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Updated: 16 जून, 2019 03:59 PM
विनय कुमार
विनय कुमार
  @vinaya.singh.77
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किसी भी पिता से पूछिए कि उसका बच्चा उसके लिए क्या होता है और आपको कमोबेश हर पिता से एक ही जवाब मिलेगा "वह उसकी दुनिया होता है". और अगर वही बच्चा उसकी आंखों के सामने ही मौत के मुंह में समां जाए तो उसकी दुनिया जैसे ख़त्म ही हो जाती है. आज के दिन जब पूरे विश्व में पिता का दिन (Father's Day) मनाया जा रहा है, यह दिन बिहार (Bihar), खासकर मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में तमाम पिताओंके लिए सबसे त्रासद दिन बन कर आया है. इन्सेफेलाइटिस (Encephalitis) या मस्तिष्क ज्वर पूर्वांचल और उससे सटे बिहार के क्षेत्र के लिए हर वर्ष बच्चों की मौत का एक जाना पहचाना कारण बन चुका है लेकिन न तो प्रशासन और न ही क्षेत्र के सांसद या विधायक इसके लिए सोचते हैं.

आज अगर आपने सुबह से अख़बारों या न्यूज़ चैनल को देखा होगा तो शायद एक न्यूज़ चैनल को छोड़कर किसी भी चैनल में मुजफ्फरपुर में बच्चों की हो रही मौत के लिए कोई समाचार विस्तार से देखा होगा. हर चैनल के लिए सबसे बड़ी खबर है England में हो रहा India vs Pakistan World Cup 2019 का मुक़ाबला है. सुबह से ही हर चैनल पर इंग्लैंड में मौसम कैसा रहेगा, क्या आज का मैच बारिश की भेंट चढ़ जाएगा, हिन्दुस्तान हर बार की ही तरह इस बार भी क्या पाकिस्तान को धूल चटा पायेगा, जैसी ख़बरें ही प्रमुखता से दिखाया जा रहा है.

बिहार के मुजफ्फरपुर में Father's Day कई पिताओं के लिए एक दुखद मायूसी लेकर आया है.बिहार के मुजफ्फरपुर में Father's Day कई पिताओं के लिए एक दुखद मायूसी लेकर आया है.

इसी में कोई बड़ा नेता अयोध्या के दौरे पर है, वह भी दिखाया जा रहा है. जगह-जगह पूजा अर्चना हो रही है, लोग दुआएं तो मांग रहे हैं, लेकिन बस क्रिकेट में अपने देश की जीत के लिए. किसी-किसी चैनल पर नीचे एक पंक्ति में बच्चों के मौत की गिनती उसी तरह आ रही है जैसे चुनाव परिणाम में दलों के सीटों की संख्या आती है. अखबार भी क्रिकेट की खबरों और पिता दिवस पर तमाम व्यापारिक संस्थानों द्वारा दिए जा रहे लुभावने प्रलोभन और प्रचार से ही पटे पड़े हैं, उनमें भी किसी कोने में चंद पंक्तियों में बच्चों की मौत की खबर छपी है.

अब किसी भी ऐसे देश में जहां बच्चों की मौत की परवाह किसी को भी नहीं है, सिर्फ उनके हताश और तकलीफ में रोते माता पिता के सिवा. वैसे देश में प्रशासन और नेता आखिर क्यों बच्चों की जिंदगी के लिए परेशान होंगे. जहां इन बच्चों के लिए न तो अतिरिक्त मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है और न तो अगल-बगल के जिलों से डॉक्टर्स बुलाये गए हैं, वहां आज के दिन विशेष पर पिता अपने बच्चों को खोने के लिए अभिशप्त ही रहेंगे. क्या इस समय मुजफ्फरपुर में इमरजेंसी घोषित करके सिर्फ बच्चों को बचाने के लिए ढेर सारे अस्थायी हस्पताल नहीं खुलवाए जा सकते हैं, देश की राजधानी या प्रदेश की राजधानी से बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं बुलवाये जा सकते.

अब ऐसे में अगर आज दिन भर इंग्लैंड में मूसलाधार बरसात हो और आज का हिन्दुस्तान पकिस्तान का मैच रद्द हो जाये, हिन्दुस्तान में बुलेट ट्रैन शुरू होने के पहले ही बंद हो जाए, अंतरिक्ष में लोगों को भेजने का कार्यक्रम फिलहाल मुल्तवी हो जाए और बिहार के मुख्यमंत्री ये देश के प्रधानमंत्री भविष्य में राजनीति में असफल सिद्ध हों, तो कम से कम मुझे कोई अफ़सोस नहीं होने वाला. जो देश अपने भविष्य के प्रति इतना संवेदनहीन हो सकता है, वह कुछ अच्छा प्राप्त करने के लायक कैसे हो सकता है.

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लेखक

विनय कुमार विनय कुमार @vinaya.singh.77

लेखक बैंक ऑफ इंडिया (जोहनसबर्ग, साउथ अफ्रीका) में चीफ मैनेजर थे, अभी भोपाल में रह रहे हैं

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