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Updated: 23 मार्च, 2020 09:16 PM
अबयज़ खान
अबयज़ खान
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कोरोना आपके दरवाज़े पर खड़ा है. और आप उसकी बारात निकाल रहे हैं. जश्न ऐसे मना रहे हैं जैसे पाकिस्तान को धूल चटाकर आए हों. पीएम मोदी ने सिर्फ ये कहा था कि 5 मिनट आभार जताना है उन लोगों के लिए जो आपके लिए 24 घंटे, सातों दिन काम कर रहे हैं. मगर आपको सुनना कहां था. पीट दिया एक घंटे तक ढोल. बना दिया कोरोना से लड़ने का तमाशा. उतर गये भीड़ के साथ. दिखा दी अपनी असलियत. मिट्टी में मिला दी डॉक्टरों की सारी मेहनत. अभी आपके घर मुसीबत पहुंची नहीं है और आप मज़े ले रहे हैं. तस्वीरें देखनी हैं तो इटली की देख लीजिए. 6 करोड़ की आबादी वाला देश खून के आंसू रो रहा है. उनका पीएम हालात से निपट नहीं पाया तो देश से माफी मांग रहा है. और आप अपने प्रधानमंत्री की बात तक सुनने को तैयार नहीं हैं. पीएम को बार-बार ट्वीट के ज़रिये आपसे कहना पड़ रहा है कि लॉक डाउन को गंभीरता से लीजिए, मगर आपने तो इसे उत्सव बना डाला.

अस्पताल और डॉक्टरों को छोड़कर आप पंडित जी, मौलवी साहब, जंतर-मंतर और टोने-टोटकों के भरोसे बैठे हैं.बैठे रहिए. जितने मरीज़ नहीं, उससे ज्यादा व्हाट्सएप, फेसबुक पर इलाज बता डाले. कुएं में पानी डालते रहिए. ताबीज़ गले में लटका लीजिए. टेक आईये दरगाह पर माथा. हवन कर लीजिए. गोबर लेप लीजिए. गौमूत्र पी लीजिए. दादी-नानी के नुस्खे इस्तेमाल कर लीजिए. हल्दी, चंदन सब कर लीजिए. मगर सरकार की बात मत मानिए. क्योंकि आपने कसम खा रखी है कोरोना से मज़ाक करने की. आपसे सिर्फ इतना कहा जा रहा है कि लॉकडाउन पर अमल करिए. मगर आपको क्या फर्क पड़ता है. आपको मुसीबत में भी मटरगश्ती चाहिए.

Janata curfewमामला कोरोना वायरस बीमारी की गंभीरता से जुड़ा था, लेकिन हुड़दंग करने वालों ने मौका हाथ से नहीं जाने दिया.

अभी आप हालात से वाकिफ नहीं हैं. आपके मुल्क की आबादी एक अरब 30 करोड़ है. जबकि नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक देश में सरकारी अस्पताल सिर्फ 23582 हैं. जिसमें 7,10,761 के करीब बेड हैं. और वेंटिलेटर. वो तो सिर्फ एक लाख 12 हज़ार हैं. सोचिए अगर देश की 30 फीसदी आबादी को भी ये रोग लग गया तो कहां जाएंगे. प्राइवेट अस्पताल की फीस देने के पैसे हैं आपके पास? वहां तो टेस्ट की कीमत भी 4500 रुपये है. कितने लोग दे पाएंगे 4500 रुपये. इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च यानि आईसीएमआर का दावा है कि देश में 6 लाख टेस्ट किट हैं. सोचिए कितने लोगों के टेस्ट हो पाएंगे.

ये जो पंडित जी, मौलवी साहब आपको नुस्खे बता रहे हैं. ये सब आपको सिर्फ बरगला रहे हैं. दुनिया भर के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च सब बंद पड़े हैं. कोरोना के आगे थर-थर कांप रहे हैं. एक बात और सुन लीजिए. धर्म आपकी आत्मिक शांति के लिए होता है. आपको संस्कार देने के लिए होता है. धर्म आपको ज़िंदगी की एक दिशा देता है. आपकी बीमारी के इलाज के लिए नहीं होता है. धर्म कोई डॉक्टर नहीं है. ऐसा होता ये मौलवी साहब, पंडित जी, ज्ञानी जी अपने इलाज के लिए अस्पतालों में नहीं जाते. क्यों नहीं ये अपना इलाज खुद कर लेते. और वो जो ओझा और तंत्र-मंत्र वाला आपको झाड़फूंक बता रहा था. उसको पुलिस ने उठाकर अंदर कर दिया. क्या कर पाया वो. अगर ये लोग इतने बड़े प्रकांड पंडित होते तो अब तक मौत पर विजय पा चुके होते.

लॉकडाउन करने की नौबत क्यों आती है. मालूम है. हम लोगों की बेवकूफियों की वजह से. लॉकडाउन की खबर आई तो बाज़ारों में आपने लूट मचा दी. आपकी आपाधापी की वजह से दुकानदारों ने आपसे मुंहमागीं कीमत वसूली. अरे भई खाने-पानी के चीज़ें कहीं भाग नहीं जा रही थीं. लेकिन मेरा घर भर जाए. दूसरे की फिक्र आपको कहां थी. भर लीजिए अपना घर. 40 रुपये का माल सीधे 400 रुपये में खरीदकर खुश तो बहुत होंगे आप. बाज़ार से सारी सब्जियां, राशन खरीद कर आपने घर में भर लिया. कितने दिन चला लेंगे. जब खत्म होगा फिर क्या करेंगे. जो राशन नहीं खरीद पाए तो बैग लाद-लादकर ट्रेन और बसों में भीड़ बढ़ाने पहुंच गये. जबकि आपको पता है कि ये वायरस भीड़ में ही आता है. मगर ना. घर पहुंच जाएंगे तो आप वायरस से बच जाएंगे. बच तो आप क्या पाएंगे बल्कि आप मौत के इस वायरस को देशभर में पहुंचा देंगे. लॉकडाउन इसीलिए किया गया था. मगर आपको तो कोई अच्छी बात पसंद ही नहीं है.

याद रखिए. आज आप कोरोना की बारात निकालेंगे. कल वो आपकी बारात निकालेगा, जिसमें आपके साथ वो चार लोग भी नहीं होंगे. जो हर बार आपकी ज़िंदगी में टोका-टाकी करने आ जाते थे. बुरे वक्त में देश के साथ खड़े हो जाइये. अमेरिका, चीन, इटली, फ्रांस जैसे ताकतवर देश कोरोना से हार मान चुके हैं. हमारी हैसियत तो अभी उनके आगे कुछ भी नहीं है. ''इसलिए कुछ दिन दूर रह लीजिए. ताकि कल आप और नज़दीक आ सकें''. अभी एहतियात कर लीजिए. क्योंकि एहतियात इलाज से बेहतर है. और हां आखिरी बात. कोरोना धर्म पूछकर नहीं आया है.चीन से दुबई और इटली से तुर्की तक पहुंच गया है. इसलिए मंदिर-मस्जिदों से आगे बढ़ जाइये. क्योंकि सब बंद हो चुका है. सिवाए अस्पतालों के. घर में रहिए, महफूज़ रहिए. क्योंकि ज़िंदा रहेंगे तो मिलते रहेंगे.

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लेखक

अबयज़ खान अबयज़ खान @abyaz.khan

लेखक पत्रकार हैं

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