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Updated: 27 जनवरी, 2020 03:43 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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Who is buying Air India? ये सवाल तब उठा है जब Air India sale से जुड़ी ताजा खबरें (Air India latest news) तेजी से सुर्खी बन रही हैं. काफी समय से सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के बेचे जाने की खबरें आ रही हैं. यूपीए की सरकार के दौरान भी इसे बेचे जाने की बातें होती थीं और मोदी सरकार (Modi Government) में भी इसे बेचने के कयास लग रहे थे. अब मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि वह एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की अध्यक्षता में बने एक मंत्री समूह ने 7 जनवरी को ही एयर इंडिया के निजीकरण को मंजूरी दे दी थी. अब जब सरकार ने इसे बेचने की तैयारी कर ली है तो उसने 17 मार्च तक एयर इंडिया के लिए बोली मंगाई है. बता दें कि कंपनी पर करीब 60 हजार करोड़ का कर्ज है. यहां सबसे बड़ी बात ये है कि आखिर कर्ज में डूबी इस कंपनी को कोई क्यों खरीदेगा? आखिर पिछले कई सालों से तो किसी ने खरीदा नहीं, तो इस बार सरकार ऐसा क्या ऑफर दे देगी कि ये बिक जाए? इससे भी बड़ा सवाल ये है आखिर इसे कौन खरीदेगाा?

पहले जानिए क्या है एयर इंडिया की हालत

मौजूदा समय में एयर इंडिया पर करीब 60 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. हालात ये हैं कि कंपनी को रोजाना 20-25 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है. अब मोदी सरकार एयर इंडिय को और अधिक आर्थिक सहायता नहीं देना चाहती है. अगर आधिकारिक आंकड़ों को देखें तो वित्त वर्ष 2019 में कंपनी ने 25,509 करोड़ रुपए की कमाई की और 30,194 करोड़ रुपए खर्च किए, यानी 4,685 करोड़ रुपए का नुकसान. बता दें कि एयर इंडिया के पास करीब 125 एयरक्राफ्ट हैं और दिसंबर 2019 के अनुसार इसका घरेलू मार्केट में शेयर करीब 11.9 फीसदी है.

Air India entire stake sellingएयर इंडिया को हर रोज करीब 25 करोड़ रुपए का नुकसान होता है.

सरकार की तैयारियों पर एक नजर

मोदी सरकार ने पहले भी 2018 में एयर इंडिया को बेचने का प्रस्ताव रखा था. उस समय सरकार 76 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही थी, लेकिन किसी ने भी इसे खरीदने में कोई रुचि नहीं दिखाई. अपने पुराने अनुभव से सरकार ने सबक लेकर इस बार एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. ये भी सुनने में आ रहा है कि सरकार ने एयर इंडिया की 60 हजार करोड़ की कर्जदारी का एक बड़ा हिस्सा माफ करने का भी ऑफर दिया है. बता दें कि यूपीए ने 2011-12 में एयर इंडिया में आने वाले 10 साल में 30,000 करोड़ रुपए लगाने को मंजूरी दी थी और दिसंबर 2019 तक सरकार की ओर से एयर इंडिया में 30,520.21 करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं.

कौन खरीद सकता है इसे?

माना जा रहा है कि इसे खरीदने के लिए टाटा समूह, हिंदुजा, इंडिगो, स्पाइसजेट और कुछ निजी इक्विटी फर्म की तरफ से बोली आ सकती है. ये भी माना जा रहा है कि ज्वाइंट वेंचर के तहत भी दो कंपनियां मिल कर एयर इंडिया को खरीदने का प्लान दे सकती हैं. एविएशन इंडस्ट्री के एक सूत्र के अनुसार इंडिगो इसे खरीदने वाला सबसे बड़ा दावेदार हो सकता है, लेकिन इसे शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलना मुश्किल है. उनके अनुसार शुरुआती बोली तो कोई भी लगा सकता है, लेकिन एग्रीमेंट साइन होने से पहले शेयर होल्डर्स की मंजूरी लेनी जरूरी होती है.

खरीदने-बेचने में क्या है अड़चन?

आपको बता दें कि टाटा जैसे समूह सरकार के साथ काफी अधिक बारगेन कर रहे हैं. सरकार चाह रही है कि अधिक से अधिक मिल जाए. नहीं तो कम से कम इतनी राशि तो मिल ही जाए कि एयर इंडिया का कर्ज निपटाया जा सके, लेकिन इसे खरीदने में रुचि दिखाने वाले सरकार का नहीं, बल्कि अपना फायदा देख रहे हैं. वह एयर इंडिया को एक कंपनी से अधिक कुछ नहीं सोच रहे हैं और सरकार के साथ डीलिंग भी ऐसे ही कर रहे हैं.

इस बार भी नहीं बिकी तो बंद हो जाएगी एयरलाइन !

एयर इंडिया के एक अधिकारी की मानें तो अगर जून 2020 तक एयर इंडिया को कोई खरीददार नहीं मिलता है, तो इसकी हालत भी जेट एयरवेज की तरह हो सकती है और कंपनी बंद करने की नौबत आ जाएगी. अधिकारी की मानें तो उन्होंने कहा है कि कंपनी ने सरकार से 2,400 करोड़ रुपए की सोवरेन गारंटी (कंपनी पर किसी थर्ड पार्टी के कर्ज का निपटारा करने का वादा) मांगी थी, लेकिन सरकार ने सिर्फ 500 करोड़ रुपए की गारंटी दी है. उनके अनुसार कंपनी के फंड्स से एयर इंडिया अधिक से अधिक जून 2020 तक चल सकती है, उसके बाद भी अगर सरकार ने पैसे नहीं दिए या कोई खरीददार नहीं मिला तो एयर इंडिया के विमान आसमान में नहीं दिखेंगे.

एयर इंडिया बंद हुई तो क्या होगा हम पर असर?

यूं तो एयर इंडिया की घरेलू बाजार में हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 18 फीसदी, लेकिन इसके बंद होने से बहुत से लोगों पर इसका असर पड़ेगा. एयर इंडिया सरकारी कंपनी है, ऐसे में राजनीति के लिए भी इसका खूब इस्तेमाल हुआ है. जैसै हज यात्रा के सस्ते पैकेज देकर वोटर्स को लुभाने की कोशिश. इतना ही नहीं, हिंदू और सिख धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक स्थलों तक जाने के लिए कई विमान सेवाएं शुरू की हैं और कई तरह के लुभावने पैकेज दिए हैं. कंपनी सरकार है, इसलिए कमाई पर नहीं, बल्कि लोगों की सुविधा पर ध्यान देना जरूरी है. कंपनी उस इलाकों में भी सेवा देती है, जहां बाकी एयरलाइन अपने विमान नहीं भेजते हैं. ऐसे में कर्ज बढ़ना स्वाभाविक है. अब अगर ये कंपनी बंद होती है तो समझिए कि श्रद्धालुओं को मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी. जेट एयरवेज के बंद से लोगों पर कुछ खास असर नहीं पड़ा, लेकिन एयर इंडिया बंद हुई तो उसका असर लोगों पर जरूर दिखेगा.

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