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Updated: 07 नवम्बर, 2020 10:24 PM
मशाहिद अब्बास
मशाहिद अब्बास
 
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अमेरिका (America) में राष्ट्रपति पद (US Presidential Elections) के लिए चुनाव हो चुका है और नतीजा भी लगभग आ ही चुका है. वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) हार का सामना करते हुए नज़र आ रहे हैं हालांकि वह सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच चुके हैं जहां उन्हें बहुत हद तक राहत नहीं मिलने वाली है यानी अब ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने की उम्मीदें लगभग न के बराबर ही है. अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति को पटखनी दी है जो बाइडन (Joe Biden) ने, जिनकी प्रचार टीम ने पूरा माहौल बाइडन के पक्ष में खड़ा कर दिया था. जो बाइडन शानदार जीत दर्ज करते हुए दिखाई दे रहे हैं. जो बाइडन की जीत में किसकी भूमिका सबसे अधिक रही इस पर कई नामों पर चर्चा की जा सकती है. सबसे पहली चर्चा खुद जो बाइडन की होगी जिन्होंने शांति के साथ चुनाव प्रचार किया और कहीं भी क्रोधित होते हुए नज़र नहीं आए. हालांकि उनके सामने ट्रंप हर मौके पर एक बड़ा बयान देते हुए नज़र आ रहे थे. ट्रंप ने बाइडन को चीन का समर्थक बताया और बाइडन के बेटे तक को भी चुनाव में घसीटा लेकिन जवाब में बाइडन कूल ही नज़र आए जिनका फायदा उनको वोट के रूप में मिला.

US Presidential Election, Donald Trump, Joe Biden, Kamala Harris, Republican, Democratट्रंप अगर चुनाव हारे हैं तो उसकी एक बड़ी वजह वो खुद हैं

बाइडन के जीत में उनके प्रचार टीम के साथ साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का भी योगदान है जिन्होंने खुल कर बाइडन के लिए वोट मांगे. बाइडन के जीत के तमाम पहलू पर बातें की जा सकती है लेकिन हम बात करते हैं हालिया राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हार की. ट्रंप के हार के कई कारण हैं उनका बड़बोलापन उनके चुनाव प्रचार में हावी रहा. चुनाव से ऐन वक्त पहले उनका कोरोना संक्रमित हो जाना भी एक गलत संदेश के रूप में लोगों तक पहुंचा. आइये जानते हैं ऐसे कौन से मुद्दे थे जो ट्रंप के हार का कारण बनें.

कोरोना महामारी

कोरोना वायरस जैसी महामारी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का मुद्दा बन जाएगी इसका किसी ने अंदाज़ा भी न लगाया रहा होगा, लेकिन अमेरिका में कोरोना वायरस ने पूरी तरह से राष्ट्रपति पद के चुनाव में अपनी दखल को बनाए रखा. अमेरिकी नागरिकों के बीच इस बात की चर्चा थी कि कोरोनावायरस को डोनाल्ड ट्रंप ने किस तरह हैंडल किया है.

डोनाल्ड ट्रंप ने महामारी पर पहले तो चीन को घेरा और फिर लाखों लोगों के मरने की भविष्यवाणी भी कर दी थी. उसके बाद ट्रंप कई राज्यों के गवर्नरों से लाकडाउन को लेकर भिड़ पड़े थे जिससे अमेरिकी नागरिकों ने कोरोना के खतरे के प्रति ट्रंप को लापरवाह मान लिया था.

हालांकि ट्रंप ने राहत पैकेज की घोषणा करके ये दिखाने की कोशिश ज़रूर की थी कि वह महामारी से निपटने के लिए गंभीर हैं, ट्रंप अपने चुनाव प्रचार में कोरोना वैक्सीन को लेकर तो खूब बोले लेकिन राहत पैकेज पर ज़्यादा चर्चा नहीं की इससे भी लोगों ने उन्हें लापरवाह मानते हुए उन पर कम ही भरोसा दिखाया.

हिंसा एवं नस्लीय भेदभाव

अमेरिका में नस्लीय भेदभाव हर चुनाव में ही प्रमुख मुद्दों में से एक होता है. अभी 5 महीने पहले ही अमेरिका में पुलिस द्वारा एक अश्वेत नागिरक की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद अमेरिका के अधिकतर राज्यों में हालात बद से बदतर हो गए थे.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ज़िम्मेदारी थी कि वह जल्द ही इस हिंसा पर काबू पा लें लेकिन वह तो हिंसा को और भड़काने का कार्य कर रहे थे जिसके बाद उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्हाइट हाउस के सुरक्षाकर्मियों ने उनको बंकर में छिपा दिया था और पुलिस चीफ राष्ट्रपति के बयानों से खुद को अलग करते हुए दिखाई दिए थे.

यही वजह रही कि अश्वेत वोट पूरी तरह से बाइडन के खाते में जा गिरे और ट्रंप को हराने में उऩका योगदान अधिक रहा है.

अर्थव्यवस्था

अमेरिका में हर राष्ट्रपति चुनाव में अर्थव्यवस्था भी एक प्रमुख मुद्दा होता है. डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था में थोड़ी बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन कोरोना काल में अमेरिका की अर्थव्यवस्था को गहरी चोंट पहुंची है जिसकी वजह से देश को अघोषित मंदी का भी सामना करना पड़ा है काफी भारी तादाद में लोगों का रोजगार छिना है और बेरोजगारी बढ़ी है.

अमेरिका के नागरिक बेरोजगारी को सीधे तौर पर ट्रंप से ही जोड़ रहे हैं. जिसका खामियाजा भी ट्रंप को भुगतना पड़ा है. हालांकि ट्रंप ने हर चुनावी रैली में दावा किया कि अगला वर्ष यानी 2021 देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा और शानदार साल साबित होगा लेकिन लोगों ने उनके इस दावे को भी फेल कर दिया.

कुछ समाचार एजेंसियों का दावा भी है कि युवाओं को बाइडन ने ही आकर्षित किया है ट्रंप को युवा वर्ग ने पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया है.

अपराध एवं सुरक्षा

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका में जितने भी हिंसा या अपराध हुए हैं ट्रंप ने उससे फौरन अपना पल्ला झाड़ा है. उन्होंने फौरन विपक्षी पार्टीयों की साजिश बताते हुए इसे घरेलू आतंकवाद तक का नाम दे डाला है.

ये मुद्दा डोनाल्ड ट्रंप के ही खिलाफ चला गया और बाइडन ने इसे चुनाव प्रचार के दौरान खूब लुभाया भी जिसका पूरा फायदा बाइडन को हासिल हुआ. डोनाल्ड ट्रंप की प्रचार टीम ही न तो अपराधों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप को सही से डिफेन्ड कर पायी न ही खुद डोनाल्ड ट्रंप चुनाव की डीबेट में इससे बच पाए.

भारतीय वोटर्स

अमेरिका में भारतीय मूल के वोटर्स और ऐशियाई देशों के वोटर्स निर्णायक भूमिका के वोटर्स माने जाते हैं. डोनाल्ड ट्रंप को ये बात खूब भलि-भांति मालूम थी जब ही तो ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री को व्हाइट हाउस में न मिलकर हाउडी मोदी जैसे कार्यक्रम कराकर प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका में भरपूर सम्मान दिया था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीय मूल के वोटर्स को संबोधित करते हुए कहा था कि अबकी बार ट्रंप सरकार.

यानी आपको फिर से ट्रंप को ही जिताना है. ट्रंप ने चुनावी साल में भारत का दौरा भी इसीलिए किया ताकि वह चुनाव में इसका लाभ उठा सकें लेकिन भारतीय वोटर्स पूरी तरह से बाइडन के पक्ष में ही नज़र आए, न सिर्फ भारतीय वोटर्स साथ ही ऐशियाई देश के लोगों ने भी बाइडन के पक्ष में ही मतदान किया.

इन मतदाताओं के बाइडन के पक्ष में वोट डालने की भी सबसे बड़ी वजह रही है एच-वन-बी वीज़ा. ट्रंप ने कई बार इस वीज़ा के खिलाफ फैसला लेने का बयान दिया है जिसका सबसे ज़्यादा नुकसान भी भारतीय मूल के नागरिकों को ही होना है.

ऐसे तमाम भारतीय इसी वीज़ा पर अमेरिका में जाते हैं और वहीं बस जाते हैं और अभी बड़ी संख्या में लोग इसी वीज़ा पर वहां रह रहे हैं. बाइडन इस वीज़ा के पक्ष में दिखाई देते हैं जिससे प्रभावित होकर भारतीय मूल समेत ऐशियाई देशों के अमेरिकी नागरीकों ने बाइडन के पक्ष में मतदान किया.

इसके अलावा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल़्ड ट्रंप के हार के कई कारण हैं. अमेरिका के नागरिकों ने ट्रंप को पूरी तरह से तो पटखनी नहीं दी है क्योंकि वह कई राज्यों में चुनाव जीते भी हैं और कड़ी टक्कर भी दी है. लेकिन आखिर में वह जीत का स्वाद नहीं चख पाए हैं. बाइडन अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में 20 जनवरी को शपथ लेते हुए नज़र आएंगें हालांकि तबतक डोनाल्ड ट्रंप कानूनी लड़ाई लड़ते हुए नज़र आएंगें.

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लेखक

मशाहिद अब्बास मशाहिद अब्बास

लेखक पत्रकार हैं, और सामयिक विषयों पर टिप्पणी करते हैं.

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