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Updated: 17 अगस्त, 2015 02:00 PM
सूरज पांडेय
सूरज पांडेय
  @dabanggchulbul
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आजादी के 68 साल के बाद, आज हमारा देश हर क्षेत्र में लगातार ग्रोथ कर रहा है. चाहे शिक्षा हो या साइन्स या इकॉनमी. लेकिन खेल के मैदान में हमारी नाव डगमगाती ही रही है, ओलंपिक हो या कॉमनवेल्थ हमारी मेडल्स टैली बहुत प्रशंसनीय नहीं रही है. हम फीफा अंडर 17 वर्ल्ड कप होस्ट करने वाले हैं पर हमारी फुटबॉल टीम की रैंकिंग 147 है. जिस हॉकी के हम सरताज हुआ करते थे आज वहां भी हम 9 नंबर पर खिसक गए हैं. आइए जानते हैं कि आखिर क्या हैं इस हालात को सुधारने के उपाय.

खेल से राजनीति को हटाना
भारत में हर खेल ऑर्गनाइजेशन में महत्वपूर्ण पदों पर पॉलिटिकल लीडर्स बैठे हुए हैं जिनकी खेल की समझ बिल्कुल जीरो है. उनको सिर्फ अपनी जेबें भरने से मतलब है, खिलाड़ियों को कोई सुविधा उपलब्ध कराने में उनकी खास दिलचस्पी नहीं रहती. अगर इन ऑर्गनाइजेशन्स में राजनेताओं की जगह पूर्व खिलाड़ियों को रखें तो हर खेल की स्थिति में सुधार होगा. क्योंकि एक खिलाड़ी की मानसिकता और जरूरतों को उस दौर से गुजर चुका या उससे लगाव रखने वाला व्यक्ति ही बेहतर समझ सकता है.

ग्राउंड लेवल से ट्रेनिंग की व्यवस्था
चाहे चीन हो, ऑस्ट्रेलिया हो या अमेरिका इन सभी देशों में ग्राउंड लेवल से बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है. वहां प्रॉपर एकेडेमीज बनाई गई हैं. लेकिन हमारे देश में टैलेंटेड खिलाड़ियों को ना सही ट्रेनिंग मिलती है ना ही अपने यहां ढंग की एकेडेमीज हैं. अगर देश के हर कोने में विशेष एकेडमियां बनाई जाएं जहां ग्राउंड लेवल से बच्चों को प्रॉपर ट्रेनिंग दी जाए तो निश्चित ही हालात सुधरेंगे. संभवत: स्कूलों में ऐसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं जिससे बच्चे खेल को करियर के रूप में लेने की सोचें.

तकनीक का बेहतर प्रयोग
अब हर खेल में टेक्नोलॉजी की दखलंदाजी काफी बढ़ गई है. क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी हर खेल में आज ज़रूरत ऐसी कोचिंग की है जिसमें तकनीक का बेहतर प्रयोग हो. हर खेल से जुड़ी टेक्नोलॉजी हमारे खिलाड़ियों और कोचों को उपलब्ध कराई जाए. यूरोपीय देशों में टेक्निकल ट्रेनिंग पर बहुत ज्यादा प्रेशर दिया जाता है. जिसके दम पर वो देश आज हर खेल में चैम्पियन हैं. इसके साथ ही कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग जैसे खेलों के लिए उचित टर्फ की भी व्यवस्था होनी चाहिए.

स्पोर्ट्स बजट का सदुपयोग
स्पोर्ट्स बजट के नाम पर जो पैसा सरकार हर साल देती है उससे यूथ एकेडमी बनाने के साथ ही देश के विभिन्न कोनों से छिपे टैलेंट को ढूंढने और तराशने में लगाया जाए तो निश्चित रूप से हमारी स्थिति सुधरेगी. भारत सरकार को खेल बजट में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए क्योंकि बेहतरीन खिलाड़ियों के निर्माण के लिए जिन सुविधाओं की ज़रूरत है. उनको पाने के लिए ज्यादा पैसा चाहिए. खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें बेहतर सुविधाएं देनी ही होंगी. देश के युवा खिलाड़ियों को बेहतर फॉरेन खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलना चाहिए ताकि वो अपने खेल को और बेहतर कर सकें.

पासपोर्ट संबंधी नियमों में ढील
विदेशी पासपोर्ट धारी भारतीय मूल के खिलाड़ियों को भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिलता है. जबकि अन्य देशों में ऐसा नहीं है उनके नक्शे कदम पर चलते हुए हमारे भी नियमों में संशोधन होना चाहिए. इससे हर खेल में उन अच्छे खिलाड़ियों को भारत की तरफ से खेलने का मौका मिलेगा जो हमें बहुत कुछ जीतने में मदद कर सकते हैं पर, नियमों के कारण अब तक कर नहीं पाते हैं.

लेखक

सूरज पांडेय सूरज पांडेय @dabanggchulbul

लेखक इंडिया टुडे (डिजिटल) में पत्रकार हैं.

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