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Updated: 04 अगस्त, 2022 03:47 PM
निधिकान्त पाण्डेय
निधिकान्त पाण्डेय
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इस लेख का मुद्दा क्या है, वो बताने के लिए अपने लड़खड़ाते कदमों और कांपते हाथों को मैं सहारा दे रहा हूं अब्दुल हमीद अदम के शेर से.

शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए

ये मुस्कुराती हुई चीज़ मुस्कुरा के पिला

मेरे शब्द बिखरे हुए लगें तो उन्हें नजर-अंदाज करें लेकिन शेर में शराब का जिक्र आने से इतना तो आप समझ गए हैं कि मामला इसी ‘आब’ से जुड़ा है. इस शेर का थोड़ा अर्थ बताने की गुस्ताखी करता चलूं – ए! शराब पिलाने वाले मेरे महबूब, मेरे साकी! जबीं यानी माथे पर शिकन न डाल, मुझसे रूठ मत, नाराज न हो! क्योंकि अगर शराब भी गुस्से में पिलाई, माथे पर बल डाल के पिलाई तो फिर शराब का क्या मजा? इसीलिए ए साकी ! मदिरापान के नियमों को ध्यान में रख और इस मुस्कुराने वाली चीज को मुस्कुरा के पिला.

Liquor, Delhi, Arvind Kejriwal, Excise policy, Manish Sisodia, Deputy Chief Minister, Haryana, Alcoholics, Revenueदिल्ली सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी के मकसद से सूबे में शराब की नई नीति लागू कीगयी थी

शिकन न डाल जबीं पर शराब देते हुए

ये मुस्कुराती हुई चीज मुस्कुरा के पिला

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें मुद्दा क्या है? मैंने ‘आब’ की बात की ना? मुद्दा दरअसल ये है कि राजधानी दिल्ली में, आबकारी नीति के झोल में फंस गया है- मदिरा पीने-पिलाने वाला. दिल्ली में जो शराब के वेंडर्स हैं यानी शराब उपलब्ध करवाने वाले, पिलाने वाले साकी उनके जबीं यानी माथे पर शिकन पड़ गए हैं और वो अपने लिकर-लवर्स को मुस्कुरा कर लिकर नहीं दे पा रहे हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब की बिक्री बढ़ाने और दिल्ली सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी के मकसद से शराब की नई नीति लागू की थी. ये नीति 17 नवंबर 2021 से लागू की गई थी. केजरीवाल सरकार ने शराब पीने की उम्र 25 से घटाकर 21 साल कर दी. इसके साथ ही दिल्ली में ड्राइ डे भी घट गए. मकसद तो अच्छा था कि शराब माफिया को खत्म किया जाए और शराब का समान वितरण किया जाए.

दिल्ली सरकार ऐसी पहली थी जिसने शराब व्यवसाय से खुद को अलग कर लिया. पब्लिक प्लेस में स्टोर के आगे कोई शराब पीएगा तो पुलिस नहीं बल्कि स्टोर वाला जिम्मेदार होगा. लोगों को स्टैंडर्ड की शराब पीने को मिलेगी. तब से कई वेंडर्स-दुकानदारों ने हंसकर शराब पिलाई और बांटी.. ऐसी बांटी कि फ्री में भी पिलाई.. BOGO ऑफर ने बड़ी धूम मचाई यानी Buy One Get One. एक पे एक फ्री के साथ लोगों की भी बड़ी ऐश थी. खूब दावतों और पार्टियों के दौर चले.

मतलब एक समय तो ऐसा था कि दुकानदार और खरीदार दोनों की चांदी थी लेकिन फिर अचानक खुमारी दूर होने लगी.. शराब की या बिजनेस की.. ये तो पता नहीं.. लेकिन 6 महीने में ही 200 दुकानदार घट गए यानी मई 2022 में दिल्ली में 849 दुकानों में से केवल 649 दुकानें ही शराब विक्रेताओं की रह गईं. जून 2022 में ये संख्या और कम हो गई और शराब बेचने वाले केवल 468 दुकानदार बचे.

कारण बताया गया कि आर्थिक नुकसान हो रहा है. दूसरी ओर बीजेपी भी आम आदमी पार्टी पर हमलावर थी. दुकानों की बढ़ती संख्या का उसने विरोध भी किया. मंदिरों-धार्मिक स्थलों और स्कूलों के पास शराब की दुकानें खोलने का आरोप लगा. खबरों के मुताबिक, ये भी वजह थी दुकानें बंद होने की. दिल्ली सरकार के लिए शराब की दुकानों की घटती संख्या एक खतरे की घंटी थी. उसके राजस्व में बढ़ोतरी तो हो रही थी लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद की गई थी.

हाल ही में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी इस बारे में बयान दिया. सिसोदिया ने नई एक्सा इज पॉलिसी का बचाव किया और बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी दिल्लीव में शराब की किल्लात पैदा करना चाहती है. सिसोदिया ने कहा – 'पहले दिल्ली में 850 दुकानें होती थीं. नई पॉलिसी में तय किया कि 850 दुकानों से ज्यादा नहीं खोली जाएंगी. पहले सरकार को करीब 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था.

जब पारदर्शी ढंग से नीलामी हुई, तो पूरे साल में 850 दुकानों से 9,500 करोड़ का रेवेन्यू आना था. एक साल में सरकार की नई पॉलिसी से आय डेढ़ गुना बढ़ जाती. नई पॉलिसी से भ्रष्टाचार रुकता. तब बीजेपी ने नई पॉलिसी को फेल करने का प्लान बनाया. नई दुकान वालों को ईडी और सीबीआई की धमकी दी. प्राइवेट दुकान चलाने वालों को धमकी दी. बहुत से शराब वालों ने दुकान छोड़ दी.

दिल्ली में लाइसेंसशुदा दुकानों की कमी होती है, तो नकली शराब का कारोबार होगा. अब जो दुकानें खाली हो रही हैं, उनका लाइसेंस भरने को कोई तैयार नहीं है. उनकी नीलामी भी नहीं हो रही है. अफसरों को भी डरा दिया है.’ दिल्ली सरकार की नई पॉलिसी की चर्चा हम अपने इतिहास वाले सेगमेंट में करेंगे और आपको पुरानी पॉलिसी की बात भी बताएंगे जिसपर दिल्ली 31 अगस्त के बाद लौट आएगी. अब आप सोच रहे होंगे कि 31 अगस्त से पॉलिसी क्यों बदलेगी तो वक्त आ गया है आपको पूरा मामला बताने का...

दिल्ली में दुकानों पर बिकने वाली खुली शराब की बिक्री अब 1 सितंबर से पुरानी पॉलिसी के मुताबिक होगी. नई शराब नीति में कई कमियां पाई गईं इसीलिए उसे वापस लिया जा रहा है. दरअसल नई नीति की मियाद 31 जुलाई तक ही थी और उससे भी पहले की बात करें तो जैसे हमने आपको बताया था कि नई आबकारी नीति यानी नई एक्साइज पॉलिसी नवंबर 2021 में लागू की गई थी और इसका नाम ही था न्यू एक्साइज पॉलिसी 2021-22, जो 31 मार्च 2022 तक के लिए ही थी.

31 मार्च के बाद दिल्ली सरकार ने इसे दो बार दो-दो महीने के लिए बढ़ाया. पहले अप्रैल-मई और फिर जून-जुलाई के लिए. जैसा कि हमने आपको बताया कि बीजेपी का विरोध आम आदमी पार्टी सरकार को झेलना पड़ रहा था.. उसी बीच एक डेवलपमेंट और हुआ.. 26 मई 2022 को दिल्ली के नए LG बनाए गए विनय कुमार सक्सेना जो खुद बीजेपी से ही ताल्लुक रखते हैं और ऐसे में केजरीवाल सरकार की मुश्किलें बढ़नी तो तय थीं और हुआ भी कुछ ऐसा ही..

22 जुलाई को दिल्ली सरकार को तगड़ा झटका लगा. दिल्ली के उप-राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नई एक्साइज पॉलिसी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी. आरोप थे कि केजरीवाल सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी के जरिए शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया है. बताया गया कि एलजी वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नई एक्साइज पॉलिसी में नियमों की अनदेखी कर टेंडर दिए गए.

रिपोर्ट में गाज गिरी दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर और उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए. दरअसल, दिल्ली का एक्साइज विभाग मनीष सिसोदिया के अधीन है. रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीति के जरिए कोरोना के बहाने लाइसेंस की फीस माफी की गई. शराब कारोबारियों को टेंडर में 144 करोड़ से ज्यादा की छूट दी गई. राजधानी दिल्ली की नई शराब नीति को लेकर केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल के बीच तकरार बढ़ती ही गई.

तीन दिन भी नहीं बीते कि उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नई शराब नीति पर एक और जांच के आदेश दे दिए. जानकारी के मुताबिक, न्यायविदों, वकीलों और प्रतिष्ठित नागरिकों के एक संगठन ने एक शिकायत की. जिसपर जांच के आदेश दिये गए. पहले वाली शिकायत के आधार पर उपराज्यपाल सीबीआई जांच की सिफारिश पहले ही कर चुके थे. नई शिकायत में कहा गया कि दिल्ली में शराब का लाइसेंस देने में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं.

इस पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव को सत्यापन और जांच के आदेश दिए. ये भी कहा गया कि दो हफ्ते के अंदर इसपर रिपोर्ट तैयार करके उनको और सीएम केजरीवाल को भेजी जाए. केजरीवाल ने खुद को घिरते देख यू-टर्न लेने का मन बनाया. दिल्ली सरकार ने रविवार रात मौजूदा नई पॉलिसी को दो महीने और यानी 30 सितंबर तक बढ़ाने का फैसला किया. कैबिनेट के फैसले को मंजूरी के लिए एलजी के पास भेजा गया.

लेकिन एलजी तो एलजी ठहरे.. नई एक्साइज पॉलिसी पर चल रहे घमासान के बीच एलजी वीके सक्सेना ने बड़ा फैसला लिया.. उन्होंने गजट नोटिफिकेशन जारी करके नई एक्साइज पॉलिसी को 1 सितंबर से निरस्त करने का निर्णय लिया. यानी केजरीवाल की मांग पर 50% कटौती कर दी गई और दो महीने नहीं बल्कि केवल एक महीने यानी 31 अगस्त 2022 तक नई पॉलिसी जारी रखने का निर्देश दिया गया.

सितंबर महीने से पुरानी पॉलिसी पर लौटना होगा और इसके लिए सभी प्रबंध भी करने होंगे. वक्त हो चला है हमारे इतिहास वाले सेगमेंट की तरफ चलने का लेकिन उससे पहले एक शेर अर्ज़ है –

पिला दे ओक से साक़ी जो हम से नफ़रत है

पियाला गर नहीं देता न दे शराब तो दे

मिर्ज़ा ग़ालिब तो इस शेर में चुल्लू से भी शराब पीने को तैयार हैं, प्याला न भी मिले तो क्या? उसी तरह शायद पीने वाले को नई नीति और पुरानी नीति से क्या? उसे तो पीने को शराब मिलनी चाहिए लेकिन इन दोनों नीतियों का सरकार, दुकानदार और खरीदार पर क्या असर पड़ेगा ये समझते हैं. दिल्ली में शराब को लेकर केजरीवाल और एलजी आमने-सामने हैं. केजरीवाल नई शराब नीति को पीछे छोड़ फिर पुरानी शराब नीति पर आ गए हैं. नई शराब नीति केजरीवाल क्यों लेकर आए थे और ये क्या थी, इसकी भी चर्चा करेंगे. साथ ही पुरानी शराब नीति की भी चर्चा करेंगे जिसे दोबारा वापस लाया गया है.

अब जब शराब की बात हो रही है. और दिल्ली की बात हो रही है तो हमने सोचा क्यों न थोड़ी हरियाणा की भी बात कर लें. आपने रईस तो देखी है न, शाहरुख खान वाली फिल्म... अरे वही जिसमें अम्मी जान कहती थीं 'कोई भी धंधा छोटा नहीं होता, और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता.

2020 की बात है... शाहरुख खान की रईस फिल्म देखकर हरियाणा का एक व्यक्ति सुमित शराब की तस्करी करने लगा, बिल्कुल शाहरुख के स्टाइल में. वो कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस पकड़ न ले, जब पकड़ा गया तो उसने कहा रईस देखकर मेरे दिमाग में ये आइडिया आया. शराब धंधा ही ऐसा है. बेचने वाले को बेचना है. और पीने वाले को तो बस पीना है.

लेकिन दिल्ली सियासत ने शराब की ऐसी-तैसी कर दी है. जो लोग कुछ दिन पहले एक पर एक फ्री लेकर जा रहे थे. सोचिए उनका अब क्या होगा. और ये भी कल्पना कीजिए की अगर एक महीने बाद भी दिल्ली सरकार और एलजी के बीच बात नहीं बनी तो लोग क्या करेंगे? आपको तो पता ही है कि दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी पर चल रहे घमासान के बीच उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने बड़ा फैसला लिया है.

नई एक्साइज पॉलिसी 1 सितंबर से निरस्त हो जाएगी. उपराज्यपाल के इस फैसले के बाद लोगों के मन में कई सवाल उभर रहे हैं. मसलन क्या अगस्त में शराब पर डिस्काउंट जारी रहेगा? ऑफर मिलेगा या नहीं? क्योंकि राजधानी में अधिकांश प्राइवेट ठेके बंद हो चुके हैं. और नई पॉलिसी लागू होने के बाद से सरकारी ठेके पहले से बंद हैं. ऐसे में शराब पीने वालों को दिल्ली में शराब की भारी किल्लत से जूझना पड़ सकता है.

क्या है नई एक्साइज पॉलिसी?

17 नवंबर 2021 को लागू हुई इस पॉलिसी के तहत शराब की सारी दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गईं.

इसके तहत, दिल्ली में 849 शराब की दुकानें निजी हो गईं.

निजी हाथों में जाने से वेंडरों ने शराब पर भारी डिस्काउंट दिया.

एक पर एक फ्री के साथ-साथ डिस्काउंट ऑफर किए गए.

31 जुलाई को तो स्टॉक खत्म करने के लिए एक पर दो फ्री का ऑफर दिया गया.

इस नीति के तहत दिल्ली में शराब पीने की उम्र घटाकर 25 से 21 की गई.

नई शराब नीति में दिल्ली को 32 जोन में बांटकर लाइसेंस जारी किए गए थे. इसके जरिये खासकर बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं, जबकि छोटे कारोबारियों को इससे नुकसान पहुंचा है.

नई शराब नीति में होटलों के बार, क्लब और रेस्टॉरेंट वगैरह को रात तीन बजे तक खुला रखने की छूट दी गई थी. इसके साथ उन्हें छत, गैलरी, बाहरी स्पेस समेत किसी भी जगह शराब परोसने की छूट थी.

जबकि पुरानी नीति के तहत खुले में शराब परोसने पर रोक थी.

इसके साथ ही बार के काउंटर पर खुल चुकी बोतलों की शेल्फ लाइफ पर पाबंदी हटा ली गई थी.

नई शराब नीति के तहत शराब की दुकान के बाहर स्नैक्स वगैरह की दुकानों पर रोक थी, ताकि खुले में शराब पीने पर पाबंदी लग सके.

इसके तहत सरकार किसी भी शराब की दुकान की मालिक नहीं हो सकती.

शराब की दुकानों का मुंह मुख्य सड़क की ओर न होने को लेकर भी प्रावधान थे.

नई शराब नीति के तहत एक जोन में 25 से 26 दुकानें थीं, एक जोन के तहत 8-9 वार्ड शामिल किए गए मतलब हरेक वार्ड में 3 शराब की दुकानें.

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये ऐलान किया था कि सरकारी दुकानों के जरिए कानूनी तौर पर अब दिल्ली में शराब बेची जाएगी. आप ये समझिए कि दिल्लीब में पुरानी आबकारी नीति लागू होने का मतलब है कि 16 नवंबर 2021 से पहले वाली व्यिवस्थाम यहां लागू हो जाएगी. तब दिल्लीा में शराब की 389 सरकारी दुकानें थीं. इसके अलावा साल में 21 दिन ड्राई डे हुआ करता था.

नई एक्साेइज पॉलिसी लागू होने के बाद प्राइवेट रिटेलर्स MRP पर डिस्कांउंट दे पा रहे थे जबकि पुरानी पॉलिसी में ऐसी कोई व्यRवस्था् नहीं थी. इसका मतलब ये है कि दिल्लीी में शराब सितंबर से MRP पर बिकेगी मतलब शराब पीना है तो पैसा ज्यादा देना होगा. फिर तो लोग पंकज उधास की आवाज में मशहूर हुई गजल ही गाया करेंगे –

हुई महंगी बहुत ही शराब कि

थोड़ी-थोड़ी पिया करो...

दिल्ली में शराब नीति को लेकर उन लोगों को कोई मतलब नहीं जो शराब नहीं पीते हैं लेकिन जो शराब पीने वाले हैं वो भी कन्फ्यूजन में हैं. समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर चल क्या रहा है...शराब एक ऐसा विषय है जिस पर राजनीति भी होती है.. शायरी भी होती है... मारपीट भी होती है.. और कोई शख्स ज्यादा पी ले तो उसकी औकात भी बढ़ जाती है.

सरकारों के लिए शराब किसी खजाने से कम नहीं. वित्त वर्ष 2021-22 में यूपी सरकार को शराब से 36 हजार करोड़ का राजस्व मिला था. SBI State Finance Report 2021-22 के मुताबिक, दक्षिण भारत के राज्यों में शराब की सबसे ज्यादा बिक्री होती है. कर्नाटक में राज्य सरकार शराब पर लगाए टैक्स से 14.27 फीसदी की कमाई करती है. मतलब अगर सरकार 100 रुपये कमाती है तो उसमें से कुल 14.27 रुपये का राजस्व शराब से आता है. दिल्ली सरकार अगर 100 रुपये की कमाई करती है तो उसमें से 11.37 रुपये शराब पर लगे टैक्स से कमाती है.

दिल्ली में शराब पर हाहाकार क्यों मचा हुआ है ये अब आप को काफी-कुछ समझ आ गया होगा. देश में शराब पीने को लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं और अलग तरह की समाजिक धारणा भी... शराब हानिकारक तो है ही... सरकार कहती भी है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.. मत पीजिए.. लेकिन ये भी सच है कि शराब, बेचती भी सरकार ही है. बेचने से याद आया कि आपको पुरानी एक्साइज पॉलिसी की कुछ बातें बता दूं.

पुरानी एक्साइज पॉलिसी 1 सितंबर से अगले 6 महीने तक लागू होने की उम्मीद है. ऐसा हुआ तो जो डिस्काउंट और ऑफर मिल रहे थे, वो खत्म हो जाएंगे. क्योंकि फिर से सरकारी एजेंसियां शराब के ठेकों को चलाएंगी.

नवंबर 2021 से पहले दिल्ली सरकार की चार एजेंसियां 864 में से शराब की 475 दुकानें चला रही थीं.

389 दुकानें निजी एजेंसियां चला रहीं थीं. यानी, 1 सितंबर से फिर से 475 दुकानें सरकारी एजेंसियां चलाएंगी.

बाकी दुकानों के लिए निजी वेंडरों को लाइसेंस दिया जाएगा.

एक पर एक फ्री लेने वाले को धक्का लगा सकता है... वो ऐसे कि पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू होने के बाद ये सारे डिस्काउंट और ऑफर्स भी बंद हो जाएंगे.

नई एक्साइज पॉलिसी के तहत सिर्फ 26 जनवरी, 15 अगस्त और गांधी जयंती के दिन ही ड्राई डे था. लेकिन पुरानी पॉलिसी के तहत अब फिर से 21 दिन ड्राई डे रहेंगे.

दिल्ली में कौन बेचता है शराब ?

दिल्ली की पुरानी आबकारी नीति के मुताबिक, दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम, दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर और दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम ही मुख्य रूप से शराब की दुकानें चलाते हैं. दिल्ली की कुल 864 दुकानों में से 475 इन चार सरकारी निगमों के पास ही थीं जबकि 389 दुकानों के लाइसेंस निजी कंपनियों या व्यक्तियों के पास थे. दिल्ली में अगर शराब की किल्लत हुई तो कालाबाजारी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता बढ़ेगी, लोग शराब का स्टॉक रखना शुरु कर देंगे और निदा फाजली का वो शेर दोहराएंगे कि

कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई

आओ कहीं शराब पीएं रात हो गई

कुला मिलाकर लब्बो-लुबाब और विश्लेषण ये है कि नई शराब नीति और पुरानी शराब नीति के बीच हम सियासत को नहीं भूल सकते... दिल्ली सरकार और एलजी के बीच तानातनी तो लगी ही रहती है. दोनों सरकारों के बीच चाहे जिस चीज की लड़ाई हो लेकिन एक बात तो साफ है कि परेशानी में लोग हैं... शराब खरीदने वालों के लिए दुविधा ये नहीं है कि शराब पीना है... दुविधा एक पर एक फ्री को लेकर भी नहीं है.. दुविधा शराब की दुकानों को लेकर है.. लोग चाहें तो नशे के लिए पानी ही पी लें जैसा कि नूह नारवी अपने एक शेर में कह गए हैं...

हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं

पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं

और इस नाचीज़ को है आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कि कैसा लगा आपको ये लेख और लेखन?

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लेखक

निधिकान्त पाण्डेय निधिकान्त पाण्डेय @1nidhikant

लेखक आजतक डिजिटल में पत्रकार हैं.

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