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सियासत

 |  4-मिनट में पढ़ें  |   07-12-2018
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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राजस्थान में वोटिंग खत्‍म हो गई है. शाम बजे तक राज्य में 75 प्रतिशत मतदान होने की खबर है. चुनाव को जहां एक तरफ वसुंधरा राजे के अलावा पीएम मोदी की साख का चुनाव माना जा रहा है तो वहीं अगर कांग्रेस ठीक ठाक प्रदर्शन कर लेती है तो ये आने वाले लोक सभा चुनाव में इस चुनाव का परिणाम कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं रहेगा. क्या जयपुर, क्या जोधपुर. जैसलमेर से लेकर चित्तौड़गढ़ तक और सवाई माधोपुर से लेकर उदयपुर तक यूं तो ये चुनाव पूरा का पूरा अहम है, मगर ऐसी बहुत सी बातें हैं जो इसे और भी रोचक बना रही हैं. आइये नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही बातों पर जो ये बताती हैं कि राजस्थान का दुर्ग जितना महत्वपूर्ण भाजपा के लिए उतना ही इसे जीतना कांग्रेस के लिए भी लाभकारी है.

राजस्थान चुनाव, भाजपा, कांग्रेस, वसुंधरा राजे, सचिन पायलट   राजस्थान के दुर्ग को जीतना कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए ही महत्वपूर्ण है

बात की शुरुआत हम राजस्थान के टोंक से करते हैं. टोंक लम्बे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है. मुसलमानों की एक अच्छी आबादी को अपने में समेटने वाले टोंक में मुकाबला सचिन पायलट और यूनुस खान के बीच है. सचिन कांग्रेस के उम्मीदवार हैं, तो यूनुस खान जो भाजपा खेमे के राज्य में एकमात्र मुस्लिम चेहरे हैं, उन्होंने भाजपा का झंडा थाम रखा है. टोंक में यूनुस खान से पहले भाजपा ने जिम्मेदारी तत्कालीन विधायक अजीत सिंह मेहता को सौंपी थी मगर रणनीति में बड़ा फेर बदल किया गया और पायलट के मुकाबले में यूनुस खान को लाया गया.

दो बार सांसद रह चुके सचिन पायलट के लिए ये चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के एक बड़े वर्ग को महसूस हो रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर सचिन पायलट सबसे उम्दा उम्मीदवार हैं. ज्ञात हो कि सचिन इससे पहले दौंसा और अजमेर लोक सभा क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर चुके है.

बात अगर 130 निर्वाचन क्षेत्रों में, मुकाबले की हो तो यहां मुख्य रूप से मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच में ही माना जा रहा है. बात अगर मौजूदा वक़्त की हो तो फिलहाल सदन में भाजपा की तरफ से 160 विधायक और कांग्रेस की तरफ से 25 विधायक जनता की नुमाइंदगी कर रहे हैं.

राजस्थान में मतदान की शुरुआत सुबह 8 बजे से हुई और दोपहर 1 बजे तक 41.53 प्रतिशत मत पड़ चुके हैं. इस बीच जहां कई स्थानों से ईवीएम मशीनों के खराब होने की ख़बरें आईं. तो वहीं कई स्थानों में मूलभूत मुद्दों के लिए स्थानीय नागरिकों ने  वोट डालने का बहिष्कार किया. भरतपुर में लोगों ने ये कहकर चुनाव का बहिष्कार किया कि यदि सड़क नहीं तो वोट नहीं. इसके अलावा कई स्थानों पर बिजली, पानी और किसानों की समस्याएं लोगों के बीच चुनाव का विरोध करने का बड़ा मुद्दा रहा.

बहरहाल, यदि चुनाव आयोग और स्थानीय पुलिस की बातों पर यकीन करें तो राज्य में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और कहीं से भी अप्रिय घटनाओं से जुड़ी ख़बरें नहीं आई हैं. चुनाव में जनता का समर्थन किया मिलता है? परिणाम क्या होगा? सरकार कौन बनाएगा ? क्या सचिन पायलट का साथ लोगों को पसंद आएगा ? क्या जनता अपना नेतृत्व एक बार फिर वसुंधरा राजे को देगी ? वो तमाम सवाल हैं जिसका जवाब वक्त हमें बताएगा.

जिस तरह राज्य में चुनाव प्रचार हुए, प्रमुख दलों द्वारा अलग-अलग रैलियों का आयोजन कर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगे. ये कहना कहीं से भी गलत नहीं है कि, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर पीएम मोदी तक दोनों ही दलों के मुखिया राजस्थान का दुर्ग जीतने के लिए गंभीर हैं. और इस बात को जानते हैं कि यदि 2019 में किला फतेह करना है तो राजस्थान और वहां की जनता को नकारना एक बड़ी भूल होगी. 

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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