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Updated: 16 फरवरी, 2018 05:02 PM
अरविंद मिश्रा
अरविंद मिश्रा
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भारत से जुड़ी सैन्य खुफिया सूचनाएं प्राप्त करने के लिए समय समय पर भारत के खिलाफ 'हनीट्रैप' नामक हथियार का इस्तेमाल करता रहा है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI सोशल मीडिया पर अपना जाल बिछाती है और फिर पैसे, विदेश घुमाने का लालच या फिर लड़कियों से अश्लील बातें करवाने के एवज में गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेती है. इस 'हनी ट्रैप' के द्वारा किसी महिला जासूस को बकायदा जिम्मेदारी दी जाती है कि वह संबंधित अधिकारी, नेता या ऊंचे पदों पर बैठे व्यक्तित्व को अपने हुस्न के जाल में फंसाकर जरूरी गुप्त सूचनाएं जुटाए और इसके एवज़ में उसे पैसे दिए जाते हैं. किसी देश को उसके दुश्मन देश का कोई अहम सैन्य दस्तावेज़ हाथ लग जाता है तो उसके खिलाफ रणनीति बनाना काफी हद तक आसान हो जाता है.

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अभी हाल ही में ऐसे कई भारतीय सैन्य अधिकारियों ने इस 'हसीन' जाल में फंसकर बेहद महत्वपूर्ण कागजात पाकिस्तान को दे दिए. जैसे चौदह जनवरी यानि 'वैलेंटाइन डे' के दिन भारतीय सेना की खुफिया विभाग ने जबलपुर स्थित आर्मी बेस वर्कशॉप से लेफ्टिनेंट कर्नल को खुफिया कागज़ात पाकिस्तान को लीक करने के आरोप में हिरासत में लिया. इसके ठीक एक सप्ताह पहले ही दिल्ली पुलिस ने एयर फोर्स के अधिकारी अरुण मारवाह को खुफिया जानकारी ISI को देने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

अरुण मारवाह की गिरफ्तारी के बाद IB द्वारा हनीट्रैप में न फंसने का अलर्ट भी जारी किया गया है, जिसके अनुसार “खूबसूरत लड़कियां अधिकारियों को हनीट्रैप में फंसाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां हासिल कर सकती हैं.” इसके बावजूद जबलपुर से लेफ्टिनेंट कर्नल को खुफिया कागज़ात पाकिस्तान को लीक करने के आरोप में हिरासत में लिया गया.

हालांकि, ऐसा पहला मौका नहीं है कि पाकिस्तान की ISI ने हनीट्रैप जैसे हथकंडे का इस्तेमाल किया हो. ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं. मसलन पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में तैनात एयरमेन सुनील कुमार को एक महिला को गोपनीय जानकारियां ई-मेल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, सिकंदराबाद में तैनात भारतीय सेना के जवान नायब सूबेदार पाटन कुमार पोद्दार पाकिस्तान की एक महिला जासूस के जाल में फंस गया था और लंबे समय तक सेना के अहम राज बताता रहा था.

पिछले साल ही ISI ने गुप्त सैन्य सूचनाएं हासिल करने के लिए इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात तीन भारतीय अधिकारियों को फंसाने के लिए हनीट्रैप का जाल बिछाया था, लेकिन समय रहते साजिश का पता चलने के बाद तीनों अधिकारियों को भारत वापस बुला लिया गया था. सबसे चर्चित हनीट्रैप का मामला साल 2010 का है जब पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात माधुरी गुप्ता द्वारा ISI को खुफिया जानकारी देने के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। ऐसे न जाने कितने उदाहरण हमारे सामने हैं. इन सभी मामलों में सबसे विचलित करने वाली बात ये है कि सभी का मकसद हसीनाओं या फिर पैसों का इस्तेमाल कर सामने वालों से गोपनीय जानकारियां हासिल करना था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक आंकड़ों के अनुसार पिछले चार सालों में रक्षा से जुड़े रिटायर्ड अधिकारियों सहित कुल 13 अफसरों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. ज़ाहिर है ऐसे मामले लगातार होते ही रहते हैं.

ऐसे में अहम सवाल ये उठता है कि आखिर हमारे सिस्टम में क्या खामियां हैं जिसके कारण इस तरह से देश की रक्षा से संबंधित जानकारियां हमारे दुश्मन देश तक पहुंच जाती हैं. क्यों नहीं सरकार ऐसी गाइडलाइंस बनाती है जिसमें इन सेनाकर्मियों को चाहे वो कार्यरत हों अथवा सेवानिवृत, सोशल मीडिया से वंचित रखा जा सके.

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लेखक

अरविंद मिश्रा अरविंद मिश्रा @arvind.mishra.505523

लेखक आज तक में सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

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