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Updated: 27 मई, 2019 07:44 PM
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Xiaomi Black Shark 2 अब भारतीय मार्केट में लॉन्च हो गया है. इस फोन के साथ खास बात ये है कि इसे सिर्फ Gaming Smartphone के तौर पर लॉन्च किया गया है. यह स्‍मार्टफोन एक ऐसे समय पर लांच हुआ है, जब दुनिया में गमिंग की लत के खतरे पर चिंता जताई जा रही है. Black Shark भी Redmi की तरह Xiaomi का ही ब्रांड है और ये गेमिंग तकनीक पर फोकस करता है. शाओमी का ये फोन जैसे ही भारत में लॉन्च हुआ है ट्विटर पर #BlackShark2 हैशटैग ट्रेंड करने लगा है. भारत में भी PUBG जैसे वीडियो गेम काफी लोकप्रीय हैं और इसी के कारण गेमिंग फोन और गेमिंग लैपटॉप की सेल्स काफी बढ़ गई है, लेकिन क्या ये अच्छी बात है? हाल ही में World Health orgnization की तरफ से एक नई बीमारी के बारे में बताया गया है और इस बीमारी का नाम है 'Gaming Disorder.' इसे आधिकारिक तौर पर मॉर्डन बीमारियों की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

International Classification of Diseases (ICD) की लिस्ट में गेमिंग डिसऑर्डर को शामिल करने का कारण यही था कि आए दिन Gaming Disorder के नए और गंभीर मामले सामने आ रहे हैं.

Xiaomi Black Shark 2 भारतीय मार्केट में इसी डिसऑर्डर के चलते लोकप्रिय हो सकता है. इस फोन को चीन में सबसे पहले लॉन्च किया गया था. Snapdragon 855 SOC के साथ-साथ 6GB और 12GB रैम वेरिएंट गेमिंग के लिए ही दिए गए हैं.

Black Shark 2 के फीचर्स जो Gaming Addiction को ध्यान में रखकर दिए गए हैं-

पिछले साल WHO की लिस्ट में Gaming Addiction शामिल किया गया था जिसे संभावित गंभीर समस्याओं में जोड़ा गया था. जो फीचर्स ब्लैक शार्क 2 में जोड़े गए हैं वो गेमिंग एडिक्ट के लिए ही इस्तेमाल करने वाले हैं. प्रोसेसर और पावर इतनी है कि गेम खेलते समय ये फोन हैंग न हो. Liquid Cool 3.0 तकनीक है जो स्क्रीन और फोन को गर्म होने से बचाती है. ये तकनीक कितनी भी देर गेम खेलने पर भी फोन को ठंडा ही रखती है. इस फोन में 240Hz का टच रिस्पॉन्स रेट है जो गेमिंग के लिए ही जरूरी है क्योंकि यूजर के टच को आम टच स्क्रीन फोन्स से बेहतर समझा जा सकता है. pressure-sensing Magic Press technology इसे हाई रेजोल्यूशन और स्पीड वाले खेलों के लिए उपयुक्त बनाती है जहां हर सेकंड में बदलाव हो सकता है.

Xiaomi Black shark 2, स्मार्टफोन, गेमिंग स्मार्टफोनफोन के सभी फीचर्स एक गेम एडिक्ट को ध्यान में रखकर ही बनाए गए हैं.

गेमिंग एडिक्ट्स के लिए 39,999 रुपए की कीमत में 6GB रैम और 128GB मेमोरी वाला वेरिएंट है और साथ ही साथ 12GB रैम के साथ 256GB मेमोरी वाला वेरिएंट 49,999 रुपए में मिल रहा है. इसका डिजाइन भी कुछ खास नहीं है. ये वैसा ही है जैसा आम गेमिंग फोन्स में आता है. कैमरा और अन्य फीचर्स की बात करें तो 48 मेगापिक्सल का रियर कैमरा 6.39 इंच की फुल एचडी स्क्रीन, कनेक्टिविटी के मामले में 4G VoLTE, Wi-Fi 802.11ac, Bluetooth v5.0, GPS/ A-GPS और USB Type C पोर्ट दिए गए हैं. 4,000mAh पावर की बैटरी है. गेमिंग फोन के हिसाब से नॉर्मल फोन की बैटरी शायद एक समस्या हो सकती है.

फोन के फीचर्स नहीं उसकी समस्या देखनी जरूरी है...

Xiaomi Black Shark 2 एक तरह से देखें तो आकर्षक स्पेसिफिकेशन शीट के साथ अच्छा फोन है, लेकिन अगर बात Gaming Disorder की करें तो ये फोन समस्या को और बढ़ाएगा ही. दुनिया भर के गेमिंग लैपटॉप और स्मार्टफोन सिर्फ इसीलिए बनाए गए हैं ताकि गेमर्स को कोई समस्या न हो. पर क्या गेमिंग को आसान करना समस्या बढ़ाना नहीं है?

Gaming Disorder को Mental Illness करार दिया गया है. और ये कितना घातक हो सकता है इसकी कोई हद नहीं. एक गेमर James Good ने संसद में बैठकर ये कहा था कि बिना खाए-पिए-सोए वो 32 घंटों तक गेम खेल जाते थे और वो अपने साथ बहुत नाइंसाफी करते थे. मलेशिया के एक आदमी ने सिर्फ PUBG के लिए अपने बीवी बच्चों को छोड़ दिया क्योंकि वो बीवी खेल खेलने को मना करती थी.

गेम किस तरह का दुष्प्रभाव छोड़ते हैं वो ये वीडियो बता सकता है.

गेम एडिक्ट न सिर्फ अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता है बल्कि ऐसे कई लोग होते हैं जिनपर गेमिंग का खतरनाक असर पड़ता है. Xiaomi Black Shark 2 की अगर बात की जाए तो ये उसी सिगरेट के पैकेट की तरह है जिसमें लिखा होता है कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है फिर भी लोग उसे खरीदते हैं.

अगर इसे एक डिवाइस के तौर पर देखा जाए तो ये बेहद आकर्षक लगेगा. तकनीक का एक और बेहतरीन तोहफा, गेमिंग लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, गेमिंग मशीन और भारतीय गेमिंग इंडस्ट्री जो 890 मिलियन डॉलर की बन गई है. ये 14% की ग्रोथ के साथ बढ़ती ही जा रही है और Black Shark जैसे डिवाइस इस इंडस्ट्री को और बढ़ा ही रहे हैं.

Xiaomi Black shark 2, स्मार्टफोन, गेमिंग स्मार्टफोनएक गेमिंग एडिक्ट के लिए निजी जिंदगी से ज्यादा जरूरी उसका गेम हो जाता है.

ऐसा नहीं है कि डिवाइस में कोई खराबी है लेकिन खराबी लोगों के एडिक्शन में है. डिवाइस बेचने वाली कंपनियां तो महंगे और बेहतर गेमिंग फीचर्स देकर इस एडिक्शन को बढ़ा ही रही हैं. गेमिंग गैजेट्स का इस्तेमाल सभी गेमर्स करते हैं, लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि रुकना कब है.

यही समस्या WHO द्वारा बताई गई है. गेमिंग एडिक्शन इस कदर बढ़ता चला जा रहा है कि लोग खाना-पीना-सोना-नहाना सब भूलकर सिर्फ गेम खेलने की कोशिश करते हैं. इसे कई फेज में देखा जा सकता है. ऑलाइन, ऑफलाइन सभी तरह की गेमिंग में. शुरुआत धीरे-धीरे होती है, फिर एक आलम ऐसा आ जाता है कि फोन का डिस्चार्ज होना भी बेहद खराब लगता है. निजी जिंदगी को बेहद खराब कर लेते हैं और यही कारण है कि इसे इतना खतरनाक बताया गया है.

कई स्टडी कहती हैं कि गेमिंग डिसऑर्डर मूड पर भी अच्छा खासा असर डालता है. जैसे अगर किसी को Gaming Disorder है तो उसका मूड भी लगातार खराब बना रहेगा. निजी जिंदगी में कुछ अच्छा नहीं लगेगा. Anxiety Disorder होने की भी गुंजाइश है. इसके अलावा, डिप्रेशन और तनाव भी होगा. ऐसी समस्याओं के साथ शारीरिक समस्याएं जैसे मोटापा, डीहाइड्रेशन, कमजोरी, आंखों की समस्याएं भी होंगी क्योंकि इंसान लगातार किसी एक चीज़ पर फोकस कर रहा है इसलिए वो अन्य बातों को नजरअंदाज कर रहा है. Gaming Laptop, Gaming Smartphones इस समस्या को और भी ज्यादा बढ़ाते हैं क्योंकि इनके फीचर्स यूजर को और भी ज्यादा सुविधाजनक तौर पर गेम खेलने वाले फीचर्स देते हैं.

सोचने वाली बात है कि ये समस्या ऐसे लॉन्च से और कितनी बढ़ेगी. इसके असर को कब समझना शुरू किया जाएगा.

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