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Updated: 09 फरवरी, 2019 06:23 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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हिंदुस्तान का संविधान बहुत ही बड़ा है और इसमें लाखों नियम हैं. अगर एक तरह से देखा जाए तो जितने नियम और कानून बनाए गए हैं शायद उससे ज्यादा लोग नियम और कानून तोड़ने में लगे रहते हैं. कानून तोड़ने के लिए सिर्फ आम लोग ही नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारी और यहां तक कि पुलिस अधिकारी भी तैयार रहते हैं. चलिए एक छोटा सा सवाल पूछते हैं. ऐसे कितने पुलिस वाले और ट्रैफिक वाले रहे हैं जिन्हें आपने बिना हेल्मेट, ट्रिपलिंग करते हुए बाइक पर जाते देखा है? शायद इसकी गिनती भी नहीं होगी.

कई बार हमारे मन में आता है कि हम उन लोगों को टोक दें, उनसे नियमों का पालन करने को कहें, लेकिन डर लगता है कि इसका अंजाम क्या होगा. कुछ ऐसा ही हुआ मुंबई के एक इंसान के साथ जिसे एक कॉन्सटेबल को सबक सिखाना महंगा पड़ गया.

कुछ भी करें, लेकिन पुलिस वाले का ईगो न हर्ट करें-

ये सब शुरू हुआ जब पवन सय्यादनी और उसके साथ दो अन्य राहगिरों ने एक हवलदार को मुंबई के खेरवाड़ी में बिना हेलमेट जाते देखा. पवन ने उस हवलदार को रोका. पंड्रीनाथ रामू (हवलदार) उनके कहने पर रुक भी गया और उस समय पवन और उसके साथियों ने रामू से पूछा कि उसने आखिर क्यों हेलमेट नहीं पहना है. हवलदार ने अपने हिसाब से जवाब दिया, लेकिन पवन थोड़ा गुस्से में था और उसने हवलदार से उसकी बाइक की चाभी छीन ली.

पुलिस, मुंबई, कानून, ट्रैफिकपुलिस वाले अगर कानून तोड़ें तो उन्हें कानून तोड़कर ही सज़ा नहीं दी जा सकती.

इस पूरे मामले में आस-पास खड़े लोग तालियां बजा रहे थे, लेकिन फिर मामला सीरियस होते देख एक व्यक्ति ने हवलदार को हेलमेट दे दिया. बात तब सामने आई जब अशोक गावस नाम के व्यक्ति ने ये सब रिकॉर्ड कर वॉट्सएप पर वायरल कर दिया.

(वीडियो साभार मुंबई मिरर)

पवन को वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि उनसे इसी कारण पैसे लिए गए तो वो ऐसे एक पुलिस वाले को कैसे छोड़ देंगे. पवन काफी गुस्से में लग रहे हैं और हवलदार एकदम शांती से मामले को खत्म करने की कोशिश कर रहा है. जब हवलदार ने पूछा आखिर उसे क्यों निशाना बनाया जा रहा है तो पवन ने कहा ये कानून है और यहां यही होगा. इसके अलावा, पवन ने हवलदार को गाली भी दी.

पर पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त...

जैसे ही हवलदार वहां से निकला उसने दूसरे इलाके में पहुंचकर पवन, अशोक और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी. ये शिकायत सेक्शन 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और सेक्शन 341 (गलत तरह से दंड देना) के आधार पर की गई.

इस मामले में जब निर्मल नगर पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर सुभाष जाधव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वो तीनों घटना के वक्त नशे में थे.

सज़ा तो सभी को मिली, लेकिन-

पवन और उसके साथियों को 2 दिन की हिसारत में रखा गया और उसके बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत की सज़ा मिली. हेलमेट न पहनने के लिए रामू को भी छोड़ा नहीं गया. उसे भी कानून के हिसाब से 500 रुपए का चालान भरना पड़ा.

जहां कुछ लोगों को लगेगा कि इस मामले में पुलिस वाले की पूरी गलती है और पवन और उसके साथी हीरो हैं, वहां एक बार ये सोचने की भी जरूरत है कि क्या कानून तोड़ने की सज़ा देने के लिए खुद कानून तोड़ना सही था? मतलब एक अगर गलती कर रहा है तो दूसरी गलती हम करें. पुलिस वाले को रोकने और हेलमेट के बारे में पूछना ठीक था, लेकिन उसे गाली देना और बल पूर्वक उसकी बाइक की चाभी ले लेना ये किसी को सबक सिखाने का तरीका नहीं होता है.

किसी भी मामले में ये संजीदगी दिखाने की जरूरत होती है. हवलदार के साथ वैसा ही सलूक किया जाना चाहिए था जैसा कि आम इंसान के हेलमेट न पहनने पर होता है. कोई आम इंसान अगर पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है तो उसका चालान ही काटा जाता है, उसे सार्वजनिक रूप से न तो जलील किया जाता है, न ही उसे गालियां दी जाती हैं.

पवन ने यहां जो काम किया वो किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उसे कानून की चिंता नहीं थी बल्कि इस बात का गुस्सा था कि उससे क्यों 1000 रुपए लिए गए और उसका चालान क्यों काटा गया. अगर उसे दंड भुगतना पड़ा है तो बाकी लोगों को क्यों नहीं और पुलिस वाले कैसे बच सकते हैं. ये वही बात हो गई कि हम अपने दुख से दुखी नहीं हैं बल्कि दूसरे के दुख से ज्यादा खुश हैं.

कई मामले में लोग कहेंगे कि पवन ने सही किया और उसने सबक सिखा दिया पुलिस वाले को, लेकिन ये किस कीमत पर? उसी कानून को तोड़कर जिसकी दुहाई देकर पवन ने ये सब किया है. उस पुलिस वाले की शिकायत की जा सकती थी, उसकी फोटो वायरल की जा सकती थी, उसे रोककर बोला भी जा सकता था, लेकिन इस पूरे मामले में किसी भी हालत में गाली देना या उस पुलिस वाले पर बल का प्रयोग करना सही नहीं था. इंसान की नहीं तो कम से कम वर्दी की तो इज्जत की जा सकती थी न.

पुलिस वाले अपने लिए कानून नहीं मानते हैं और उन्हें हर बात के लिए छोड़ दिया जाता है ये सोचकर गुस्सा जरूर आता है, लेकिन क्या इस गुस्से के कारण हम हर उस पुलिस वाले को असॉल्ट करना शुरू कर देंगे जो नियम तोड़ रहा है. अगर पुलिस वाले ने नियम और कानून तोड़ा तो कानून पवन ने भी तोड़ा. जो किसी भी हालत में सही नहीं है.

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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