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Updated: 03 नवम्बर, 2019 10:34 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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राष्ट्रवाद का एजेंडा आम चुनाव में हिट रहा, लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में पूरी तरह फ्लॉप हो गया. ये चुनाव नतीजे ही हैं जिनके चलते बीजेपी हरियाणा में जैसे तैसे सरकार बनाने में सफल रही, लेकिन महाराष्ट्र में हर रोज जूझ रही है.

महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव के नतीजे बीजेपी के लिए बड़ा मैसेज समझा गया. खास तौर पर पार्टी के चुनावी एजेंडे के नजरिये से. जब हर कोई महाराष्ट्र और हरियाणा का मैसेज महसूस कर पा रहा है तो निश्चित तौर पर बीजेपी को भी इस बात का एहसास हो ही रहा होगा.

सिर्फ राष्ट्रवाद के बूते हर चुनाव नहीं जीते जा सकते, ये दर्ज होने के बावजूद बीजेपी का इरादा आगे के लिए बदलने वाला नहीं लगता. झारखंड चुनाव से पहले बीजेपी नेतृत्व जो संकेत दे रहा है - लगता नहीं कि बीजेपी किसी नये एजेंडे पर फोकस करेगी.

नया नक्शा बहुत कुछ कहता है

जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति होती है, सरहद पार से दुनिया को एक ही पैगाम भेजने की कोशिश होती है - पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत करना चाहता है. फिर बाकी चीजें पहले की ही तरह चलती रहती हैं.

मनोहरलाल खट्टर के सपोर्ट में एक रैली में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ साफ कह दिया - बात जरूर होगी पड़ोसी के साथ, लेकिन बात सिर्फ PoK पर ही होगी. ये साफ संकेत था कि बीजेपी आम चुनाव की ही तरह राष्ट्रवाद के एजेंडे के साथ ही आगे बढ़ने वाली है.

मौके की नजाकत और अवाम की नब्ज को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह ने तो एजेंडा पहले से ही तय कर रखा था - धारा 370 और पाकिस्तान के इर्द-गिर्द घूमते मुद्दे. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ही राज्यों में ये दोनों ही नेता इन्हीं मुद्दो पर फोकस रहे. जाहिर है रघुवर दास को भी उसी तरीके से आगे बढ़ना है.

narendra modi and raghubar dasझारखंड में भी एजेंडा नहीं बदलने जा रहा है...

झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा के अगले ही दिन केंद्र सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर नया नक्शा जारी किया गया है. नक्शे की खासियत सिर्फ इतनी ही नहीं है कि वो केंद्र शासित क्षेत्र बने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग अलग दिखा रहा है - बल्कि, ये कि नक्शे में PoK भी साफ साफ नजर आने लगा है.

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2019 के अनुसार जारी नक्शे में पीओके के तीन जिले शामिल किये गये हैं - मुजफ्फराबाद, पंच और मीरपुर.

फिर तो मान कर चलना होगा कि जिस तरह आम चुनाव में बीजेपी की रैलियों में बालाकोट एयर स्ट्राइक और पाकिस्तान जैसे मुद्दे गूंजते रहे - आगे भी वही हाल रहेगा. ये भी मान कर चलना होगा कि जिस तरह महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाली बीजेपी की चुनावी रैलियों में धारा 370 का मुद्दा गूंजता रहा - आगे भी कायम रहेगा. फिर तो साफ है झारखंड चुनाव में नया नक्शा भी वैसे ही ट्रेंड करेगा जैसे बाकी मसले पिछले चुनावों में.

नये नक्शे में PoK के जो तीन जिले शुमार किये गये हैं - एक मुजफ्फराबाद भी है. वही मुजफ्फराबाद जहां संयुक्त राष्ट्र में भाषण देने के लिए अमेरिका रवाना होने से पहले इमरान खान ने रैली की थी - और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. वही रैली जिसमें इमरान खान भारत में घुसपैठ के लिए पाकिस्तानी नौजवानों को मोटिवेट कर रहे थे. वही रैली जहां इमरान खान ने कहा कि तैयारी पूरी हो जानी चाहिये, लेकिन भारत में घुसपैठ तब होगी जब वो खुद इसकी अलग से हरी झंडी दिखाएंगे.

लगता तो यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाइलैंड दौरे में ही बीजेपी का चुनावी इरादा जाहिर कर दिया है - 'जब फैसला सही होता है तो इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है.'

मान कर चलिये ऐसी ही गूंज झारखंड चुनावों में भी सुनाई देने वाली है - और शायद आगे भी. दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और उसके बाद भी.

महाराष्ट्र-हरियाणा जैसे ही BJP लड़ेगी झारखंड चुनाव

झारखंड में विधानसभा चुनाव पांच चरणों में होंगे और शुरुआत 30 नवंबर से होगी. वोटों की गिनती 23 दिसंबर को होगी और उसी दिन नतीजे भी आएंगे.

झारखंड चुनाव में भी बीजेपी के राष्ट्रवाद के एजेंडे के साथ ही उतरने के दो ही कारण लगते हैं - या तो बीजेपी के पास कोई दूसरा एजेंडा नहीं है जिससे चुनाव जीत पाने का यकीन हो, या फिर राष्ट्रवाद के अलावा किसी भी दूसरे मुद्दे पर बीजेपी को इतना भरोसा नहीं है कि वो रिस्क लेने के बारे में सोच सके.

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि झारखंड चुनाव से पहले अयोध्या पर फैसला भी आने वाला है. फैसले को लेकर शासन-प्रशासन में हर स्तर पर तैयारियां हो रही हैं - और माहौल को सामान्य बनाने की कोशिश चल रही है. अयोध्या पर फैसले का चुनावी राजनीति पर असर होना या न होना भी बीजेपी और बाकी दलों पर ही निर्भर करता है कि वे क्या लाइन लेते हैं.

आम चुनाव से पहले ही संघ-बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों ने अयोध्या मुद्दा को ठंडे बस्ते में डाल दिया था - फैसला क्या आता है और उसे चुनाव में कैसे पेश किया जाता है - देखना दिलचस्प होगा.

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मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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