर्मियों से ही बात की है, लेकिन कभी अपने परिवार से नहीं की.

* किस उम्र में गर्भपात करवाया था और तब इसके बारे में तुम कितना जानती थीं?

मैं 20 साल की थी. एक छोटे शहर से आई थी, और मुझे इसके बारे में बहुत ज्यादा पता नहीं था. मैं एक रिलेशनशिप में थी. अबॉर्शन के बारे में मैं सिर्फ इतना जानती थी कि ये पाप है, और ये नहीं करना चाहिए. आपको स्कूलों में सो कॉल्ड सेक्स एजुकेशन की क्लास में यही बताया जाता है. यहां खासतौर पर लड़कियों को ये यकीन दिलाया जाता है कि किसी भी तरह की सेक्शुअल एक्टिविटी से उन्हें सिर्फ लानतें ही मिलेंगी. गर्भपात को हमेशा हत्या के समकक्ष माना गया. असल में आपके शरीर पर आपका अधिकार है, गर्भपात करवाना आपकी अपनी इच्छा है, गर्भपात एक वैध विकल्प है, इस बारे में कभी बात ही नहीं की जाती. छह साल बाद मेरा दूसरा गर्भपात होने तक तो मुझे ये भी पता नहीं था कि ये लीगल है.

* जब पहली बार तुम्हें पता चला कि तुम प्रेगनेंट हो तो तुम्हारा रिएक्शन कैसा था ?

जब मुझे पता चला कि मैं प्रेगनेंट हूं तब तक 2 महीने बीत चुके थे. मुझमें इतनी हिम्मत ही नहीं थी कि मैं प्रेगनेंसी किट लाती, इसलिए मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे लागकर दी. उसके जरिए मुझे पता चला कि मैं प्रेगनेट हूं. और तब मैं बहुत डर गई. मैं बच्चा तो चाहती थी लेकिन इतनी जल्दी नहीं. मेरी उम्र तब केवल 20 साल की थी, मैं तब कॉलेज में थी और चूंकि मैं एक छोटे शहर से थी इसलिए शादी से पहले सेक्स ही बहुत बड़ी बात थी. उसपर प्रेगनेंट हो जाना तो उससे भी बड़ा पाप था.

abortionभारत में अबॉर्शन पाप माना जाता है

* तो जब तुमने बच्चा नहीं रखने का फैसला किया, तब क्या किया?

आपने ऐसे इश्तेहार जरूर देखे होंगे जहां लिखा होता है कि 'बच्चा गिराना हो तो कॉल करें'. मैंने भी कॉल कर लिया. मुझे हमेशा लगता था कि इस तरह के विज्ञापन क्या असली होते हैं. और तब पता चला- हां होते हैं. विज्ञापन पर लिखे नंबर पर मैंने कॉल किया और नॉर्थ दिल्ली के इस क्लीनिक पर मुझे बुलाया गया. ये मध्यमवर्गीय इलाके में एक छोटा सा कमरा था. उसे ढूंढना काफी मुश्किल था इसलिए मुझे उन्हें बार-बार कॉल करना पड़ रहा था. आखिरकार मुझे एक नन्हा सा साइनबोर्ड मिला जिसमें 'मैटरनिटी क्लिनिक' लिखा था. अंदर कोई डॉक्टर नहीं था. लैब कोट पहने कुछ लोग थे जो हर तरफ बैठे थे. न तो शारीरिक रूप से मेरी जांच की गई, न अल्ट्रासाउंड हुआ और न ही मुझसे पूछा गया कि मेरा गर्भ कितने दिन का है. मुझे दो टैबलेट दिए गए और 3,500 रुपये देने के लिए कहा गया. ये उस वक्त मेरे पूरे महीने का खर्च होता था जिसमें मेरा किराया, खाना और बाकी खर्च शामिल था.

* दवाई लेने के बाद क्या हुआ?

मुझे जो दो टैबलेट दी गई थीं, मुझे उम्मीद थी कि वो सरकार की तरफ से एप्रूव ही होंगी. एक को खाना था और दूसरी को वजाइना में डालना था. मैंने गोली ली और इंतजार किया. जिस रात वो गोलियां लीं मुझे लग रहा था जैसे एक ही समय में पेशाब और शौच आ रहा हो. मैं पॉट पर बैठ गई, और एक बड़ी सी रक्तमय गांठ मेरे अंदर से निकल कर गिर गई. अगले 20 मिनट तक मैं वहां से उठ नहीं सकी. मेरे निचले पेट में बहुत दर्द हो रहा था, और टुकड़े मेरे शरीर से बाहर गिरते जा रहे थे. ये शारीरिक रूप से इतना थका देने वाला था कि मुझे खुद को खींचकर अपने बेडरूम तक ले जाना पड़ा था. मैंने ये भी देखा था कि मेरे शरीर से क्या गिरा था. वो एक थैली जैसी चीज थी जो गर्भाशय के अंदर से निकली थी. उस गोली ने यही किया था. ये तरीका सर्जिकल से बिलकुल अलग था, जो दूसरे गर्भपात के दौरान मैंने अनुभव किया था. इन गोलियों के साथ एक खतरा इस बात का भी होता है कि आपके अंदर गर्भ के कुछ अंश बाकी रह सकते हैं जिससे इनफेक्शन की संभावना बनी रहती है. और इसी वजह से भारत में इतनी मौतें होती हैं. मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली थी कि सब कुछ ठीक रहा. अगले 10-15 दिनों में मेरे पीरियड आ गए और भ्रूण के छोटे अंश और टुकड़े बाहर आते रहे.

* भावनात्मक रूप से इसने तुम्हें कितना प्रभावित किया?

जाहिर सी बात है बहुत सारे मानसिक अंतरद्वंद से गुजर रही थी. मैं 20 साल की थी, और महीनों तक मेरी कल्पनाओं में दो आंखें दिखती थीं, हमेशा सोचती थी कि वो लड़का था या लड़की. बहुत लंबे समय तक मैं सेक्स भी नहीं कर सकी थी. मुझे बहुत बुरा लगता था. मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूमती रहती थी कि मैंने एक बच्चे की हत्या की है. अभी तक, कभी-कभी मैं सोचती हूं कि वो बच्चा इस वक्त 14 साल का हो चुका होता.

* उस वक्त तुमसे कही गई कोई ऐसी बात जिसने तुम्हें बहुत परेशान किया हो?

मेरे दूसरे गर्भपात के वक्त परामर्श के दौरान मुझपर परेशान करने वाली टिप्पणियां की गई थीं. मैं 26 साल की थी और मैं दिल्ली की सबसे अच्छी gynecologist में से एक के पास गई. मैंने उन्हें अपने पहले अबॉर्शन के बारे में बताया. पहली बात जो उन्होंने मुझे बताई वो ये थी कि अगर मैं इस बच्चे को नहीं रखूंगी तो मुझे फिर कभी बच्चा नहीं होगा. उन्होंने बताया कि मेरी उम्र बहुत हो चुकी है और मैं फिर कभी गर्भवती नहीं हो पाऊंगी. उन्होंने मुझे और मेरे बॉयफ्रेंड (जो इस परामर्श के दौरान मौजूद था) दोनों को शादी करने की समझाइश दी. उन्होंने उससे कहा कि "तुम अपने किए की पूरी ज़िम्मेदारी नहीं ले रहे हो"

abortionशर्म की वजह से गर्भपात के घरेलू नुस्खे खोजती हैं लड़कियां

* क्या तुम्हें लगता है कि गर्भपात वैध हो जाने से महिलाओं की सोच में बदलाव आएगा?

मुझे लगता है कि कुछ हो न हो लेकिन गर्भपात वैध हो जाने से कम से कम आप इस बारे में बात तो करेंगे. यह एकदम से हो जाने वाला समाधान नहीं है जहां गर्भपात चाहने वाली हर महिला के पास उसकी चॉइस हो. लेकिन इससे बातचीत शुरू हो जाएगी. हमें इसकी जरूरत है क्योंकि भारत में पहले से ही जन्म से संबंधित बहुत सारी बुराइयां हैं जैसे कन्या भ्रूण हत्या और गर्भवती महिलाओं के खिलाफ अपराध. ये गर्भपात पेशेवर चिकित्सा सहायता के साथ नहीं होते हैं. इसके लिए लोग घरेलू तरीकों और दाइयों की मदद लेते हैं. और इस तरह के गर्भपात भारी संख्या में होते हैं. गर्भपात के अधिकार को तो भूल जाइए, यहां तो महिलाएं गर्भपात के बारे में बात तक नहीं करतीं. उम्मीद है कि यह बातचीत छोटे शहर की महिलाओं को भी जोड़ सकेगी. साथ ही, अवैध रूप से चल रहे गर्भपात क्लीनिक जैसे घोटाले नहीं होंगे. मुझे देखो, मैंने खुद ऐसी ही जगह से अबॉर्शन करवाया था.

* तुम्हारे आसपास के लोग अबॉर्शन को लेकर कितने मुखर हैं?

मुझे ऐसा नहीं लगता. हम अपने-अपने में रहते हैं. आप और मेरे जैसे लोग साथ बैठकर अबॉर्शन और इसके 20 हफ्तों पर चर्चा कर सकते हैं. ये एक छोटा समूह है जो बड़ा हो रहा है. लेकिन ऐसा ही तो धारा 377 के वैध होने पर हुआ था. शुरुआत कुछ लोगों से ही होती है. लेकिन मुझे लगता है कि अबॉर्शन की शर्म से पूरी तरह से आजाद होने में हमें अभी वक्त लगेगा.

* क्या तुम उस 20 साल की लड़की से कुछ कहना चाहोगी जो गोलियां लेने उस छोटे से क्लीनिक पर गई थी?

पढ़ो, वीडियो देखो और पॉडकॉस्ट को सुनो. घबराओ मत. तब मैं बेवकूफ नहीं, अनजान थी. लेकिन मैं उन कुछ खुशकिसमत लोगों में से एक थी जो एक असुरक्षित गर्भपात से बच गई थी. जबकि बहुत सी बच नहीं पातीं.

इस लड़की के गर्भपात की कहानी लोगों को अजीब लगेगी, हो सकता है कि लोग इस पर शिष्टता का ज्ञान भी देने लगें. क्योंकि शादी से पहले सेक्स को लेकर लोगों की सोच से हम सभी वाकिफ हैं. लेकिन हकीकत से आप मुंह मोड़ेंगे तो आप खुद को ही धोखा दे रहे होंगे. और हकीकत ये है कि आज शादी से पहले सेक्स करना आम बात है. लोगों के लिए सेक्स टैबू नहीं है, लेकिन हां इसपर बात करना आज भी टैबू ही है. और समाज के इसी रवैए की वजह से अविवाहित महिलाओं का गर्भवती हो जाना शर्म की बात माना जाता है. इसी शर्म की वजह से असुरक्षित तरीके अपनाकर ये महिलाएं अपनी जान भी दांव पर लगा देती हैं. निधि की बातों का सार यही है कि भारत में एक अविवाहित महिला के अबॉर्शन के मायने सिर्फ मौत से टक्कर लेना है. खुशकिस्मत रहे तो बच जाओगे. इसलिए बेहतर यही है कि सेक्स, खासकर सुरक्षित सेक्स के बारे में खुलकर बात की जाए. गर्भपात के अधिकारों पर कानून सोच ही लेगा, लेकिन इस बारे में हम ही को सोचना होगा.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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