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Updated: 24 मई, 2022 06:06 PM
सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर'
सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर'
  @siddhartarora2812
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दरबार में चर्चा होने लगी कि दयालुता बहुत अच्छी चीज़ है. सिख गुरु कितने दयालु होते हैं, सिख राजा भी बहुत दयालु होते हैं. शायद यही वजह है कि लोग उन्हें बहुत पसंद करते हैं और मुग़लिया बादशाह से डरते हैं पर प्यार नहीं करते. तभी एक चम्मच ने टोक दिया 'तो क्या हुआ, हमारे बादशाह भी बहुत दयालु हैं. इनकी दयालुता के चर्चे तो पूरे हिंदुस्तान में हैं.'

सभा सकपका गयी. औरंगज़ेब और दयालु? ये तो बाप को मार के खा जाए. पर सामने बैठा है, बोले कौन? पूछे कौन?  पर एक दरबारी ने हिम्मत कर दी. 'बादशाह की दयालुता के किस्से हम भी सुनना चाहेंगे. बादशाह के खादिम से दरख़्वास्त है कि कोई किस्सा सुनाए.'

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अब चम्मच को कोई किस्सा पता हो तब तो सुनाए. दयालुता के नाम पर कबतक टोपियां सिलने का बहाना बताता रहे. चम्मच ने देखा औरंगज़ेब मुस्कुरा रहा था. उसने बॉल उसी की ओर पास कर दी. अपनी दयालुता की कहानी, बादशाह ख़ुद सुनाएंगे, सभा शांत होकर सुने.

औरंगज़ेब ने गला खंखारकर साफ किया. 'एक बार हम जंगल में शिकार के लिए गए थे. बहुत घना जंगल था. कुछ जगह तो इतने पेड़ थे कि दिन की रौशनी में भी आफ़ताब ज़मीं तक पहुंचने का रास्ता नहीं बना पा रहा था. हमारे सिपाही कहीं पीछे रह गए. हम उस जंगल में गहरे पहुंच चुके थे कि हमने देखा एक चौड़े से गहरे गड्ढे में से किसी के चिल्लाने की आवाज़ आ रही है...'

सभा मंत्रमुग्ध होकर सब ध्यान से सुन रही थी.'... हम भाला लेकर गड्ढे के पास पहुंचे तो देखा एक दस-बारह साल का लड़का उसमें पड़ा बाहर निकलने के लिए तड़प रहा है, चिल्ला रहा है. हमें उस बेवकूफ पर तरस आ गया. हमने उसे बाहर निकाल लिया.'

चम्मच ने तालियां पीटनी शुरु कर दीं. 'वाह-वाह! बादशाह कितने दयालु हैं'

सभा भी बांदरों की तरह नकल करने लगी. बस वो एक सवाल पूछने वाला अभी भी भवें टेढ़ी किए सबके शांत होने का इंतज़ार कर रहा था. बादशाह मंद मंद मुस्कुरा रहा था. जब सब शांत हुए तो उसी खोचड़ ने फिर पूछा 'बादशाह आप सलामत रहें, आपके पराक्रम की चर्चा हिंदुस्तान के बच्चे बच्चे तक पहुंचे, परंतु इतना ज़रूर बताएं कि आपने उस अभागे बालक को बाहर निकाला कैसे? क्या आपके पास कोई रस्सी भी थी?'

बादशाह हंसा 'अब रस्सी हमें उस वीराने में कहां से हासिल होती, हमारे पास एक भाला था, हमने वही उसकी गर्दन में घुसाया और उसे ऊपर खींच लिया.'

सभा सन्न रह गयी!

चम्मच फिर तालियां बजाते हुए बोल पड़ा 'और बादशाह अपना ख़र्च भी तो ख़ज़ाने से नहीं लेते हैं, अपने ख़र्च के लिए टोपियां सिलते हैं टोपियां. सभा में ज़्यादातर की फटी पड़ी थी. वो फिर से 'दयालु' औरंगे के लिए तालियां बजाने लगे, उनमें से कुछ तो अबतक बजा रहे हैं.

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लेखक

सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' @siddhartarora2812

लेखक पुस्तकों और फिल्मों की समीक्षा करते हैं और इन्हें समसामयिक विषयों पर लिखना भी पसंद है.

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