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Updated: 16 जनवरी, 2018 12:33 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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ईरानी फिल्‍में देखने का शौक रखने वालों को जफर पनाही की फिल्‍म 'ऑफसाइड' जरूर याद होगी. यह फिल्‍म उस लड़की के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानी पर आधारित थी, जो कि स्‍टेडियम में जाकर फुटबॉल मैच देखना चाहती है. इस्‍लामी कानूनों के हवाले से ईरान में महिलाओं का स्‍टेडियम में मैच देखना प्रतिबंधित है. 2006 में आई इस फिल्‍म ने ईरान की सरकार को हिला कर रख दिया था. फिल्‍म पर ईरान में तो प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन इसे दुनिया में खूब प्रशंसा मिली. अब 'ऑफसाइड' की कहानी ईरान में ट्रेंड बनने जा रही है. नकली दाढ़ी-मूंछ लगाए महिलाएं स्‍टेडियम में सेल्‍फी ले रही हैं.

फुटबॉल, महिला, ईरान, कट्टरपंथ    ईरान की महिलाओं का नकली दाढ़ी मूंछ लगाकर स्टेडियम आना अपने आप में सरकार पर कई बड़े सवाल खड़े करता है

जी हां बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप. द ऑब्जर्वर्स की एक रिपोर्ट से खलबली मच गयी है. रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर ज़हरा नाम की एक महिला ने अपनी कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. ध्यान रहे कि तस्वीरों में ज़हरा आदमियों के भेष में है और एक फुटबॉल स्टेडियम में है जहां स्टेडियम में घुसने और सिक्योरिटी की नजर से बचने के लिए उसने नकली दाढ़ी-मूछों और भौंहों का इस्तेमाल किया. तस्वीर में ज़हरा की शक्ल साफ बता रही है कि उसने अपनी पहचान छुपाने के लिए और पुरुषों जैसे फीचर हासिल करने के लिए मेकअप का भी भरपूर इस्तेमाल किया है.

ईरान की स्थानीय मीडिया के अनुसार ये तस्वीर बीते 29 दिसम्बर की है जो राजधानी तेहरान में लीं गयी हैं. ईरान की स्थानीय मीडिया के मुताबिक ज़हरा स्टेडियम में पर्सेपोलिस एफसी टीम का मैच देखने आई थी जिसकी वो बहुत बड़ी फैन हैं. एक खेलप्रेमी ज़हरा द्वारा किये गए इस दुस्साहसिक प्रयास के बाद, ईरान में एक नई बहस छिड़ गयी है जिसमें इस बात का जिक्र किया जा रहा है कि क्या एक मुस्लिम देश में महिलाओं को पुरुषों के इस खेल को देखने की खुली छूट दे देनी चाहिए?

गौरतलब है कि अब तक ईरान में फुटबॉल जैसे खेल में महिलाओं को दूर रखा जाता था और महिलाओं को इस खेल को देखने की मनाही थी. इसके अलावा ईरान में यदि कोई महिला फुटबॉल खेलते या देखते पाई गयी तो उसके विरुद्ध प्रशासन द्वारा कठोर कार्यवाही की जाती थी. ज्ञात हो कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब ईरान जैसे देश में किसी महिला ने इस तरह की तस्वीर सोशल मीडिया पर आई है. पूर्व में एक अन्य महिला शबनम ने भी मैच देखने के लिए ऐसा ही पैंतरा आजमाया था जिसमें उसने नकली दाढ़ी की जगह पेंट के माध्यम से अपने चेहरे पर दाढ़ी बनाई थी और सुरक्षा कर्मियों को ठगने का प्रयास किया था.

फुटबॉल, महिला, ईरान, कट्टरपंथ    एक बार फिर से ईरान में बगावत का बिगुल बज चुका है और जनता सड़कों पर है

तो क्या ईरान बगावत पर आमादा है ?

ये पूरा प्रकरण ये बताने के लिए काफी है कि ईरान बदलाव चाह रहा है. देश के नागरिकों विशेषकर महिलाओं के बीच ये मान्यता बहुत तेजी से प्रचारित कराई जा रही है कि सरकार अपने कट्टरपंथ को उनपर थोप रही है और उनके मूल अधिकारों का हनन कर रही है. ईरान अपनी शासन प्रणाली से कितना ऊब चुका है यदि हमें इस बात को समझना हो तो हमें ज्यादा दूर जाने की आवश्यकता नहीं है. हम ईरान में चल रहे विद्रोह पर एक नजर डाल सकते हैं जहां राजधानी तेहरान समेत खुम, मशहद जैसी जगहों पर आम जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर है और अपनी आजादी की मांग कर रही है.

ईरान में महिलाओं की स्थिति बद से बदतर है

बात अगर नाराजगी की हो तो जो ईरान में अपनी सरकार से सबसे ज्यादा खफा हैं वो वहां की महिलाएं हैं.इन दिनों सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर कई ऐसे वीडियो दिख रहे हैं जिसमें ईरान की महिलाएं अपना हिजाब उतार कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कर रही हैं. आपको बताते चलें कि अब तक ईरान में, हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को सरकार द्वारा दंडित किया जाता रहा है.

फुटबॉल, महिला, ईरान, कट्टरपंथ    आम ईरानी अपनी जीवनशैली में सरकार की दखलंदाजी से त्रस्त हो चुका है

कहीं ईरान एक बड़े बदलाव की तरफ तो नहीं जा रहा ?

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ट्विटर पर जो तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं उनको देखकर एक बात तो साफ है कि ईरान के लोग कट्टर इस्लामिक शासन के तौर-तरीकों से त्रस्त हैं. वो उस आजादी और खुलेपन की मांग कर रहे हैं जो उन्हें शाह ईरान के समय में हासिल थी. जनता का ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता सैयद अली खामनायी समेत अन्य मौलानाओं की नीतियों के खिलाफ आना इस बात की ओर साफ तौर से इशारा कर रहा है कि आने वाले वक़्त में ईरान एक बहुत बड़े बदलाव को अनुभव करेगा.

एक ऐसा बदलाव जिसमें देश की जनता को कट्टरपंथ से आजादी मिलेगी. जिसके बाद देश के महिला पुरुष खुल के और बिना किसी डर के, आसानी से फुटबॉल देख पाएंगे और फुटबॉल के चलते वहां की महिलाओं को नकली दाढ़ी मूंछ लगा के स्टेडियम का रुख नहीं करना पड़ेगा.

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बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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