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Updated: 30 अगस्त, 2019 06:46 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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'बाहुबली' और 'बाहुबली 2' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देखने के बाद दर्शक Prabhas की अगली फिल्म साहो से भी वैसी ही उम्मीदें कर रहे थे. लेकिन इस हाइरेटेड सुपरस्टार का वो जादू 'Saaho' के जरिए चल नहीं पाया.

बाहुबली की बदौलत ही प्रभास को दुनिया भर में पहचान मिली, जबरदस्त फैन फॉलोइंग मिली. लोग प्रभास के दीवाने हो गए थे. और उसी दीवनगी में जब साहो देखी गई तो सिर्फ प्रभास ही प्रभास सुनाई दिया...साहो कहीं नहीं. साहो से प्रभास ने बॉलीवुड में डेब्यू किया है. कह सकते हैं कि साहो के प्रभास तो हिट हैं लेकिन साहो नहीं.

प्रेम में डूबे ये फैन्स सोशल मीडिया पर Saaho Review दे रहे हैं. फिल्म की जबरदस्त बढ़ाई कर रहे हैं, उसे सुपर हिट बता रहे हैं लेकिन सच यही है कि साहो के साथ 'ऊंची दुका और फीके पकवान' वाली बात हो गई है.

saaho फिल्म में कहानी नहीं एक्शन मिलेगा

फिल्म को अच्छे रिव्यू नहीं मिल रहे

कहा जा रहा है कि अगर आप प्रभास के फैन हैं तभी फिल्म पर पैसे खर्च करो. वरना फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है जिसके लिए फिल्म देखी जा सके. हां, एक्शन और स्पेशल इफैक्ट्स की तारीफ जरूर हो रही है. लेकिन फिर भी अगर फिल्म देखने जा ही रहे हों तो दिमाग घर पर रखकर जाइए क्योंकि फिल्म में आपको न स्टोरी मिलेगी, न स्क्रीनप्ले और न ही डायरेक्शन.

अगर रिव्यू के लिए स्टार्स पर भरोसा करते हैं तो बड़े-बड़े क्रिटिक्स ने फिल्म को 1.5 स्टार दिए हैं. तरण आदर्श ने तो इस फिल्म को अझेल बताया है. उनका कहना है कि फिल्म के निर्देशक सुजीत ने टेलेंट, पैसे और अवसर तीनों बर्बाद किए. कहानी कमजोर हा, पटकथा समझ नहीं आती और निर्देशन शौकिया लगता है.

लेकिन प्रभास के फैन्स की मानें तो जिस फिल्म में प्रभास हो वो फिल्म कभी फ्लॉप हो ही नहीं सकती. देखा जाए तो प्रभास को लेकर फिल्म बनाने का आइडिया तो सफल दिखाई देता है क्योंकि वो अपनी मैचो इमेज और एटिट्यूड कैरी करने में सफल हुए हैं. दर्शक उन्हें पसंद कर रहे हैं.

लेकिन फिल्म के इस सीन को देखकर आप समझ सकते हैं कि फिल्म में क्या क्या हो सकता है. निर्देशक की कल्पनाएं हकीकत से कोसों दूर नजर आती हैं. इसे देखकर यही कहा जा सकता है कि निर्देशक सुजीत भी प्रभास के फैन ही हैं.

धारणा तो ये है कि प्रभास अपने नाम और जबरदस्त फैन फॉलोइंग की वजह से किसी भी फिल्म को खींच सकते हैं, इसलिए उन्हें लेकर फिल्म बनाना रिस्की तो जरा भी नहीं है. दरअसल अब प्रभास में लोग नया रजनीकांत देख रहे हैं. प्रभास पर वैसा ही प्यार लुटाया जा रहा है. निर्देशक सुजीत ने भी यही सोचा होगा. पर सवाल ये उठता है कि प्रभास ने इतना बड़ा रिस्क आखिर लिया कैसे? बॉलीवुड में एंट्री करने के लिए वो कोई भी फिल्म आंख बंद करके कैसे कर सकते थे?

इसे हिट कैसे कहें?

साहो कोई हलके-फुल्के बजट की फिल्म नहीं थी. इसपर करीब 350 करोड़ लगे हैं. फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगू तीनों में एक साथ 4,500 स्क्रीन्स पर रिलीज़ की गई है. ये बड़े बजट की फिल्म पिछले दो साल से बन रही थी जिसे 2019 की सबसे बड़ी फिल्म कहा जा रहा था. ट्रेड एनलिस्ट गिरीश जौहर का कहना है कि साहो की हिंदी वर्जन पहले दिन करीब 15 से 20 करोड़ का बिजनेस कर सकती है. और सभी का कलेक्शन जोड़ें तो पहले दिन कोई 70 करोड़ कमा सकती है. लेकिन 350 करोड़ की ये फिल्म अगर 100 करोड़ क्लब में आ भी गई तो भी इसे हिट नहीं कहा जा सकता. हिट तो ये तब कहलाएगी जब 1000 करोड़ कमा ले जाए.

प्रभास की 'बाहुबली: द बिगनिंग' का बजट 180 करोड़ था जिसने बॉक्स ऑफिस पर 650 करोड़ का बिज़नेस किया था. बाहुबली-2, 250 करोड़ की लागत से बनी थी जिसने 1,810 करोड़ कमाए थे. उस हिसाब से साहो मात खाती दिख रही है.

तो क्या हुआ कि फिल्म में प्रभास और श्रद्धा कपूर ने अच्छा काम किया है, लेकिन ये दोनों अपने दम पर दर्शकों को थिएटर तक नहीं खींच पाएंगे. क्योंकि सिर्फ हीरो के होने से फिल्म नहीं चलती. फिल्म कहानी से चलती है जो साहो में है नहीं. याद ही होगा पिछले साल पब्लिक ने फिल्म की कहानी को लेकर ही अपने चहेते सलमान खान को रेस-3 के लिए रिज्क्ट कर दिया था. फिल्म औंधे मुंह गिरी थी. कुछ ऐसा ही हाल साहो का भी हो सकता है. फिल्म प्रभास की वजह से दक्षिण भारत में तो चल भी सकती है लेकिन बाकियों के लिए तो साहो सलमान खान की रेस-3 ही है.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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