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Updated: 02 सितम्बर, 2019 05:16 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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सोमवार की सुबह जब लोग घर से ऑफिस के लिए निकले तो आदतन जल्दबाजी में थे. वो ये भूल गए थे कि रविवार यानी 1 सितंबर से मोटर व्हीकल एक्ट-2019 लागू हो गया है. आदत से मजबूर मोटर साइकल पर सवार लोग बिना हेल्मेट के दिखाई दिए, जल्दबाजी में Wrong side पर गाड़ियां भी चल रही थीं. इन्हें पता नहीं कि आगे सफेद वर्दी में कुछ लोग इन्ही जैसों के इंतजार में हैं. वहीं जिन्हें नए कानून की जानकारी थी, वो कायदे से नियमों को पालन करते भी दिखे. और इस वजह से सड़कों पर ट्रैफिक बेहतर भी नजर आया. पुलिस वालों की ऐसी मुस्तैदी देखकर सड़क पर चलने वाले हैरान भी हैं और परेशान भी.

मोटर व्हीकल एक्ट में हुए संशोधन के बाद अब सड़क पर चलते वक्त ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत है. ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने पर अब जो जुर्माना भरना पड़ रहा है वो लोगों पर बहुत भारी पड़ रहा है. ट्रैफिक पुलिस वालों के आगे लोग हाथ जोड़कर खड़े होने के लिए मजबूर हैं.

traffic rulesलोगों पर भारी पड़ रहा है जुर्माना

पहले दिन के चालान बता रहे हैं कि कुछ आदतें जाते जाते ही जाएंगी

राजस्थान और बंगाल को छोड़कर नया मोटर व्हीकल कानून 1 सितंबर को आधी रात 12 बजे से पूरे भारत में लागू हो गया. इसके लिए दिल्ली में पुलिस के 2500 जवान सड़कों पर तैनात थे. जिनका मकसद सिर्फ नियमों का उल्लंघन करने वालों को पकड़ना और चालान काटना था. पहले दिन दिल्ली पुलिस ने जमकर चालान काटे. शाम 7 बजे तक 3900 चालान काटे गए. पहली तारीख को रविवार था यानी कामकाजी दिनों की तुलना में सड़कों पर कम लोग रहे होंगे, तब भी 3900 लोगों का चालान कट गया. लेकिन जरा सोचिए कि सोमवार को कितने चालान कटेंगे, जब नौकरीपेशा लोग भी अपने काम पर निकलेंगे.

इतने चालान होना ये भी बताता है कि लोग ट्रैफिक नियमों को गंभीरता से नहीं लेते. कुछ लोगों को तो लगता है कि ये नियम सिर्फ बड़ी गाड़ियों के लिए होते हैं, बाइक वालों के लिए नहीं. कुछ लोगों को लगता है कि ट्रैफिक पुलिस महिलाओं को छोड़ देती है. कुछ मानते हैं कि हरी बत्ती होने के 4 सेकंड पहले गाड़ी बढ़ा लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता. और ये मानसिकता ऐसी है जो जाते-जाते ही जाएगी, जब हर रोज अखबारों में हजारों की तादात में चालान होने की खबरें देखेंगे.

नए कानून को हल्के में तो बिलकुल मत लीजिए

जी हां, जितना आप सोच नहीं सकते ये उससे ज्यादा खतरनाक है. यानी पहले 100 रुपए का जो चालान कटता था उसके लिए अब 500 देने होंगे. इतना ही नहीं और भी बहुत कुछ है जिसे गांठ बांध लेने की जरूरत है.

- इमरजेंसी व्हीकल को रास्ता नहीं देने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना देना होगा.

- डिसक्वालिफाई किए जाने के बावजूद अगर कोई शख्स गाड़ी चलाता है तो उसे 10 हजार रुपए जुर्माने के तौर पर देने होंगे.

- उबर-ओला जैसे एग्रिगेटर अगर डाइविंग लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उन पर 1 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं जरूरत से

- ज्यादा सवारी बैठाने पर 20 हजार रुपए जुर्माना लगेगा.

- स्पीड लिमिट क्रॉस करने पर पहले 500 रुपए जुर्माना था लेकिन अब 5000 है.

- बिना इंश्योरेंस पेपर्स के गाड़ी चलाने पर अब 2000 रुपए देने होंगे.

- हेलमेट नहीं पहने पर 1000 रुपए देने होंगे साथ ही 3 महीने के लिए लाइसेंस को सस्पेंड भी किया जा सकता है.

- नाबालिग सड़क पर कोई दुर्घटना करता है तो उसके माता-पिता दोषी माने जाएंगे. और उनपर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगेगा. गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पेपर्स रद्द कर दिए जाएंगे और 3 साल तक की जेल भी हो सकती है.

- नशे में गाड़ी चलाने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना देना होगा.

- ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर 500 रुपए का जुर्माना देना होगा.

- रैश ड्राइविंग करने पर 5000 रुपए का जुर्माना लगेगा.

बाकी के नियम यहां देखे जा सकते हैं-

motor vehicles act

motor vehicles act

क्या सुरक्षा के साथ-साथ करप्शन भी बढ़ेगा?

देखा जाए तो नए कानून के हिसाब से ये चालान बहुत ज्यादा है. सोशल मीडिया पर चालान की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर लोग जरा असंतुष्ट दिखे. लोगों का कहना है कि चालान की कीमत बढ़ा देने से ट्रैफिक पुलिस में करप्शन बढ़ेगा. जो पुलिस वाले पहले 50 रुपए में मान जाते थे वो अब 500 लिए बिना नहीं मानेंगे. वैसे भी पुलिस वालों की छवि इस मामले में बहुत अच्छी नहीं रही है.

लेकिन लोगों का ये सोचना सिर्फ चालान की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर है. देखा जाए तो लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति सजग करने के लिए ही चालान इतना बढ़ाया गया. पहले लोग हेल्मेट नहीं लगाने पर 100 रुपए फाइन दे दिया करते थे. उनके लिए 100 रुपए कोई बड़ी रकम नहीं थी. लेकिन अब 1000 रुपए जेब से चले जाएंगे तो दुख होगा. जान की परवाह करें न करें लेकिन पैसे चले जाने के डर से तो लोग हेल्मेट पहनेंगे ही.

लेकिन अब बाकी डिपार्टमेंट्स को भी चौकन्ना होना होगा

लोगों को ट्रैफिक पुलिस की ये सख्ती बहुत चुभ रही है. जाहिर है. अब सड़क पर गाड़ी निकालने से पहले गाड़ी के पक्के कागजात भी रखने होंगे और ट्रैफिक लाइट पर नजर भी. लेकिन इस खीज में लोग ट्रैफिक पुलिस पर ही निशाना साध रहे हैं. अब अगर किन्हीं और वजहों से ट्राफिक बाधित हो रहा है तो उसके लिए भी ट्रैफिक पुलिस को दोष दिया जा रहा है. जैसे-

- सड़क पर अगर गाय और भैंस बैठ गई हैं तो ट्रैफिक पुलिस का सिर खाया जा रहा है.

- बारिश की वजह से सड़के किनारे पानी भर जाने पर जाम लगा हुआ है उसकी शिकायत भी पुलिस से की जा रही है क्योंकि ऐसे में लोगों को गलत दिशा में जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है.

- पुलिस वाले बड़े मार्गों पर तो तैनात दिख रहे हैं लेकिन हर जगह नहीं. लोग वहां नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और उसके लिए उन्हें कोई देख नहीं रहा.

- पुलिस के सामने तो लोग हैल्मेट निकालकर पहन लेते हैं, लेकिन थोड़ी दूर जाकर हेलमेट निकाल देते हैं.

- एक दिन पुलिस वाले नियम तोड़ने वालों पर नजर रखते हैं, चालान काटते हैं. अगले दिन स्थिति वैसी की वैसी हो जाती है. कोई पुलिस वाला नजर नहीं आता.

ऐसी स्थिति में ट्रैफिक पुलिस विभाग को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा और अपनी कमियों को भी सुधारना होगा. इस स्थिति में न सिर्फ ट्रैफिक पुलिस बल्कि PWD को भी मुस्तैद रहने की जरूरत है. सड़क को व्यवस्थित रखने के लिए सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं सड़क के हालात भी मायने रखते हैं. वैसे भी सोशल मीडिया के जमाने में अब पुलिस की गलतियां गिनवाने में भी लोगों को समय नहीं लगता. पुलिसवालों को भी नियम मानने होंगे.

लेकिन एक बात तो है. इससे पहले कभी भी ट्रेफिक नियमों को लेकर इतनी सख्ती नहीं देखी गई. उद्देश्य यही है कि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सुरक्षित रहें. एक स्टडी कहती है कि हमारे देश में 2017 में आतंकवाद के कारण मारे गए लोगों की संख्या 766 थी लेकिन भारत में हुए सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या करीब 1 लाख 48 हज़ार थी. 2017 में देश में करीब 4.64 लाख रोड एक्सीडेंट हुए थे. ये आंकड़े हमारी आखें खोलने के लिए जरूरी हैं. साथ ही ये ये भी बता रहे हैं कि इस नए कानून की कितनी जरूरत थी. लेकिन नए को अपनाने में वक्त लगता है. लोग सुधरेंगे. लेकिन नियम तोड़ने की आदतें तो जाते-जाते ही जाएंगी. लेकिन अगर अब न सुधरे तो कभी सुधर नहीं पाएंगे.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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