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Updated: 13 दिसम्बर, 2018 01:41 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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पांच राज्यों में हुए चुनाव के परिणाम आ गए हैं. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने भाजपा को शिकस्त दी और वो कर दिखाया जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. क्या आम क्या खास पार्टी से जुड़ा हर व्यक्ति पार्टी की इस सफलता का पूरा श्रेय राहुल गांधी को दे रहा है. समर्थकों द्वारा लगातार यही कहा जा रहा है कि कांग्रेस की ये सफलता राहुल गांधी की सूझ बूझ और कुशल रणनीति का हिस्सा है. वहीं इसके विपरीत एक वर्ग वो भी है जिसका मानना है कि इस विजय का एक मात्र कारण राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का सॉफ्ट हिंदुत्व है.

राहुल गांधी, हिंदुत्व, नरेंद्र मोदी, हिन्दू राहुल लगातार लोगों को अपने हिन्दू होने की बातें बड़े ही गर्व के साथ बताते नजर आ रहे हैं

यदि इस बात पर गौर  करें और इसका गहनता से अवलोकन किया जाए तो मिलता है कि जिस खूबी से  राहुल गांधी ने बीच मझधार में फंसी कश्ती निकाली है कारण ये बिंदु भी हो सकता है. सॉफ्ट हिंदुत्व राहुल गांधी के लिए कैसे फायदेमंद रहा यदि इसे समझना हो तो हमें इतिहास में जाना होगा. पूर्व में राहुल गांधी ये कहकर सुर्खियां बटोर चुके थे कि जो लोग मंदिर जाते हैं वो लड़कियों को छेड़ते हैं.

राहुल के इस बयान की खूब आलोचना हुई और एक बड़ा वर्ग ऐसा था जिसने राहुल को हिन्दू विरोधी मान लिया. इसके बाद रही गई कसर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी कर दी. पीएम मोदी ने भी अपनी अलग-अलग रैलियों में राहुल गांधी और उनके धर्म के प्रति लचर रवैये को लेकर तरह तरह के सवाल उठाए. इस बीच लोगों के दिमाग में ये बात घर कर गई कि राहुल गांधी मुस्लिम परस्त और हिंदू विरोधी हैं.

अब तक राहुल भी इस बात को जान चुके थे कि देश में हमेशा ही मुद्दों की अपेक्षा धर्म को तरजीह दी जाती है. उन्होंने इस बात का पूरा फायदा उठाया और अपनी रैलियों में जनता को इस बात का एहसास कराया कि उन्हें अपने हिंदू होने पर उतना ही गर्व है जितना किसी और को. इसके बाद लोग तब हैरत में तब आए जब गुजरात विधानसभा चुनाव हुए.

गुजरात विधानसभा चुनावों के वक़्त राहुल गांधी मंदिर गए और वहां उन्होंने पूजा अर्चना की. गुजरात में राहुल को मंदिर जाने का फायदा भी मिला और उन्होंने वहां भाजपा को कड़ी टक्कर दी. इसके बाद कर्नाटक चुनाव में भी राहुल गांधी और उनके हिन्दू होने का मुद्दा गरमाया रहा और बात जनेऊ तक आ गयी. इस समय तक राहुल ने अपने जनेऊ के बारे में लोगों को बताना और उसे दिखाना शुरू कर दिया.

बात आगे बढ़ाने से पहले ये बताना बेहद जरूरी है कि कर्नाटक चुनाव के बाद से पांच राज्यों के चुनावों तक कई मौके ऐसे आए हैं जब राहुल के विरोधियों  विशेषकर पीएम ने उन पर तीखे हमले किये हैं.  बहरहाल राहुल एक बार फिर धर्म को लेकर सुर्ख़ियों में तब आए थे जब राजस्थान चुनाव में प्रचार के दौरान वो पुष्कर पहुंचे और उन्होंने अपने गोत्र की घोषणा की और अपने को दत्तात्रेय बताया.

गुजरात चुनाव से शुरू हुए और मध्य प्रदेश पर आकर थमे राहुल गांधी के इस सफर पर यदि गौर किया जाए तो मिल रहा है कि राहुल गांधी का ये अंदाज लोगों को भी खूब अंदाज पसंद आ रहा है. अब जबकि 3 राज्यों के परिणाम आ गए हैं और राहुल गांधी ने एक आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया है. हमारे लिए ये कहना कहीं से भी गलत नहीं है कि लोगों को उनका योगी आदित्यनाथ के या फिर साक्षी महाराज और गिरिराज सिंह के मुकाबले हिन्दू बनना ज्यादा पसंद आ रहा है.

खैर जिस तरह का भारतीय राजनीति का माहौल है हमारे लिए ये कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि जैसे जैसे राहुल अपने धर्म के विषय पर मुखर होंगे वैसे-वैसे वो सफलता के नित नए पायदान हासिल करते जाएंगे. बाक़ी राहुल गांधी इस बात को भली प्रकार समझ चुके हैं और जैसे नतीजे आ रहे हैं साफ हो जाता है कि धर्म के बारे में बातें करना और सब के सामने गर्व से उसे बताना राहुल गांधी को फायदा पहुंचा रहा है.

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बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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