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Updated: 05 अगस्त, 2022 08:19 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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राहुल गांधी (Rahul Gandhi) जिन दो चीजों के विरोध में सड़क (Congress Protest) पर उतरे हैं वे बड़े ही ज्वलंत मुद्दे हैं - महंगाई (Inflation) और बेरोजगारी. पूरा देश महंगाई से बुरी तरह जूझ रहा है. बेरोजगारी भी वैसी ही चुनौती बनी हुई है - और सबसे बड़ी बात ये है कि संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्वीकार किया था कि कीमतें बढ़ रही हैं.

राज्य सभा में निर्मला सीतारमण ने महंगाई पर बहस के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा था, कोई भी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की बात से इनकार नहीं कर रहा है. वित्त मंत्री बोलीं, 'हम भाग नहीं रहे हैं... केंद्र सरकार और RBI दोनों इसे कम करने की कोशिश में लगे हुए हैं.'

फिर तो कोई दो राय नहीं कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के खिलाफ ऐसा मुद्दा उठाया है जिस पर वो बड़े आराम से घेर सकते हैं. ये ठीक है कि सरकार ये सुनने को राजी नहीं है कि महंगाई बेकाबू हो चुकी है, लेकिन ये मान लेना भी कम तो नहीं है कि मंहगाई पर काबू पाने की सरकार की तरफ से कोशिशें चल रही हैं, फिर भी मंहगाई बरकरार है.

बड़ा सवाल अब ये है कि क्या राहुल गांधी को भी महंगाई जैसे मुद्दे की अहमियत वास्तव में समझ में आ रही है? आखिर वो महंगाई से ज्यादा दूसरी चीजों पर जोर क्यों दे रहे हैं?

क्या वाकई ये 'महंगाई पर हल्ला बोल' है?

केंद्र की सत्ता पर जो भी पार्टी काबिज हो, संसद का कोई भी सत्र विपक्ष के लिए बेहतरीन मौका होता है. सत्ता पक्ष और विपक्ष वास्तव में क्या कर रहा होता है देश लाइव टीवी पर सब देखता भी है - कांग्रेस ने महंगाई का मुद्दा उठाने के लिए मॉनसून सत्र का सही मौका चुना है.

संसद से सड़क तक कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ब्लैक फ्राइडे थीम पर फोकस नजर आया है. राहुल गांधी और सोनिया गांधी सहित कांग्रेस नेता काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन करते देखा गया है. प्रियंका गांधी वाड्रा, अधीर रंजन चौधरी और केसी वेणुगोपाल तो बस ब्लैक कपड़े ही पहने थे - राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे तो काली पगड़ी में अलग ही नजर आ रहे थे.

विरोध प्रदर्शन के एक्शन प्लान के तहत शुरुआत भी हुई. कांग्रेस नेताओं के साथ राहुल गांधी ने राष्ट्रपति भवन के लिए मार्च भी शुरू करना चाहा, लेकिन विजय चौक पर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया. धारा 144 पहले ही लागू कर दी गयी थी - और हिरासत में लेने के बाद कांग्रेस नेताओं को ले जाने के लिए बसें भी मंगा ली गयी थीं.

rahul gandhi, sonia gandhi protestराहुल गांधी और सोनिया गांधी ने ब्लैक फ्राइडे जरूर मनाया लेकिन महंगाई से ज्यादा जोर दूसरे मुद्दों पर रहा

नई दिल्ली इलाके के डीसीपी ने 2 अगस्त और 4 अगस्त को कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को पत्र लिख कर बता दिया था कि जंतर मंतर को छोड़ कर पूरे इलाके में धारा 144 लागू है. मतलब, विरोध प्रदर्शन पुलिस करने नहीं देने वाली. पत्र के जरिये ये भी चेतावनी दे दी गयी थी कि अगर धारा 144 का उल्लंघन हुआ, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मतलब, साफ था कांग्रेस नेता न तो राष्ट्रपति भवन तक मार्च कर सकते थे, न ही प्रधानमंत्री आवास का घेराव करना संभव था. फिर भी एक बड़ा मौका तो था ही कि लोगों को बताया जा सके कि कांग्रेस महंगाई जैसे मुद्दे का विरोध कर रही है - और सरकारी तंत्र कुचलने की कोशिश कर रहा है.

कांग्रेस ने अपने नये अभियान का नाम दिया है, 'महंगाई पर हल्ला बोल' - लेकिन क्या वाकई ये अभियान नाम के मुताबिक लग भी रहा है? कांग्रेस का ये हल्ला बोल अभियान ऐसे दौर में शुरू किया गया है जब प्रवर्तन निदेशालय के अफसर पूरे एक्शन में हैं. क्या दिल्ली, क्या कोलकाता और क्या मुंबई? हर जगह ईडी के अधिकारी ताबड़तोड़ गिरफ्तारी और पूछताछ कर रहे हैं.

राहुल गांधी और सोनिया गांधी से पूछताछ हो चुकी है. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से यंग इंडिया के दफ्तर में भी घंटों पूछताछ हुई है. मल्लिकार्जुन खड़गे को पहले ईडी के दफ्तर बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है. ऐसे में कांग्रेस का भी आक्रामक होना स्वाभाविक है.

कांग्रेस के हल्ला बोल मुहिम में ये समझना मुश्किल हो रहा है कि ये सब वास्तव में महंगाई के खिलाफ ही हो रहा है या फिर गांधी परिवार के खिलाफ ईडी के एक्शन के खिलाफ?

ऐसा संदेह होने की खास वजह भी है - और देखने में ये आ रहा है कि ये भ्रम बीजेपी से ज्यादा राहुल गांधीं खुद पैदा कर दे रहे हैं. बीजेपी तो वही बोलेगी जो उसके फायदे की बात होगी. या ऐसी बातें जिनसे कांग्रेस के किसी भी कदम को गलत साबित किया जा सके. बीजेपी नेता कह रहे हैं, मंहगाई और बेरोजगारी तो एक बहाना है... सही कारण तो ईडी को धमकाना, डराना और एक परिवार को बचाना है.

कांग्रेस के व्यापक विरोध प्रदर्शन से पहले ही राहुल गांधी ने बोल दिया था - अब सत्याग्रह नहीं, रण होगा.

ये तो सबको पता है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी की ईडी दफ्तर में पेशी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नाम सत्याग्रह दिया था. जाहिर है, सत्याग्रह की जगह अगर राहुल गांधी रण की बात करेंगे तो हर कोई उसे गांधी परिवार के खिलाफ ईडी की कार्रवाई के विरोध का एक्सटेंशन ही समझेगा.

राहुल गांधी कहते हैं, मैं महंगाई पर बोलता हूं... मैं बेरोजगारी पर बोलता हूं... मैं सच बोलता हूं, इसलिए मेरे पीछे एजेंसियां लगा दी गईं.'

ऐसी बातें राहुल गांधी आगे पीछे भी तो कर सकते थे - आखिर महंगाई के साथ एजेंसियों को पीछे लगाये जाने की बात याद दिलाने की क्या जरूरत थी?

हो सकता है राहुल गांधी मुद्दे के प्रति अपनी गंभीरता दिखाने के लिए ऐसा बोल रहे हों, लेकिन उनके मन की बात समझने की फुरसत किसके पास है? उनके मन में क्या चल रहा है या महंगाई के विरोध को लेकर उनकी मंशा क्या है, ये सब तो उनकी बातों, उनके एक्शन और मौजूदा परिस्थितियों से जोड़ कर ही समझने की कोशिश होगी.

राहुल गांधी के ये कहने में भी कोई बुराई नहीं लगती, मैं सच बोलता हूं, इसलिए ये लोग मुझपर आक्रमण करते हैं... मैं जितना सच बोलूंगा, उतने आक्रमण ज्यादा होंगे... लेकिन मैं इनसे नहीं डरता... जितना मेरे ऊपर आक्रमण होता है, उतना मैं सीखता हूं... मुझे अच्छा लगता है.'

बहुत अच्छी बात है, लेकिन ये सुन कर ऐसा तो नहीं लगता कि राहुल गांधी महंगाई की बात कर रहे हैं. ये सब सुन कर तो ऐसा लगता है जैसे राहुल गांधी अपनी पर्सनालिटी के बारे में बता रहे हैं. महंगाई से क्या नुकसान हो रहा है, लोग किस कदर परेशान हैं - राहुल गांधी की बातें सुन कर ऐसा तो लगता ही नहीं. बस यही समझ आ रहा है कि राहुल गांधी सच बोलते हैं और उनको परेशान किया जा रहा है. फिर तो मोटे तौर पर किसी की भी समझाइश यही होगी कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. ऐसा होने से राहुल गांधी अपनी मुश्किलों से तो उबर सकते हैं, लेकिन महंगाई की समस्या तो यूं ही बनी रहेगी. है कि नहीं?

जब लोगों का शक गहरा होने लगता है, राहुल गांधी की अगली ही दलील उसे पक्का कर देती है. राहुल गांधी हमेशा ही समझाते रहे हैं कि वो एक खास विचारधारा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं. संघ और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ. राहुल गांधी के पास हथियार है कांग्रेस की विचारधारा. एक विचारधारी की दूसरे विचारधारा के खिलाफ लड़ाई. ये भी ठीक है. ये तो शाश्वत है. चलती रहेगी.

और उसी बीच राहुल गांधी अपने परिवार की कुर्बानियां याद दिलाने लगते हैं. कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी कहते हैं, 'मेरे परिवार ने अपने प्राणों की आहुति दी... ये हमारी जिम्मेदारी है क्योंकि हम इस विचारधारा के लिए लड़ते हैं... जब हिंदू-मुसलमान एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं... जब दलित मारे जाते हैं... जब एक महिला की पिटाई होती है तो हमें दुख होता है, तो हम लड़ते हैं.'

भले ही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी कहते हों, 'ये कांग्रेस एक नकली विचारधारा है', लेकिन राहुल गांधी का ये कहना गलत नहीं लगता कि 'ये सिर्फ एक परिवार नहीं है, ये एक विचारधारा है.'

बीजेपी का राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन आम जनता को न तो परिवार से दिक्कत होती, न ही विचारधारा से - बशर्ते, जनता से जुड़े मुद्दे पर कोई वास्तव में लड़ता हुआ नजर आये. अगर ये भरोसा नहीं होगा कि राहुल गांधी वास्तव में महंगाई को लेकर ही सरकार के खिलाफ मोर्चे पर उतरे हैं, फिर तो सारी कवायद बेकार है.

महंगाई का मुद्दा ईडी एक्शन से बड़ा है

राहुल गांधी कहते हैं, आज सबसे ज्यादा बेरोजगारी भारत में है... पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन वित्त मंत्री को दिख नहीं रहा है... किसी भी गांव, शहर में चले जाइये, लोग बता देंगे कि महंगाई है - लेकिन सरकार को नजर नहीं आती.

ऐसा लगता है जैसे राहुल गांधी किसी को ये कहने का मौका नहीं देना चाहते कि कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में वो महंगाई का जिक्र करना ही भूल गये. लेकिन एक छोटे से जिक्र के बाद वो फौरन ही आगे बढ़ जाते हैं.

2019 के आम चुनाव से पहले कांग्रेस ने महंगाई के खिलाफ जयपुर में रैली आयोजित की थी. बड़े दिनों बाद सोनिया गांधी भी पहुंची थीं. सोनिया गांधी मंच पर बैठी रहीं, लेकिन भाषण नहीं दिया. पहले से ही तय कर रखा था, लिहाजा बच्चों और बाकी नेताओं को बोलने का पूरा मौका दिया. बोलने को अशोक गहलोत से लेकर सचिन पायलट और प्रियंका गांधी वाड्रा तक सभी बोले. महंगाई की बातें की, लेकिन राहुल गांधी तो कुछ और ही सोच कर आये थे.

माइक पकड़ते ही राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि महंगाई पर तो वो बोलेंगे ही, लेकिन पहले एक जरूरी मुद्दे की बात करेंगे. जैसे ही राहुल गांधी का भाषण शुरू हुआ महंगाई का मुद्दा काफी पीछे छूट गया.

राहुल गांधी का फोकस शुरू से ही महंगाई की जगह हिंदुत्व पर रहा. राहुल गांधी ने हिंदू, हिंदुत्व और हिंदूवादी की संदर्भ सहित व्याख्या की. हिंदुत्व के साये में महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे तक की मिसालें दी - और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी पर जी भर कर हमला बोला. बीजेपी से आशय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीनियर बीजेपी नेता अमित शाह से रहा.

बिलकुल वैसे ही 5 अगस्त जैसी महत्वपूर्ण तारीख पर भी राहुल गांधी ने मंहगाई के मुद्दे की धार कुंद कर दी, ये समझा कर कि कैसे उनके पीछे, उनके परिवार के पीछे और कांग्रेस नेताओं के पीछे मोदी-शाह ने एजेंसियों को लगा रखा है.

महंगाई के साथ एजेंसियों का मुद्दा जोड़ते ही लोगों को लगता है कि ये भी गांधी परिवार को बचाने की ही लड़ाई लड़ी जा रही है. बस तरीका बदला है. हाथों में नया प्लेकार्ड है. स्लोगन बदला है. कपड़ों का रंग बस काला कर लिया गया है.

क्या कांग्रेस ने भी 5 अगस्त की तारीख सोच समझ कर किसी रणनीति के तहत चुनी थी? ताकि बीजेपी राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की सालगिरह न मना सके. ताकि बीजेपी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म किये जाने की तीसरी बरसी पर लोगों से मुखातिब न हो सके.

महंगाई बहुत बड़ा मुद्दा है. कांग्रेस नेताओं के साथ साथ अगर राहुल गांधी भी महंगाई पर फोकस रहते और अशोक गलतोत जैसे अपने करीबियों को ईडी के जिक्र से परहेज करने को पहले ही बोल दिये होते तो फायदे में रहते - क्योंकि महंगाई के साथ ईडी एक्शन का विरोध लोगों को कन्फ्यूज कर रहा है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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