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Updated: 24 मार्च, 2022 08:36 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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कोरियन भाषा में एक गाना है जिसका अंग्रेजी अनुवाद है, i am drunk in you...मतलब मैं तुम्हारे नशे में हूं. आप सोच रहे होंगे कि ठीक है गाना ही तो है, इसमें क्या बड़ी बात है? भला इस गाने का बस में बीयर (beer) पीती स्कूल की छात्राओं (school girls) से क्या ताल्लुक है? असल में इस गाने में कहा जा रहा है कि मैं शराब नहीं पीती. तुम ही मेरे टकीला हो, तुम ही मेरे वाइन हो, तुम ही मेरे शैंपेन हो...इस तरह शराब के कई ब्रांड के नामों का इस्तेमाल किया है. यह गाना दुनिया भर के स्कूली बच्चों और टीनएजर के बीच काफी प्रसिद्ध है.

Tamil Nadu bus, school students drinking alcohol, video viralएक का कहना है कि लड़कियों को इतनी आजादी मिलेगी तो वे शराब ही तो पिएंगी ही

दरअसल, तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में स्कूली छात्रों ने चलती बस में शराब पी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आप सोच रहे होंगे कि ऐसी खबरें तो आती रहती हैं लेकिन नहीं, यह मालमा इसलिए नजरों में ज्यादा आ रहा है क्योंकि शराब पीने वालों में लड़कियां भी शामिल हैं. माना जा रहा है कि इनमें से ही किसी ने सोशल मीडिया पर इस क्लिप को सोशल मीडिया पर अपलोड किया है. इस वीडियो में लड़के और लड़कियों के समूह को बीयर की बोतल खोलते और पीते हुए देखा जा सकता है. वे बीयर पीते हुए चिल्ला रहे हैं, लड़कियों की आवाज काफी तेज आ रही है.

जानकारी के अनुसार, सभी चेंगलपट्टू के एक सरकारी स्कूल के बताए जा रहे हैं. अब शराब पीना लड़का और लड़की दोनों के लिए ही हानिकारक है. ऊपर से स्कूली बच्चे जब छोटी उम्र में शराब पीना शुरु कर दें तो उनके भविष्य का आप अंदाजा लगा सकते हैं. लेकिन लोगों ने इस वीडियो में शायद सिर्फ लड़कियों को ही देखा, माने लड़की होकर शराब पीती है, माता पिता ने संस्कार दिया ही नहीं? ये भी तो सोचिए कि इन स्कूली बच्चों को बीयर मिला कहां से?

दखिए लोगों ने क्या-क्या ऐतराज जताया है?

एक ने यह वीडियो देखने के बाद लिखा है कि, यह एक अनैतिक ईसाई सरकार है, इसलिए यहां सब कुछ संभव है. आज ये शराब पी रही हैं, कल वे चलती बस में या सड़कों पर रेव पार्टियों का आयोजन करवाएंगे. जब माता-पिता के पास ही नैतिक मूल्य नहीं है हैं तो वे बच्चे नैतिकता कहां से सीखेंगे? कौन से ऐसे माता-पिता हैं जो यह चाहेंगे कि स्कूल में पढ़ने वाली उनकी बेटी शराब पीए.

एक का कहना है कि लड़कियों को इतनी आजादी मिलेगी तो वे शराब ही तो पिएंगी, गलती तो मां-बाप की ही है. एक ने लिखा है कि बच्चे बड़ों से सीखते हैं. यह बहुत गलत है, लेकिन लड़कियों को इतनी छूट मिल गई है कि इन्हें शराब न पीने के लिए मनाना मुश्किल है. एक का कहना है कि इन लड़कियों को स्कूल से बाहर निकाल देना चाहिए. वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है कि लड़कियों को आजादी मिल गई है, हिजाब नहीं होना चाहिए, शराब होना चाहिए. इन लड़कियों को किसी ने संस्कार सिखाया ही नहीं होगा. लड़कों को कॉपी करेंगी तो यही होगा. दूसरे ने लिखा है ये है हमारे भविष्य की पत्नी और मां, कल्पना करो ये किसी के घर जाकर क्या करेंगी?

तमिलनाडु में शराब का सरकारी हित और नेताओं का निजी फायदा, बच्चों की परवाह कोई क्यों करे?

वैसे लोगों ने तमिलनाडु में स्कूलों और धर्मस्थलों के पास शराब की सरकारी खुदरा दुकानों के खोले जाने का विरोध कर चुके हैं. लोगों ने शराबबंदी के मुद्दे को कई बार उठाया है लेकिन जब आप स्कूल के पास शराब का ठेहा खोल देंगे तो बच्चों पर असर हो होगा ही. वैसे एक सर्वे यह बताता है कि, भारत के कुल शराब सेवन का 17% हिस्सा तो तमिलनाडु में ही खपत हो जाता है.

तमिलनाडु के लिए शराब अभिशाप बन गया लेकिन राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए इस मुद्दे पर खामोश रहीं. कई बीमारियों पर चर्चा की गई लेकिन शराब के खिलाफ कोई सख्त फैसला न लिया गया. शराब वितरण पर अपने एकाधिकार के जरिए सरकार अधिक से अधिक रेवेन्यू अर्जित करती है.

2010 में, DMK के नेतृत्व वाली सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एस जगतराचगन के परिवार के सदस्यों को शराब बिक्री की मंजूरी दी. राज्य के भीतर एकाधिकार इतना अधिक हो गया है कि बड़े-बड़े भट्टे के खिलाड़ी भी या तो बाजार से दूर हो गए हैं या हार मान कर निकल गए. सरकार का काम मजह इतना ही है कि वे शराब पीना स्वास्थ के लिए हानिकारक है टैगलाइन बोलते रहें और अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए इसे बेचते रहें. 

दरअसल, सरकार यह तय कर रही थी कि लोग क्या पी सकते हैं और क्या पीना चाहिए, जिसका झुकाव स्थानीय स्वामित्व वाले आपूर्तिकर्ताओं की ओर था. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, शराब के मुखिया कहे जाने वाले प्रत्येक स्थानीय किसी न किसी तरह से बड़ी पार्टियों के नेताओं से जुड़े थे. यहां सरकार ने, सिर्फ शरबा से होने वाले अपने मुनाफे को देखा, लोगों कि जिंदगियों को नहीं.

आप सोचिए, जब तमिलनाडु के एक प्रसिद्ध नेता के परिजन की तस्वीर सोशल मीडिया पर शराब पीते वायरल होगी तो वहां के बच्चों पर क्या असर होगा? तमिलनाडु में सरकार कोई भी रहे, अपने फायदे के लिए सबने शराब के नाम पर चुप्पी ही साधी. आज नजीता आपके सामने हैं. शराब पीना किसी के लिए भी हानिकारक है, लेकिन असंस्कारी सिर्फ लड़कियां हैं, लड़के नहीं? एक बात और हम '4 बोतल वोडका, काम मेरा रोज का'...जैसे गानों को कैसे भूल सकते हैं? बच्चे तो इन्हीं गानों को दिनभर सुनते रहते हैं फिर किसे दोष दिया जाए?

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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