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Updated: 17 अप्रिल, 2019 08:35 PM
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जल्द ही भारत में नई कार आने वाली है. बजाज ने छह साल लगाकर अपनी एक चौपहिया गाड़ी ऑटो और कार के बीच में घुसाने की कोशिश की है. इसकी बनावट में उतनी ही 'जबर्दस्‍ती' है, जितनी कि इसके नाम में. गाड़ी को प्‍यारी (cute) दिखाने के लिए इसका नाम दिया गया है Qute. लेकिन इस नाम की स्‍पेलिंग का 'Q' इस प्रोडक्‍ट पर खड़े हो रहे कई सवालों का प्रतिनिधित्‍व कर रहा है. Bajaj Qute गाड़ी को 'बंद ऑटो' रिक्शा कहेंगे तो गलत नहीं होगा. इस गाड़ी को सबसे पहले ऑटो एक्सपो 2012 में पेश किया गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक ये मार्केट में नहीं आ पाई. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि इस गाड़ी को भारतीय सड़कों के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा था. अब आखिरकार 6 साल के लंबे इंतजार के बाद बजाज कानूनी लड़ाई जीत चुका है और ये गाड़ी मार्केट में आने को तैयार है. ये गाड़ी 18 अप्रैल को भारतीय मार्केट में लॉन्च होने वाली है.

क्यों Bajaj Qute भारतीय सड़कों के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती थी?

इतनी लंबी कानूनी लड़ाई के बारे में जानने के बाद लोगों को ये जरूर लगेगा कि आखिर क्यों इस गाड़ी को भारतीय सड़कों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता तो इसका सीधा सा जवाब है क्योंकि इस तरह की गाड़ी का कोई भी सेग्मेंट ही भारतीय मार्केट में नहीं था. क्योंकि ऐसी गाड़ी पहले मार्केट में आई ही नहीं है और इसका टेस्ट हुआ ही नहीं है इसलिए इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना गया था. अब इसे Quadricycle सेग्मेंट में डाला गया है. अब इसकी बिक्री भी हो सकती है और इसे पर्सनल और कमर्शियल दोनों ही तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्या है Quadricycle?

एक ऐसी गाड़ी जो ऑटो और छोटी कार के बीच के गैप को भरती है. सीधे तौर पर मॉडिफाइड ऑटो जिसमें कार जैसी सुविधा मिले. सरकार ने हाल ही में इसको लेकर नए नियम बनाए हैं जो कहते हैं कि quadricycle को तय आकार और रफ्तार का होना होगा. इस सेग्मेंट की गाड़ी में 70 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार नहीं हो सकती. साथ ही, इसकी लंबाई 3000 mm (तीन मीटर), चौड़ाई 1500 mm (डेढ़ मीटर) और ऊंचाई 2500 mm (ढाई मीटर) से ज्‍यादा नहीं हो सकती.

बजाज क्यूट, ऑटोमोबाइल, Bajaj Qute, सोशल मीडियाबजाज क्यूट को हल्का करने के लिए उसके दरवाजे, बोनट और बंपर सब कुछ प्लास्टिक का बनाया गया है.

भारत की पहली quadricycle यानी बजाज क्यूट ये सभी शर्तें पूरी करती है जिसमें 2750 mm लंबाई, 1312 mm चौड़ाई और 1652 mm ऊंचाई है. देखने पर ये पूरी तरह से ऑटो के साइज की दिखेगी.

क्यूट को पहली नजर में देखेंगे तो ये बच्चों की गाड़ी जैसी लगेगी. इसमें न सिर्फ भड़कीले रंग हैं बल्कि बनावट भी बिलकुल वैसी ही है जैसी खिलौने वाली गाड़ियों में होती है. हां, ये रोड पर निकलेगी तो कई लोग इसे पलट कर जरूर देखेंगे. उसे क्यूट कहेंगे या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है.

ऊंची छत, चार पहिए और आधी प्लास्टिक और आधी स्टील की बॉडी लिए क्यूट किसी कार्टून कैरेक्टर की कार की याद दिला देगी. इसकी छत और बाहर की बॉडी मेटल की है, लेकिन दरवाजे और बोनट प्लास्टिक का है और ये खास तौर पर वजन कम रखने के लिए बनाया गया है.

अगर आप सोच रहे हैं कि इसे ऑटो क्यों कहा जा रहा है तो इसके लिए सिर्फ लुक्स जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि डैशबोर्ड में एक स्टोरेज स्पेस है, कोई एयरकंडीशनर नहीं है, स्लाइडिंग खिड़कियां तो हैं, लेकिन सामने और पीछे का बंपर भी प्लास्टिक का है. सीट भी आगे-पीछे नहीं हो सकतीं, सिर्फ ड्राइवर की सीट थोड़ी आगे-पीछे हो सकती है.

खुद बजाज के अधिकारियों ने भी ये माना है कि Bajaj Qute कार नहीं है और न ही ये कार बनने की कोशिश कर रही है, ये तो एक quadricycle है जो शहर के अंदर ही ट्रैवल करने और पास में एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. इसमें लेग स्पेस और स्टोरेज स्पेस में कमी नहीं है.

इसके दो वेरिएंट हैं पेट्रोल और सीएनजी. पेट्रोल वर्जन में 13 बीएचपी (break horse power) की पावर 5500 rpm में मिलती है और 18.9 Nm 4000 rpm में. आसान शब्दों में समझाएं तो 18.9 न्यूटन मीटर (NM) की पावर में ये इंजन 4000 रोटेशन प्रति मिनट की दर से देता है. जो भी गाड़ी ज्यादा पावर कम rpm की दर से पैदा करती है वो एक्सिलरेशन और स्पीड के मामले में बेहतर होती हैं.

सीएनजी वेरिएंट में यही पावर 10 bhp पावर और 16 Nm टॉर्क है. कार की तरह ऑटोमैटिक फंक्शन भी नहीं हैं, हां 5 स्पीड गियरबॉक्स भी है.

कीमत और किफायत के मामले में कैसी है Bajaj Qute?

अब देखिए कार को एक ऑटो की तरह ही डील किया जाए तो बेहतर होगा. एसी की कोई सुविधा नहीं है तो गर्मियों में पूरी बंद गाड़ी में थोड़ी दिक्कत हो सकती है. कीमत एक साधारण ऑटो की तुलना में थोड़ी ज्यादा ही है. बजाज के ही अगर ऑटो की बात करें तो Compact 4S रिक्शा की कीमत दिल्ली में 1.10 लाख है. LPG ऑटो रिक्शा 1.44 लाख, डीजल रिक्शा 2 लाख और सीएनजी 2.13 लाख की कीमत वाला है. जबकि बजाज क्‍यूट के पेट्रोल वेरिएंट की कीमत 2.64 लाख और CNG वेरिएंट की कीमत 2.84 लाख है. पेट्रोल वेरिएंट 35 किलोमीटर प्रति लीटर और CNG वेरिएंट 45 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज देता है.

अब खुद सोचिए कि ये कितनी किफायती है? बजाज क्‍यूट बजाज के ही सबसे महंगे ऑटो से 50 हजार रु. महंगा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि इस गाड़ी को कौन खरीदेगा. पहले बात पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कर लेते हैं. क्‍या कोई ऑटोवाला इस गाड़ी का ग्राहक बन सकता है, जिसकी चाह है कि उसके ऑटो में चार दरवाजे लगे हों? या सस्‍ती कैब का यह विकल्‍प बन सकता है?

दरअसल, बजाज क्‍यूट किसी भी तरह से ऑटो का विकल्‍प नहीं हो सकता है. दो-पांच किमी की दूरी के लिए सस्‍ता विकल्‍प ऑटो ही है, और इससे ज्‍यादा दूरी तय करने के लिए या आराम की खातिर ओला-ऊबर कैब के रूप में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा मौजूद है.

अब Bajaj Qute के प्राइवेट उपयोग की बात कर लेते हैं. क्‍या लोग इसे अपने निजी उपयोग के लिए खरीदेंगे. दरअसल, इस पर संशय खड़ा होता है इस गाड़ी डिजाइन और बाकी फीचर्स के कारण. बजाज ने अपनी इस गाड़ी में ढूंढ-ढूंढ कर नैनो की कमियों को शामिल किया है. नैनो की तरह क्‍यूट का इंजन भी पीछे ही है, जो चलने में काफी आवाज करता है. किसी ऑटो की तरह. ऐसी ही कमजोरी के कारण नैनो की छवि खराब हुई थी. यह गाड़ी दिखने में काफी कुछ ऑटो की तरह है. ऐसे में कार के लिए क्रेजी इस देश में कोई निजी इस्‍तेमाल के लिए महंगा ऑटो क्‍यों लेगा?

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