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Updated: 07 जुलाई, 2017 10:04 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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इंसान के जीवन का सबसे अच्छा समय उसका बचपन है. ये एक ऐसा समय है जब व्यक्ति केवल अपने में पूरी तरह मग्न और बेफिक्र रहता है. आप अपने बचपन को याद करिए आपको वहां ऐसा बहुत कुछ मिल जायगा जिसकी हसीं यादों में खोने के बाद आप उससे बाहर निकलना ही नहीं चाहेंगे. बचपन बस बचपन है, एक ऐसा समय जब व्यक्ति अपने अनुभवों से दुनिया को देखता है और चीजों को अपने अंदाज में समझता है. कहा जाता है कि एक बच्चा अपने बचपन को जितना जीयेगा उतना ही अधिक वो जीवन जीने का तरीका सीखेगा.

हो सकता है कि ऊपर लिखी बात के सांचे में, शायद मैं और आप बिल्कुल फिट बैठते हों मगर हांग्जो के चेन यी इस सांचे में न समा पाए. 7 साल के चेन यी से उसका बचपन सिर्फ इस बात पर छीना जा रहा है कि उसे अपने देश के लिए गोल्ड जीतना है. एक गोल्ड मेडल की कीमत अगर किसी का हंसता खेलता बचपन छीनना है तो इसकी निंदा भरपूर होनी चाहिए. बात आगे बढ़ाने से पहले हम आपको एक खबर से अवगत कराना चाहेंगे. खबर चीन के हांग्जो से है जहां 7 साल का चेन यी लोगों के आकर्षण और चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

आकर्षण का केंद्र इसलिए क्योंकि लड़के के 6 नहीं बल्कि 8 पैक ऐब्स है और चर्चा इसलिए कि ये लड़का आगे चलकर ओलंपिक में चीन को जिम्नास्टिक में गोल्ड दिलवाएगा. जी हां बिल्कुल सही सुना आपने 'पीपल्स डेली चाइना' के अनुसार चेन जब सिर्फ 5 साल का था, तब से ही उसकी ट्रेनिंग एक पेशेवर जिम्नास्ट की तरह हो रही है.

चीन, जिम्नास्टिक, ओलंपिक, गोल्ड चेन के 8 पैक्स ये बताने के लिए काफी हैं कि हमने बचपन को लोकप्रियता की भेंट चढ़ा दिया है चीन में एक जिमनास्ट की ट्रेनिंग कैसे होती है इसके कई वीडियो इंटरनेट पर पड़े हैं जिनको देखने मात्र से ही आपके होश उड़ जाएंगे. बताया ये भी जा रहा है कि 7 साल का ये बच्चा चेन यी खेल कूद में जितना अच्छा है उतना ही अच्छा ये पढ़ाई में भी है. चेन के कोच के अनुसार ये पढ़ाई के साथ-साथ अपनी ट्रेनिंग पर भी पूरा ध्यान रखता है.

बहरहाल, जिस उम्र में खुल के सांस लेना चाहिए उस उम्र में चेन को वो करने पर मजबूर किया जा रहा है जो एक आम बच्चे की कल्पना से परे है. चीन को चेन से मेडल की चाह है. चेन चीन को मेडल दे ही देगा मगर इस खबर के कई अन्य पहलू भी हैं यदि इसे हम भारत के सम्बन्ध में देखें तो मिलता है कि वर्तमान समय में मां बाप अपनी कुंठाओं और द्रमित इच्छाओं को अपने बच्चे पर लाद रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप बच्चे न सिर्फ हीन भावना का शिकार हो रहे हैं बल्कि गहरे अवसाद तक में जा रहे हैं.

आज भारत में जिस संख्या में लोग अपने बच्चों को रियलिटी शो या किसी ऐसी जगह जहां से उन्हें लोकप्रियता मिले, भेज रहे हैं और जिस तरह उनके असफल हो कर घर आने के बाद बच्चे को प्रताड़ित कर उन्हें गहरे अवसाद में ढकेला जाता है वो अपने आप में एक बड़ी चिंता का विषय है.

अंत में हम इतना ही कहेंगे कि चाहे चीन का चेन यी हो या भारत का चुन्नू इन बच्चों का बचपन छीन कर उन्हें एक ऐसी राह पर छोड़ा जा रहा है जहां से निकलना न सिर्फ मुश्किल है बल्कि दुःख देने वाला भी है. आज समय आ गया है कि लोगों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि कहीं एक समय ऐसा न आए जब न तो आपका बच्चा आपको सफलता ही दिलवा पाए और न खुद की ही जिंदगी जी पाए.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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