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Updated: 03 जून, 2019 03:12 PM
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एक स्मार्टफोन की जिंदगी कितनी होती है? 1 साल? 2 साल? या फिर जितना भी आप चलाना चाहें? पर ये निर्भर किसपर करता है? ये सारे सवाल अजीब भले ही लगें क्योंकि लोगों के हिसाब से फोन वो ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी ये गलतफहमी है. असल में कई बार फोन बदलने की जरूरत सिर्फ यूजर के खराब इस्तेमाल से नहीं बल्कि स्मार्टफोन कंपनियों के कारण भी ऐसा होता है. अगर किसी को लग रहा है कि ये सही नहीं है तो एक खबर पर ध्यान दीजिए. Xiaomi ने एक लिस्ट जारी की है जिसमें Redmi सीरीज के कई स्मार्टफोन्स को MIUI अपग्रेड नहीं मिलेगी. इस लिस्ट में पहले 7 फोन थे, लेकिन अब वो 10 हो गए हैं. MIUI 11 अपग्रेड नहीं मिलने का मतलब है कि ये Xiaomi यूजर्स उन फीचर्स से वंचित रहेंगे जिसके कारण शाओमी फोन्स में विज्ञापन हटते हैं और ऐसे ही कई फीचर्स. हालांकि, इन फोन्स में एंड्रॉयड सिक्योरिटी अपग्रेड तो होगी ही (सिर्फ अभी के लिए आगे ये बदल सकता है.) नई अपग्रेड न मिलने का मतलब है कि MIUI बेस्ट एंड्रॉयड 9 Pie अपडेट भी नहीं मिलेगी.

इस लिस्ट में xiaomi Redmi Note 3, Note 4, Redmi 6A, Redmi 6, Redmi 3S, Redmi 3X, Redmi Pro, Redmi 4A, Redmi 4, Redmi Y2 शामिल हैं. अपडेट न मिलने से धीरे-धीरे ये फोन स्लो होने लगेंगे, इनकी परफॉर्मेंस कम हो जाएगी, हैंग होने लगेंगे और फिर यूजर्स को लगेगा कि फोन बदलने का समय आ गया है.

ये सिर्फ Xiaomi या कोई एक कंपनी ही नहीं करती बल्कि ये लगभग हर स्मार्टफोन कंपनी कुछ न कुछ ऐसा करती है. इस बात के लिए सैमसंग और एपल भी बदनाम हैं.

स्मार्टफोन, तकनीक, Xiaomi, Apple, Samsungजान बूझ कर फोन को धीमा करने का तरीका स्मार्टफोन कंपनियां निकालती हैं.

Tim Cook भी मान चुके हैं कि Apple iPhone कंपनी खुद धीमे करती है-

एपल कंपनी ने हमेशा ये कहा है कि उसके आईफोन्स पुराने होने के बाद भी सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने पर सही चलते हैं, लेकिन जब इस बात पर हंगामा मचा कि नए सॉफ्टवेयर अपडेट से आईफोन धीमे हो रहे हैं तब खुद टिम कुक ने ये माना था कि कंपनी जानबूझकर आईफोन्स को धीमा करती है. दिसंबर 2017 में इस बात पर बहस छिड़ गई थी.

कंपनी का तर्क था कि ये एक तरह ही पावर मैनेजमेंट तकनीक है. इस तकनीक से आईफोन की लाइफ थोड़ी बढ़ जाती है. समय के साथ-साथ बैटरी खराब होने लगती है और उसकी रीचार्जिंग की समस्या थोड़ी बढ़ जाती है. बैटरी की अपनी एक रीचार्ज साइकल होती है और एक समय आता है जब वो पूरी तरह से खराब हो जाती है और उसे रीचार्ज नहीं किया जा सकता. इस समस्या से निपटने के लिए एपल कंपनी अपने पुराने स्मार्टफोन्स को धीमा कर देती है. इसके कारण प्रोसेसर की स्पीड को धीमा करना पड़ता है. इससे होता ये है कि आईफोन की लाइफ थोड़ी और बढ़ जाती है क्योंकि बैटरी पर ज्यादा लोड नहीं पड़ता. एक बैटरी 500 बार रीचार्ज होने के बाद ही अपनी 20% पावर खो देती है.

एपल कंपनी के अनुसार ऐसा करने से बैटरी पर प्रेशर नहीं पड़ता और आईफोन क्रैश होने, बिना मतलब शटडाउन होने या फिर पूरी तरह से खराब होने से थोड़ा बच जाता है. एपल का कहना है कि ये तरीका आईफोन 6, 6S, SE और 7 में कारगर रहा है.

इस बारे में पूरा आर्टिकल यहां पढ़ें- तो इसलिए अपने आप धीमे हो रहे हैं iPhones...

Samsung कंपनी पर फोन्स को धीमा करने के लिए लगा है $5.7 मिलियन फाइन..

इटली की एक कंपनी ने एपल की तरह सैमसंग के फोन्स पर भी जांच की थी और ये बात सामने आई थी कि एपल की तरह सैमसंग भी अपने स्मार्टफोन्स की प्रोसेसिंग पावर कम कर देता है. जो स्टडी सैमसंग पर की गई थी उसका नतीजा कहता था कि सैमसंग के फोन्स में अपडेट के बाद बहुत कुछ बदल जाता है. परफॉर्मेंस धीमी हो जाती है. सैमसंग पर इसके लिए फाइन भी लगाया गया था. ये सब एपल के खुलासे के बाद ही हुआ था.

ये दोनों ही कंपनियां अपने फोन्स में अपडेट्स के जरिए यूजर्स के फोन को धीमा कर देती हैं.

Nokia भी अपडेट देना बंद कर देता है...

नोकिया में अपडेट्स मिलनी बंद हो जाती हैं. यही हालत HTC, Huawei, Oppo, Vivo जैसी स्मार्टफोन कंपनियों के साथ भी होती हैं. कई स्मार्टफोन कंपनियां Xiaomi की तरह ही फोन को अपडेट करना बंद कर देती हैं. ऐसे में न सिर्फ फोन का सॉफ्टवेयर धीमा हो जाता है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी ये खतरा होता है. सॉफ्टवेयर अपग्रेड के साथ ही फोन में सिक्योरिटी अपग्रेड भी होते हैं. ऐसे में ये सब बंद होने से फोन स्लो होना या कई एप्स का बंद होना शुरू हो जाता है.

अब ये सोचने वाली बात है कि क्या वाकई सॉफ्टवेयर अपग्रेड लोगों के लिए अच्छे हैं या बुरे?

इसका सीधा सा जवाब है कि बिना सॉफ्टवेयर अपग्रेड के फोन का स्लो होना तय है और अगर अपग्रेड करते हैं तो सिर्फ उसी मामले में फोन धीमा होगा अगर अपडेट में ऐसा कंपनी ने किया है. हां, अपडेट करते समय कुछ ध्यान रखा जा सकता है..

1. फोन अपग्रेड करते समय ध्यान रखें कि फोन के डेटा का बैकअप ले लें. 2. फोन की इंटरनल मेमोरी खाली रखें, उदाहरण के तौर पर अगर फोन में 4 ईमेल अकाउंट हैं, 2000 फोटो हैं, 100 से ज्यादा एप्स हैं तो ऑपरेटिंग सिस्टम वैसे भी स्लो हो ही जाएगा. नए ऑपरेटिंग सिस्टम को खाली फोन में टेस्ट किया गया होगा न कि ऐसे फोन में जिसमें इतना डेटा है. ऐसे में कुछ स्मार्टफोन्स में ऑपरेटिंग सिस्टम अलग तरह से काम करता है और कुछ में अलग. 3. अपग्रेड करने के बाद अगर फोन धीमा हो रहा है तो पहले हैवी एप्स बंद करके देखें कई बार ऐसा होता है कि वो नए फोन सेटअप के साथ ठीक से जेल नहीं हो पाते.

कुल मिलाकर फोन की लाइफ बढ़ाने में यूजर के साथ-साथ कंपनियों का भी हाथ होता है और ये तरीका लगभग हर स्मार्टफोन कंपनी इस्तेमाल करती है. कम से कम जिनकी जांच की गई है उनके साथ तो ऐसा होता दिखता ही है. बहरहाल किसी स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर के साथ-साथ हार्डवेयर की समस्या भी आती है. यकीनन लगातार इस्तेमाल होने से बैटरी लाइफ, चार्जर और सीपीयू का परफॉर्मेंस धीमा हो जाता है, लेकिन उसे और धीमा बनाने में कंपनियों का भी हाथ होता है.

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