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Updated: 24 जनवरी, 2018 02:00 PM
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प्रग्नेंसी को लेकर जितने नियम-कायदे हिंदुस्तान में बताए जाते हैं उतने तो शायद ही किसी देश में होते हों. जितने रिवाज हैं शायद उतनी ही तरह की सलाह भी दी जाती है. प्रेग्नेंसी के समय हिंदुस्तानी महिलाओं को चिड़चिड़ाने या गुस्सा करने की इजाजत नहीं होती क्योंकि ये महिलाओं को शोभा नहीं देता. यहां बात किसी आम घरेलू परिवार की हो रही है जहां महिलाएं अपने सास-ससुर और देवर-ननंद के साथ रहती हैं. उन्हें अगर गुस्सा आए या फिर अगर रोने का मन करे तो वो किसी के सामने नहीं दिखा सकती ये, क्योंकि आखिर संस्कार आड़े आ जाते हैं.

कई बार तो महिलाओं को ऐसे समय में लगता है कि वो पागल ही हो जाएंगी. लेकिन फिर भी एक आम घारणा है कि बच्चा होने के पहले नहीं बल्कि बच्चा होने के बाद महिलाओं को ज्यादा तकलीफ होती है. लेकिन इस आम धारणा को एक रिसर्च पूरी तरह से नकारती है.

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अक्सर लोगों को ये लगता है कि प्रेग्नेंसी की सबसे बड़ी समस्या पोस्ट पैट्रम डिप्रेशन है. यानि बच्चा होने के बाद का समय जब महिलाओं को बच्चे अच्छे नहीं लगते, उनकी देखभाल करना एक बड़ा काम लगता है और यही कारण है कि नई-नई बनी माएं डिप्रेशन में चली जाती हैं.

लेकिन बीबीसी के अनुसार एक यूके आधारित स्टडी कहती है कि 25% महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान मानसिक समस्याओं से गुजरती हैं. इसमें व्याकुलता, घबराहट, चिंता, डिप्रेशन, खाने-पीने की समस्याएं और बायपोलर डिसऑडर भी शामिल हैं.

रिसर्च के मुताबिक 22% प्रेग्नेंट महिलाएं घबराहट और चिंता की शिकार हो जाती हैं. एक सायकोलॉजिस्ट के अनुसार उन्हें लगता था कि उनके पास सबसे ज्यादा पोस्ट पैट्रम डिप्रेशन के मरीज आएंगे, लेकिन असल में ज्यादातर प्रीनैटल (बच्चा पैदा होने के पहले का समय) डिप्रेशन के मरीज ज्यादा होते हैं.

रिसर्च में क्या बातें सामने आईं..

  1. प्रीनैटल चिंता या घबराहट (Anxiety), बहुत आसानी से डिप्रेशन में बदल सकता है, हालांकि ये अकेले भी काफी नुकसानदेह है.
  2. Anxiety की मरीज लगभद 60% प्रेग्नेंट महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं.
  3. चिंता, गुस्सा, चिड़चिड़ाहट, दुख कोई भी लक्षण उनमें दिख सकता है.
  4. रिसर्च के मुताबिक Anxiety आगे चलकर हायपर टेंशन या स्ट्रेस में बदल जाती है. हां, ये दोनों अलग होते हैं और किस हद तक इंसान परेशान है वो इसकी परिभाषा पर निर्भर करता है.
  5. इस तरह का मरीज कभी भी अपना आपा खो सकता है, किसी छोटी सी चीज़ पर भी बहुत ज्यादा रिएक्ट कर सकता है.
  6. प्रीनैटल डिप्रेशन के मरीजों को अक्सर पोस्ट पैट्रम डिप्रेशन भी होता है.

ये भी हो सकते हैं लक्ष्ण..

  1. मुंह सूखने लगेगा.
  2. सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.
  3. कंपकपी होने लगेगी.
  4. छोटी-छोटी बातों का डर लगा रहेगा और बहुत ज्यादा सोचने की आदत बन जाएगी.
  5. बिना किसी कारण गुस्सा आएगा, दुख होगा, चिंता होगी.

कई बार लोग ये सोचते हैं कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं को फिजिकल समस्या बहुत होती है, लेकिन असलियत देखें तो फिजिकल के साथ-साथ मेंटल समस्याएं ज्यादा होती हैं. ये बहुत आम है और इसके लिए हाय-तौबा मचाने से बेहतर है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं से बात की जाए और उनकी समस्या को समझा जाए.

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