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Updated: 24 मार्च, 2020 03:42 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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नागरिकता संशोधन कानून (Anti CAA Protest) के नाम पर दिल्ली के शाहीनबाग़ (Shaheenbagh) में पिछले 100 दिनों से जारी ड्रामे का आखिरकार अंत हो ही गया. एक ऐसे समय में जब देश भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर हड़कंप मचा हो, पुलिस ने धरना स्थल पर कार्रवाई करते हुए उसे खाली कराया. बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) भारी फ़ोर्स के साथ मौके पर पहुंची और बुलडोज़र और जेसीबी मशीन की मदद से धरना खाली कराया गया. इस दौरान जहां एक तरफ पुलिस ने टेंट, फर्श, तख्त जैसी चीजों को अपने कब्जे में ले लिया. तो वहीं उन महिलाओं को हिरासत में भी लिया जो यहां बैठकर धरना दे रही थीं. अचानक हुई इस सर्जिकल स्ट्राइक पर दिल्ली पुलिस का यही तर्क है कि ये एक्शन कोरोना वायरस के खतरों से निपटने और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है.

Shaheenbagh, Delhi Protest, Coronavirus, Lockdown, Delhi  शाहीनबाग़ जिसके कारण बीते 100  दिनों से दिल्ली और नोएडा के लोग परेशान थे आखिरकार उस धरने को पुलिस ने बल प्रयोग कर ख़त्म कर दिया

हो सकता है कि शाहीनबाग़ का धरना खत्म होने की इस खबर के बाद, दिल्ली पुलिस के इस फैसले को एक समझदारी भरा फैसला कहा जाए और पुलिस की तारीफ हो तो बता दें कि इसमें तारीफ करने लायक कुछ नहीं है. तारीफ तब होती जब आज जैसा एक्शन धरने के शुरुआती दौर में लिया जाता.

बात सीधी और साफ है.शाहीनबाग़ प्रदर्शन सरकार से नहीं बल्कि एक वायरस के बल बूते खत्म हुआ. यदि ये वायरस न आता तो यही दिल्ली पुलिस बस बैरिकेडिंग लगाकर चौकीदार की भूमिका में रहती और ये धरना बदस्तूर जारी रहता. बात आगे बढ़ाने से पहले बता दें कि शाहीनबाग़ की ही तरह दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया और सीलमपुर में भी एक्शन लिया है और वहां से भी धरने को खत्म कराकर प्रदर्शनकारियों को अपने अपने घर भेजा है.

ध्यान रहे कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन करने आए जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के बाद अस्तित्व में आया शाहीनबाग़ लंबे समय से सरकार की आंख की किरकिरी था. अभी हाल ही में सम्पन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी शाहीनबाग़ को एक बड़े मुद्दे की तरह पेश किया गया. जहां इसे लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली थी.

तब उस वक़्त अरविंद केजरीवाल ने इस धरने के जिम्मेदार भाजपा की नीतियों को ठहराया था. तो भाजपा ने भी दिल्ली सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा था कि इस धरने को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संरक्षण दे रहे हैं.

इन बीतें हुए 100 दिनों में ऐसे तमाम मौके आए हैं जब धरने को खत्म किये जाने को लेकर बातें हुईं हैं. चूंकि धरना आम लोगों को होने वाली परेशानियों से जुड़ा था इसलिए भी इसे जनसमर्थन मिला और मांग हुई कि इसे खत्म किया जाए. मामले को किस हद तक पेचीदा बनाया गया इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मामले को लेकर कोर्ट कचहरी की नौबत आई और तब कोर्ट ने भी दिल्ली पुलिस को यही आदेश दिया कि वो जल्द से जल्द धरना स्थल को खाली कराए.मगर नतीजा ढाक के तीन पात.

शाहीनबाग़ के प्रदर्शनकारियों ने किसी की परवाह नहीं की. अपनी जिद पर अड़े रहे और धरने को जारी रखा. जैसे जैसे दिन बीते लोगों का रोष बढ़ता गया.

शाहीनबाग़ का धरना खाली हो इसलिए कोर्ट की तरफ़ से दोबारा प्रयास किये गए और एक प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए फिर शाहीनबाग़ भेजा गया जिन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने बुझाने और धरना खत्म करने की बात की. लेकिन यहां भी विफलता ही हाथ लगी और शाहीनबाग़ के प्रदर्शनकरियों ने अपना धरना जारी रखा.

अब जबकि पूरे भारत भर में कोरोना वायरस को लेकर स्थिति गंभीर हो गयी है और एक के बाद बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं. लोग मर रहे हैं पुलिस का शाहीनबाग़ से धरना हटाना ये बताता है कि इसमें सरकार के प्रयास दाल में नमक बराबर थे. पुलिस ने जो किया उसकी एक बड़ी वजह कोरोनावायरस को लेकर मचा डर था.

अगर शगीनबाग़ का ये धरना पहले ही खत्म होता तो सरकार की इज्जत बनी रहती मगर चूंकि इस धरने के खत्म किये जाने की वजह कोरोना वायरस रहा इसलिए जब कभी ये घटना इतिहास में दर्ज होगी कोरोना वायरस को इस धरने के खत्म होने की एक बड़ी वजह माना जाएगा.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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