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Updated: 03 अक्टूबर, 2021 09:00 PM
अनु रॉय
अनु रॉय
  @anu.roy.31
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24 साल के अरबाज़ को नहीं पता था कि प्यार करने की सज़ा मौत होगी. उसने तो सोचा था कि प्यार किया है, साथ रहेंगे सदा लेकिन ये समाज प्यार से ऊपर जाति और धर्म को मानता है. उधर बेटी, बेटी नहीं इज़्ज़त होती है बाप और ख़ानदान की. बेटी अगर अपने धर्म के लड़के से शादी न करे तो बाप की नाक कट जाती है इसलिए बाप बेटी के प्रेमी को मार डालता है. मौक़ा मिलते ही. बेटी या बेटे की ख़ुशी से कहीं बढ़ कर समाज के बनाए नियमों का पालन करना है. इंटर-फ़ेथ रिलेशनशीप इस देश में गुनाह है लेकिन फिर भी दिल है कि समझने को तैयार ही नहीं होता. ख़ैर.

अरबाज़ के साथ भी यही हुआ. वो दो साल से किसी हिंदू लड़की के साथ रिलेशनशीप में था. लड़की के घरवालों को पता चला तो उन्होंने अरबाज़ को पहले धमकाया. इस पर अरबाज़ की मां नजीमा ने अपने बेटे को समझाया और मां-बेटे ने घर बदल लिया. अरबाज़ ने अपना पुराना सिम लड़की के घरवालों के सामने तोड़ कर फेंक दिया. अपने फ़ोन से लड़की की सभी तस्वीरें भी डिलीट कर दीं.

Murder, Muslim, Boy, Love, Relationship, Hindu, Love Jihadअरबाज के साथ जो हुआ है उसपर हिंदू मुस्लिम से परे हटकर सोचने की जरूरत है

अरबाज़ की मां अपने बेटे को सुरक्षित रखने के लिए हर कदम उठा रही थीं. अरबाज़ भी लड़की से मिलना बंद कर दिया था लेकिन 28 दिसंबर की शाम जब अरबाज़ घर पर अकेला था तो उसे लड़की के घर वाले उठा ले गए और उसकी हत्या कर रेलवे ट्रैक पर फेंक आये.

अरबाज़ अपनी मां का एकलौता बेटा था. अरबाज़ के अब्बू तीन साल पहले इस दुनिया को छोड़ कर जा चुके हैं. पूरी स्टोरी आप आज के Indian Express के पहले पन्ने पर पढ़ सकते हैं. सिर्फ़ इसलिए कि अरबाज़ मुस्लिम था अगर आप उसकी हत्या पर अफ़सोस ज़ाहिर नहीं कर रहें और ग़लत को ग़लत कहने की हिम्मत नहीं कर रहें तो यक़ीन मानिए कल को जब आपके साथ ग़लत होगा तब आप भी अकेले होंगे.

दुनिया में किसी को भी हक़ नहीं है कि प्यार के बदले आप जान ले लो किसी की. ये अमानवीय है. अरबाज़ तुम्हें जन्नत नसीब हो. मैं शर्मिंदा हूं इस सबके लिए एक इंसान के तौर पर. Sorry!

नोट - हिंदू लड़की की हत्यायों का ज़िक्र यहां पर मत कीजिएगा क्योंकि उनके लिए भी लिखा जाता रहा है. ग़लत को ग़लत कहना सीखिए. अगर किसी हिंदू लड़की/लड़के की हत्या की जाती है लव-जिहाद के नाम पर इसलिए अरबाज़ की हत्या को आप सही साबित करने आएंगे तो, क्षमा कीजिएगा मैं आपको इंसान नहीं समझ पाउंगी. जान लेना सिर्फ़ जान लेना होता है और वो आपको हत्यारा ही बनाता है.

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लेखक

अनु रॉय अनु रॉय @anu.roy.31

लेखक स्वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं, और महिला-बाल अधिकारों के लिए काम करती हैं.

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