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Updated: 26 जुलाई, 2020 09:50 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने जिन हालात में और जिस तरीके से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा जमाया, अंजाम का अंदाजा तो पहले ही दिन से रहा होगा. अपने साथी कमलनाथ की कुर्सी चले जाने के बाद तो पक्का यकीन हो चुका होगा. ये भी मालूम होगा ही कि जब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया के दोस्त सचिन पायलट (Sachin Pilot) उनके आस पास रहेंगे तलवार उन पर तो लटकती ही रहेगी, बेटे वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के लिए भी खतरा कभी खत्म नहीं होने वाला.

जाहिर है अशोक गहलोत जैसा अनुभवी राजनीतिक धीरे धीरे अपनी चालें तो चलेगा ही - और उसी चक्कर में सचिन पायलट फंस गये. अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री तो बनने नहीं दिया, डिप्टी सीएम के साथ पीसीसी अध्यक्ष की कुर्सी भी छीन ली - लेकिन अशोक गहलोत का मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है.

सचिन पायलट के साथ जो कुछ भी हुआ है वो तो अशोक गहलोत की 3D पॉलिटिक्स का एक हिस्सा ही है - जिसे एक तीर से तीन निशाने के तौर पर समझ सकते हैं. यानी एक ही चाल से तीन तीन लक्ष्य साधे जा सकें. सचिन पायलट उसके एक शिकार हैं और अभी उसका डबल बाकी है जिसे हासिल करने के लिए अशोक गहलोत जयपुर से दिल्ली तक तूफान मचा रखे हैं. अशोक गहलोत की मौजूदा राजनीतिक कवायद का मकसद है - ये 3 लक्ष्य हासिल करना.

ताकि राहुल गांधी अकेला न महसूस करें

मौका कोई भी हो, मुद्दा कुछ भी क्यों न हो, मीटिंग का एजेंडा चाहे जो भी हो... अशोक गहलोत को किसी बात की कोई परवाह नहीं होती जैसे ही बोलने की बारी आती है एक ही डिमांड रख देते हैं - राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाये. ये ऐसी डिमांड है जिस पर सबकी बोलती बंद हो जाती है और हां में हां मिलाने के अलावा कोई चारा नहीं होता.

कुछ दिन पहले कांग्रेस कार्यकारिणी की मीटिंग चल रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टारगेट न करने वाली आरपीएन सिंह की सलाह से बात काफी आगे बढ़ चुकी थी. प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक ऐसी बात कह दी जिस इल्जाम से कांग्रेस के किसी भी नेता के पास बचने की भी गुंजाइश न बचे. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सीधे सीधे सबके सामने बोल दिया कि मोदी सरकार के खिलाफ लड़ाई में राहुल गांधी अकेले नजर आते हैं. ऐसा ही इल्जाम 'चौकीदार चोर है' अभियान के दौरान भी कांग्रेस नेताओं पर लगा था. कांग्रेस नेतृत्व का मानना रहा कि साथी नेताओं ने राहुल गांधी का ठीक से साथ नहीं दिया. ये तोहमत कांग्रेस के सभी नेताओं को 2014 के बाद 2019 में भी कांग्रेस की हार से सीधे सीधे जोड़ देती है.

अशोक गहलोत कांग्रेस नेताओं की उसी भीड़ में से निकल कर और आगे बढ़ कर राहुल गांधी के कंधे को मजबूत करने में जुटे हैं, ताकि फिर कभी प्रियंका गांधी के पास बोलने का कोई मौका न हो कि लड़ाई में राहुल गांधी अकेले जूझ रहे हैं.

अशोक गहलोत पर सोनिया गांधी के भरोसे को ऐसे समझा जा सकता है कि 2018 में जब राहुल गांधी को सैम पित्रोदा विदेश में राहुल गांधी की छवि निखारने के लिए इवेंट आयोजित कर रहे थे, गुजरात में अशोक गहलोत, अहमद पटेल के साथ राहुल गांधी के लिए राजनीतिक के रेड कार्पेट बिछा कर बुनियाद मजबूत कर रहे थे. गूगल पर तस्वीरें भरी पड़ी हैं, पूरे चुनाव राहुल गांधी एक अगल बगल अशोक गहलोत और अहमद पटेल ही नजर आते रहे. ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जहां राहुल गांधी की मर्जी से उनके साथ रहे, वहीं अशोक गहलोत और अहमद पटेल सोनिया गांधी के कहने पर.

कहने की जरूरत नहीं अशोक गहलोत सोनिया गांधी के खास तो हैं ही, राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग कर प्रियंका गांधी को बार बार ये जताने की कोशिश भी कर रहे हैं कि असल मायने में कांग्रेस में राहुल के अंधभक्त वो अकेले हैं जो राहुल गांधी की आक्रामक राजनीति के अकेलापन को दूर करने का माद्दा रखते हैं.

आखिर तमाम पैंतरों से राजस्थान के जरिये अशोक गहलोत ने करीब दो हफ्ते से कांग्रेस को खबरों में तो बनाये रखा ही है. लगातार बीजेपी को टारगेट किये हुए हैं ही. बीच बीच में कभी सरकार गिराने के नाम पर तो कभी कोरोना वायरस के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी तीखे शब्दों के जरिये घेरने की कोशिश करते ही रहे हैं. हाल फिलहाल तो हद से ज्यादा ही आक्रामक देखे जा सकते हैं.

vaibhav gehlot son of ashok gehlotसचिन पायलट के हटते ही अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत ने मोर्चा संभाल लिया है

बीच बीच में क्रिएटिविटी भी दिखाते रह रहे हैं और उसके भी डबल फायदे उठाने की कोशिश रहती है. विधायकों को होटल में रखते तो हैं, लेकिन जब लगता है कि पॉलिटिकल लॉकडाउन से वे ऊब चुके होंगे तो बसों में भर कर राजभवन के वॉक पर लेकर चले जाते हैं - हवा पानी भी बदल जाता है और धरने का नाम भी हो जाता है. फिर लगता है कि ज्यादा घुमाने फिराने से कहीं भटक न जायें तो वापस होटल पहुंचा देते हैं.

सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लिए आज की तारीख में भला इतना कौन सोच या कर रहा है. अगर अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल के कानूनी योगदान को छोड़ दें तो अशोक गहलोत जितना फिक्र करने वाला कौन है.

गुजरात चुनाव के बाद ही राहुल गांधी ने सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस की कमान सौंपी थी और अशोक गहलोत को जनार्दन द्विवेदी की जगह संगठन महासचिव का ताकतवर पद और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी. अशोक गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद केसी वेणुगोपाल ने उनकी जगह ली. केसी वेणुगोपाल भी राहुल गांधी के खास माने जाते हैं, ऐसे में अगर अशोक गहलोत के जयपुर से दिल्ली शिफ्ट होने की नौबत आयी तो थोड़ा प्रमोशन तो बनता ही है.

अपने बेटे वैभव गहलोत के लिए टिकट को लेकर भरी सभा में बेइज्जत हो चुके गहलोत अब गांधी परिवार का भरोसा जीत कर भरपायी करना चाहते हैं. गांधी परिवार को एहसास दिलाना चाहते हैं कि राहुल गांधी कतई अकेले नहीं हैं - और अगर कांग्रेस में कोई उनके साथ कदम से कदम मिला कर चल सकता है सिर्फ वो ही हैं और तो कोई भी नहीं. दूर दूर तक कोई भी नहीं. अशोक गहलोत को वो दिन कभी नहीं भूल सकता जब राहुल गांधी ने CWC में बेटे खातिर अशोक गहलोत को कांग्रेस की हार का जिम्मेदार बताया था. वो दिन भी नहीं भूल सकता जब उनका बेटे उसी जोधपुर से हार गया जहां से वो कई बार सांसद रहे.

अशोक गहलोत फिर से कार्यकारिणी में राहुल गांधी के मुंह से तारीफ के दो शब्द सुनना चाहते हैं. ये भी सुनना चाहते हैं कि प्रियंका गांधी कहें कि अब राहुल गांधी अकेले नहीं हैं, अशोक गहलोत उनके साथ हैं - और जब ये सब हो रहा हो तो सोनिया गांधी को अपनी सीट पर बैठे बैठे मुस्कुराते देखना चाहते हैं. भला कांग्रेस को ऐसा नेता कहां मिलेगा. जब इतना सब हो जाता है तो हार्दिक पटेल की तरह अशोक गहलोत के लिए केंद्र में कार्यकारी अध्यक्ष का पद तो बनता है ना. है कि नहीं?

सचिन पायलट को राजस्थान कांग्रेस से बेदखल करना चाहते हैं

सचिन पायलट तो अशोक गहलोत की आंख में तभी से खटक रहे होंगे जब राहुल गांधी ने उनको राजस्थान में पार्टी को मजबूत करने का टास्क थमाया होगा. बाद में उनकी आंखों के सामने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बना दिया, जाहिर है मन मसोस कर और खून का घूंट पीकर रह गये होंगे.

बेटा लोक सभा का चुनाव हार जाये और राजनीतिक दुश्मन कैबिनेट डिप्टी सीएम के साथ साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बना रहे भला कैसे बर्दाश्त होगा? और कब तक बर्दाश्त होगा भला?

सचिन पायलट की दो पदों से तो छुट्टी करने के बाद भी अशोक गहलोत चैन से नहीं बैठे हैं. पहले तो हर तरह से मजबूर कर रहे हैं कि वो कांग्रेस खुद ही छोड़ कर चले जायें, लेकिन अगर ये मुमकिन न हो पाये तो कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाने की कोशिश है.

विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर बेचैनी की बड़ी वजह सरकार बचाने से भी ज्यादा सचिन पायलट के खिलाफ एक्शन के लिए मजबूत आधार तैयार करना है. तभी तो विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए अशोक गहलोत नयी रणनीति बना रहे हैं.

बेटे को विरासत सौंपने की तैयारी

वैभव गहलोत राजस्थान कांग्रेस में महासचिव हैं, लेकिन कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में कभी नहीं देखे गये, लेकिन सचिन पायलट के हटते ही मैदान में उतर गये हैं. राजभवन में कांग्रेस विधायकों के धरने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हर जिले में प्रदर्शन किया. जयपुर में कांग्रेसे के विरोध प्रदर्शन में वैभव गहलोत को देखा जाना काफी दिलचस्प रहा.

पहुंचते ही मंच से वैभव गहलोत ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला - आप देख रहे हैं कि बीजेपी कैसे एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है. बोले, ये एक ऐसी सरकार है, जिसने कोरोना से लड़ने में शानदार काम किया. ये बहुत ही चिंताजनक है कि जिस सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने में पूरी ताकत लगा दी, उसी सरकार को केंद्र गिराना चाहता है.

वैभव गहलोत ने ये भी कहा कि बीजेपी ने गलत प्रदेश चुन लिया है. बोले, पिछले डेढ़ साल में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार का काम किया, उन्हें पच नहीं रहा है. वैभव गहलोत फिलहाल राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के भी अध्यक्ष हैं. जब वैभव गहलोत क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव लड़ रहे थे तो सचिन पायलट ने ये कह कर विरोध जताया था कि इससे पार्टी की छवि पर गलत असर पड़ेगा.

वैभव गहलोत को अशोक गहलोत की राजनीतिक विरासत संभालने से पहले ही मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं. जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबियों के खिलाफ आयकर के छापे पड़ रहे थे उसी के आस पास वैभव गहलोत के खिलाफ ED का भी समन जारी हुआ था. दरअसल, वैभव गहलोत की फेयर माउंट होटल के मालिक रतनकांत शर्मा से दोस्ती है. जयपुर का फेयर माउंट होटल वही जगह है जहां कांग्रेस के विधायक ठहरे हुए हैं.

वैभव गहलोत जब 1980 में पैदा हुए उसी साल अशोक गहलोत पहली बार जोधपुर से सांसद बने थे और बाद में भी कई बार रहे. 2019 के आम चुनाव में अशोक गहलोत ने जोधपुर सीट पर ही बेटे वैभव गहलोत को उतारा, लेकिन बीजेपी नेता गजेंद्र सिंह शेखावत से चुनाव हार गये - संयोग देखिये वही गजेंद्र सिंह शेखावत केंद्र सरकार में मंत्री हैं और राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने एक वायरल ऑडियो क्लिप के आधार पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया हुआ है. सच में राजनीति की भी दुनिया कितनी छोटी होती है.

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Ashok Gehlot, Vaibhav Gehlot, Sachin Pilot

लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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