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Updated: 03 जून, 2020 05:27 PM
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अमेरिका (America) धू धू करके जल रहा है और इसकी वजह है अमेरीकी पुलिस की दरिंदगी का शिकार होकर अपनी जान से हाथ धोने वाले अफ़्रीक़ी मूल के अमेरीकी नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड (George Floyd Death) की हत्या. इस हत्या के बाद से ही अमेरिका में लोग सड़कों पर आ गए. लेकिन जार्ज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद से अमरीका में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों (Protest) में मानो भूचाल आ गया है. इन प्रदर्शनों में कई लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग घायल हो चुके हैं. अबतक लगभग पांच हज़ार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है और दिन-ब-दिन हालात और खराब होते जा रहे हैं. अमेरीकी समाज में नस्लभेद (Racism) एक बहुत ही पुरानी बीमारी है. यह प्रर्दशन नया नहीं है. अमेरीका में नस्लभेद के खिलाफ पहले भी कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं. लेकिन इस बार के प्रदर्शन अलग हैं क्योंकि अश्वेत अमेरिकियों के साथ-साथ श्वेत अमेरिकी भी सड़कों पर उतर आए हैं और ट्रंप सरकार को जबरदस्त तरीके से घेरने का कार्य किया जा रहा है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति इन दंगों को शांत करवाने के बजाए अपनी उलूल जुलूल ट्विट और बयानबाजी के चलते और भड़का रहे हैं. जिसकी वजह से ये विराध प्रर्दशन और हिंसक होता जा रहा है.

America, George Floyd, Donald Trump, Violence, Tweetजॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट केवल स्थिति बिगाड़ रहे हैं

दो दिन पहले अमेरिका की राजधानी में हुआ विरोध प्रदर्शन इतना खतरनाक था कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को व्हाइट हाउस के तहखाने में बने बंकर में छुपा दिया गया. देश की राजधानी में हुए इस बवाल से साफ हो गया कि अमेरिका में हालात बेहद खराब हो गए हैं. जार्ज फ़्लॉयड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हो गया कि उनकी मौत ऑक्सीजन की कमी और दम घुटने से हुई है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद मिनियापोलिस के सरकारी डॉक्टर ने जॉर्ज की मौत को हत्या क़रार दे दिया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी देखा जा सकता है कि तीन पुलिस अधिकारियों ने जार्ज को सड़क पर गिराकर कितनी बुरी तरह से उन्हें घुटने से दबाए रखा था, जिसकी वजह से ज़िंदगी की भीख मांगते मांगते जार्ज की जान चली गयी. जार्ज की दर्दनाक मौत के बाद पूरे अमेरीका में पिछले एक हफ़्ते से हिंसक झड़पें और विरोध प्रदर्शन जारी हैं.

हालात इतने बिगड़ गए कि राजधानी वाशिंगटन और न्यूयॉर्क समेत 75 शहरों में कर्फ़्यू लगा दिया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को और भड़काने का कार्य कर रहे थे. शांतिपूर्ण विरोध करने वालों पर फ़ायरिंग करने और कुत्ते छोड़ने जैसी बेतुकी बातों से डोनाल्ड ट्रंप ने विरोध के स्वर को और बढ़ावा दे दिया.

इसी क्रम में ट्रम्प ने राज्यों के गवर्नरों को धमकी देते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों से सख़्ती से निपटा जाए, वरना वे सेना को तैनात कर देंगे. जिसके बाद से ही विरोध और बढ़ता जा रहा है. इसी वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए डोनाल्ड ट्रंप की ये रणनीति भी मानी जा रही है वह किसी तरह अशांति की लहरों पर सवार होकर आगामी राष्ट्रपति चुनाव का प्रचार कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस के पास एक चर्च के सामने अपने हाथों में बाइबिल को लेकर दावा किया कि वह अमेरिका में अशांति नहीं पैदा होने देंगे जिसके बाद प्रर्दशनकारियों ने उस चर्च को भी नुकसान पहुंचाया था यहां तक कि चर्च के पादरी ने भी डोनाल़्ड ट्रंप की निंदा करते हुए कहा कि वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं.

पूरी दुनिया में सबसे अधिक कोरोना वायरस की चपेट में आने वाला अमेरिका इस तरह आग से जल रहा है जैसे कोरोना वायरस का वहां से खात्मा हो गया हो. अमेरिका में स्थिति कब सुधरेगी और इसमें ट्रंप का कितनी भूमिका होगी यह वक्त बताएगा लेकिन अमेरिका को आग के झोके में झोकनें वाले खुद राष्ट्रपति ट्रंप ही हैं जिन पर अमेरिका की जनता आगबबूला हो बैठी है. अब यह सिर्फ ट्रंप पर ही निर्भर करेगा कि वह इस हिंसा को और बढ़ने देना चाहते हैं या फिर नरम होकर अमेरिकी जनता को अपने विश्वास में लेने में सफल हो पाते हैं.

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George Floyd, America, Donald Trump

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