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Updated: 15 अप्रिल, 2019 08:22 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आए दिन पीएम मोदी पर निशाना साधने के लिए राफेल डील का जिक्र करते रहते हैं और 'चौकीदार चोर है' कहते दिखते हैं. लेकिन राफेल सिर्फ राहुल गांधी या मोदी सरकार के लिए चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के एक गांव में भी राफेल एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया है. राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की लड़ाई में इस गांव की इज्जत पर बन आई है. हालांकि, इसकी वजह राजनीतिक तो नहीं है, लेकिन जिस मुद्दे पर इन दिनों खूब राजनीति हो रही है, उससे इस गांव के नाम का संबंध जरूर दिखता है.

दरअसल, इस गांव का नाम भी राफेल हैं. हालांकि, इसकी स्पेलिंग अलग है. गांव का नाम Rafel है जबकि जिसकी बात राहुल गांधी करते हैं वह Rafale फाइटर जेट की डील है. ये गांव छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र में है, जहां पर 18 अप्रैल को वोटिंग होनी है. यहां के लोग परेशान इसलिए हैं क्योंकि उनके गांव का नाम राफेल डील से जोड़ा जाता है, जिसकी वजह से पूरे गांव के लोग परेशान हैं और गांव का नाम बदलवाना चाहते हैं.

राफेल, चुनाव, छत्तीसगढ़, लोकसभा चुनाव 2019छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन क्षेत्र में राफेल (Rafel) नाम का एक गांव है, जो इस चुनावी माहौल में सुर्खियां बन गया है.

शीला-मुन्नी जैसा हाल हो गया 'राफेल' गांव वालों का

जैसा इन दिनों छत्तीसगढ़ के राफेल गांव के लोग महसूस कर रहे हैं, वैसा ही कुछ साल पहले बहुत सी लड़कियां महसूस करती थीं. ये वो लड़कियां थीं जिनके नाम बॉलीवुड आइटम सॉन्ग में गाए गए. जैसे चिकनी चमेली गाने ने चमेली नाम की लड़कियों को परेशान किया, मुन्नी बदनाम हुई गाना आने के बाद मुन्नी नाम की लड़कियों को लोग चिढ़ाने लगे, शीला की जवानी गाने के बाद भी शीला नाम की लड़कियां परेशान हो गईं और तो और जलेबी बाई गाने से भी बहुत सी लड़कियों को दिक्कत हुई. यानी गाना तो मुंबई में कहीं बैठकर किसी ने लिखा, लेकिन जब वो चर्चा में आया तो कई लड़कियों की नाक में दम कर गया. लोगों ने उन नामों से लड़कियों को चिढ़ाया भी और छेड़छाड़ तक की. अब छत्त्सीसगढ़ के राफेल में रहने वालों को भी आसपास वाले चिढ़ा रहे हैं.

आस-पास के गांव वाले चुटकी लेते हैं !

करीब 200 परिवारों वाले इस गांव के एक 83 साल के बुजुर्ग धर्म सिंह ने पीटीआई को अपने दिल की बात बताई. उन्होंने कहा- 'दूसरे गांव वाले हमारा मजाक उड़ाते हैं. कहते हैं कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो हमारी जांच होगी. यहां तक कि हम अपने गांव का नाम बदलवाने के लिए मुख्यमंत्री के दफ्तर भी गए थे लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. राफेल डील विवाद की वजह से गांव के नाम को निगेटिव तरीके से देखा जा रहा है.' आस-पास के गांव वाले इस गांव को लेकर चुकटुके भी बनाते हैं. गांव के लोगों में कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं. इन्हीं में से एक अफवाह ये है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आ गई तो इस गांव के लोगों को जेल में डाल देगी.

कैसे पड़ा ये नाम?

इस बारे में धर्म सिंह कहते हैं कि उन्हें कोई अंदाजा नहीं है कि आखिर इस गांव का नाम राफेल कैसे पड़ा. उनके अनुसार गांव का ये नाम बहुत पहले से है, यहां तक कि 2000 में छत्त्सीगढ़ बनने से भी पहले से गांव का यही नाम है. खैर, गांव के लोग अब चाहते हैं कि बस इसका नाम बदला जाए, भले ही भाजपा जीते या कांग्रेस.

अब नाम भी बदलेगा और राजनीति भी होगी

अभी तक तो किसी गांव, शहर या राज्य का नाम बदलते हुए आपने खूब देखा होगा, लेकिन उनके पीछे कोई न कोई राजनीतिक वजह जरूर होती थी. कुछ नहीं तो हिंदुत्व विचारधारा दिखाने के लिए ही मुगल शासकों के नाम पर पड़े किसी शहर का नाम बदल दिया गया, जैसे इलाहाबाद हो गया प्रयागराज. जहां एक ओर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ न जाने कितने ही शहरों का नाम बदल चुके हैं, तो गांव वालों की गुजारिश पर भाजपा या कांग्रेस जो भी जीतेगी, एक गांव का नाम तो बदल ही देंगे.

इस गांव की हालत भी काफी खराब है और गांव वाले कहते हैं कि अगर पीएम या कांग्रेस अध्यक्ष कभी इस गांव में भी आ जाते तो शायद हालात कुछ सुधर जाते. तो गांव वालों ने तो न्योता दे दिया है, अब बस भाजपा या कांग्रेस के इस गांव में पहुंचने की देर है. भले ही अभी तक इस गांव के नाम पर राजनीति ना हो रही हो, लेकिन जो पार्टी इस गांव का नाम बदलेगी, वो तो गांव वालों की नजरों में अच्छी बन ही जाएगी. यानी वोटबैंक तैयार और राजनीति की शुरुआत. हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर भाजपा या कांग्रेस ये घोषणा कर दे कि गांव वालों ने उन्हें जिताया तो वह सत्ता में आते ही गांव का नाम बदल देंगे.

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