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Updated: 16 दिसम्बर, 2018 12:00 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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राजनीति में हिंदुत्व को लेकर घोषणाएं करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब भी हिंदुत्व कार्ड की बात आएगी तो 2018 के विधानसभा चुनाव को याद जरूर किया जाएगा. इस चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को उसी के हथियार से मात दी है. ये हथियार है 'हिंदुत्व' का. इसी हथियार का इस्तेमाल कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में भी किया था, लेकिन हार गई थी. हालांकि, गुजरात में भी भाजपा बड़ी मुश्किल से जीत पाई थी. पीएम मोदी के गुजराती होने का फायदा गुजरात चुनाव में भाजपा को मिला था, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनावों में हिंदुत्व का फायदा कांग्रेस को हुआ है. राहुल गांधी की मंदिर-मंदिर माथा टेकने की कोशिश रंग लाई है. हर राज्य में कांग्रेस ने सरकार बनने के 10 दिन में किसानों का पूरा कर्ज माफ करने का वादा तो किया ही है, साथ ही हिंदुत्व से जुड़े कई वादे किए हैं. कांग्रेस ने वादे तो कर दिए, लेकिन अब चुनौती ये होगी कि उन वादों को पूरा कैसे किया जाए.

कांग्रेस, भाजपा, चुनाव, हिंदूकांग्रेस ने राजस्थान में अपने घोषणा पत्र को 'एक ही संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प' नाम दिया.

मध्य प्रदेश में 'वचन पत्र'

इस चुनाव में कांग्रेस को हिंदुत्व कार्ड का सबसे बड़ा फायदा मध्य प्रदेश में हुआ है और यहीं पर कांग्रेस ने हिंदुत्व से जुड़ी सबसे अधिक घोषणाएं भी की हैं. सबसे अधिक घोषणाएं गाय को लेकर की गई हैं. गौरक्षा, गौशाला और गौचर भूमि इनमें मुख्य हैं. कांग्रेस ने वादे तो कर दिए, लेकिन अब इन वादों को पूरा करने में हो सकता है कि कांग्रेस को पूरे 5 साल गुजर जाएं. या फिर ये भी हो सकता है कि इन 5 सालों में भी ये सारी चीजें ना हो पाएं. क्योंकि सबसे पहले तो किसानों को सारा कर्ज 10 दिन में माफ करना है, जिसकी वजह से सरकार के कंधों पर बहुत बड़ा बोझ पड़ेगा. बाकी के वादे तो पूरे तब होंगे, तब सरकार के हाथ में पैसे आएंगे.

यहां पर कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र 'वचन पत्र' नाम से जारी किया था, जिसमें हिंदुत्व से जुड़ी ये बातें थीं-

- प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में गौशाला खोलेंगे और चिन्हित क्षेत्रों में गौ अभ्‍यारण्‍य बनाएंगे.

- गौ शाला में गोबर खाद, कण्‍डा और गौमूत्र के साथ-साथ अन्‍य वस्‍तुओं का व्‍यावसायिक स्‍तर पर उत्‍पादन कराएंगे.

- मुख्य मार्गों पर गौवंश के संरक्षण एवं देखभाल के लिए अस्‍थायी शिविर की व्यवस्‍था, दुर्घटना में घायल गायों का उपचार एवं मृत गायों के अंतिम संस्‍कार की व्यवस्‍था करेंगे.

- गौ संरक्षण अधिनियम को लागू किया जाएगा और इस अधिनियम में विवादित धाराओं के संशोधन की अनुशंसा की जाएगी.

- गायों को चराने के लिए गौचर भूमि की उपलब्‍धता सुनिश्चित कराएंगे.

- तीर्थ दर्शन योजना में अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े ऐतिहासिक स्‍थलों को जोड़ेंगे.

- पुजारी एवं अन्‍य धर्म के पूजा से जुड़े लोगों का मानदेय बढ़ाएंगे.

- चित्रकूट से शुरू होने वाली राम पथ गमन का प्रदेश सीमा तक निर्माण करेंगे.

- मां नर्मदा न्‍यास अधिनियम लाएंगे. परिक्रमा पथ और हर 15 किलोमीटर पर विश्राम स्थल बनाएंगे. घाटों का विकास करेंगे.

राजस्थान में 'एक ही संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प'

कांग्रेस ने राजस्थान में अपने घोषणा पत्र को 'एक ही संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प' नाम दिया. मंदिर-मंदिर घूमते हुए राहुल गांधी ने यहां पर भी हिंदुत्व कार्ड खेला और गायों के संरक्षण का वादा किया. कांग्रेस ने वादा किया है कि गोचर भूमि बोर्ड बनाया जाएगा. गौभक्त लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे, क्योंकि राजस्थान में गायों के लिए छोड़ी गई जमीन पर भू-माफिया अतिक्रमण कर रहे थे और सरकार पर सांठ-गांठ करके जमीनें उनको बेचने के आरोप लग रहे थे. देखा जाए तो 'गोचर भूमि बोर्ड' बनाना तो बड़ी बात नहीं है, लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ बोर्ड बनाने भर से गायों की रक्षा हो जाएगी? कांग्रेस को उस जमीन को भी भू-माफियाओं से छुड़ाना होगा, जिन पर पहले से ही भू-माफिया कब्जा कर चुके हैं. ये सब इतना आसान नहीं होगा.

इसके अलावा राजस्थान में अलग से वैदिक आयोग भी बनाने की बात कही गई है, जिसमें वेद को बढ़ावा देने और पूजा करने के तरीके के प्रचार-प्रसार के लिए भी काम किया जाएगा. इतना ही नहीं, राजस्थान के सभी बड़े मंदिरों के आस-पास आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए अलग से वादा किया गया है. इसमें कहा गया है कि सभी मंदिरों को बड़े तीर्थ स्थल के रूप में कांग्रेस सजाएगी और संवारेगी. लोगों को भी ये वादे भा गए और उन्होंने कांग्रेस के हाथ में राजस्थान की सत्ता सौंप दी. अब कांग्रेस के सामने अपने वादे पूरे करते हुए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी.

छत्तीसगढ़ में 'जन घोषणा पत्र'

मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ चुनाव में हिंदुत्व की बात नहीं की, लेकिन चुनाव से पहले ही हिंदुत्व कार्ड खेल दिया. हिंदुओं की पवित्र नदी गंगा का पानी लेकर कांग्रेस के नेताओं ने शपथ ली. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि अक्सर लोग मानते हैं कि नेता झूठ बोलते हैं, लेकिन गंगाजल की कोई झूठी कसम नहीं खाएगा और गंगाजल की कसम खाने का कांग्रेस को फायदा भी हुआ. लोगों ने उनके वादों पर यकीन किया और सत्ता में वापसी करने में मदद की.

भले ही छत्तीसगढ़ चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं ने गंगाजल की शपथ लेते हुए वादे किए और हिंदुत्व कार्ड खेला, लेकिन कांग्रेस के मेनिफेस्टो में हिंदुत्व से जुड़ा कोई वादा नहीं दिखा. यहां पर कांग्रेस ने गरीब और किसानों पर सबसे अधिक फोकस किया. 10 दिन में किसानों की कर्जमाफी से लेकर एमएसपी तय करने तक कांग्रेस ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं. इसके अलावा बेरोजगारी से निपटने के लिए 'घर घर रोजगार, हर घर रोजगार' की योजना शुरू करने का भी वादा किया है. कांग्रेस के लिए सबको रोजगार मुहैया कराना सबसे मुश्किल काम होगा.

अभी तो कांग्रेस इसी बात को लेकर परेशान है कि मुख्यमंत्री किसे बनाया जाए. राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो कांग्रेस में दो फाड़ हुए दिख ही रहे हैं, छत्तीसगढ़ से इससे अछूता नहीं रहा है. तो कांग्रेस के लिए पहली चुनौती मुख्यमंत्री चुनना है. मुख्यमंत्री चुनते ही उसे 10 दिन के अंदर किसानों के कर्जे माफ करने होंगे, जिसके लिए काफी फंड की जरूरत होगी. इसके बाद शुरू होगा विपक्ष का हमला, उन वादों को लेकर जो कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में किए हैं. छत्तीसगढ़ में तो उम्मीद है कि कांग्रेस आसानी से विपक्ष से निपट लेगी, लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में विपक्ष बेहद मजबूत है, जो कांग्रेस की नाक में दम करने के लिए काफी है.

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