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Updated: 10 जून, 2019 01:49 PM
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साल 2018 की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं थी. एक बार फिर कुछ दरिंदों ने इंसानियत को शर्मसार किया था. जम्मू कश्मीर के कठुआ (kathua) में एक आठ साल की बच्ची का gangrape और हत्या की गई थी. एक छोटी सी बच्ची के साथ की गई दरिंदगी ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. हर तरफ नाबालिग बच्ची के लिए इंसाफ मांगा जा रहा था. ठीक उसी तरह जैसे आज Aligarh की ढ़ाई साल की ट्विंकल शर्मा की निर्मम हत्या के लिए इंसाफ की मांग की जा रही है.

कठुआ मामले में कुल 8 आरोपी थे जिनमें एक नाबालिग है उसका केस दूसरी अदालत में चल रहा है. इसके अलावा 7 मुख्य आरोपियों पर सुनवाई करते हुए पठानकोट की अदालत ने 6 को दोषी करार दिया है. kathua rape and murder case verdict- आरोपियों में मुख्य आरोपी और घटना का मास्टर माइंड ग्राम प्रधान सांजी राम, पुलिस ऑफिसर दीपक खजुरिया, पुलिस ऑफिसर सुरेंद्र कुमार, रसाना गांव निवासी परवेश कुमार, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, हेड कांस्टेबल तिलक राज को दोषी करार दिया गया है. लेकिन विशाल को बरी कर दिया गया है. विशाल सांजी राम का बेटा है. विशाल ने दलील दी थी कि वो उस वक्त मेरठ में था कठुआ में था ही नहीं.

kathua verdictकठुआ मामले को सांप्रदायिक रंग दिया गया जिसपर खूब प्रदर्शन हुई थे

अदालत को छावनी में तब्दील कर दिया गया

इस केस को rarest of the rare केस माना गया है. उस लिहाज से ये मामला जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है. इस मामले की सुनवाई जहां की गई उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा. इस दोषी आरोपियो को सजा भी आज ही सुना दी जाएगी. ये मामला काफी गंभीर है, जिसपर न सिर्फ लोग सड़क पर उतर आए थे बल्कि इसे सांप्रदायिक रंग देने की भी पूरी कोशिश की गई थी. मामले के गंभीरता को देखते हुए पठानकोट कोर्ट में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. एक हज़ार से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद थे, इसके अलावा बम निरोधक दस्ता, दंगा नियंत्रक दस्ता भी यहां पर तैनात किया गया था. क्योंकि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक फैसला आने पर यहां कुछ भी होने की पूरी संभावनाएं जताई जा रही हैं.

कठुआ में जो हुआ उसे सुनकर रूह कांप जाती है

कठुआ रेप की घटना 10 जनवरी, 2018 को हुई थी. परिवार के मुताबिक, बच्ची 10 जनवरी को दोपहर में घर से घोड़ों को चराने के लिए निकली थी और उसके बाद वो घर वापस नहीं लौटी थी. करीब एक हफ्ते बाद 17 जनवरी को जंगल में उस बच्ची की लाश मिली थी. मेडिकल रिपोर्ट में पता चला था कि बच्ची के साथ कई बार कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार हुआ है और पत्थरों से मारकर उसकी हत्या की गई है.

सात दिनों तक लगातार अत्याचार सहने के बावजूद बच्ची मदद के लिए चीख भी नहीं सकी क्योंकि किडनैप किए जाने के थोड़ी ही देर बाद आरोपियों ने बच्ची को भांग खिला दी थी. पुलिस के मुताबिक बच्ची को किडनैप करने वाले मुख्य आरोपी 15 वर्षीय नाबालिग ने बच्ची के मुंह में जबरन भांग ठूंस दी थी, इस दौरान दूसरे आरोपी ने बच्ची के पैरों को दबाए रखा. आरोपियों ने बच्ची को कई दिनों तक मंदिर के अंदर बंधक बनाकर रखा और लगातार उसे नशीली दवाएं खिलाते रहे, जिससे कि पीड़िता अपने साथ हो रहे अत्याचार का विरोध नहीं कर सकी. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने किडनैपिंग के तीसरे दिन 13 जनवरी को पीड़िता की हत्या कर दी थी. हत्या के 3 दिन बाद 16 जनवरी तक बच्ची के शव को मंदिर के अंदर ही रखा गया था.

चार्जशीट में ये भी कहा गया कि जब सभी आरोपी मासूम से बारी-बारी से रेप कर रहे थे, तब नाबालिग ने मेरठ में पढ़ने वाले अपने चचेरे भाई को फोन करके कहा कि अगर वह 'मजा लूटना चाहता' है तो आ जाए. इतना ही नहीं बच्ची को मारने से ठीक पहले एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें कुछ देर के लिए रोका, क्योंकि वह आखिरी बार फिर रेप करना चाहता था. रेप के बाद हत्या कर दी गई और मारने के बाद भी हत्यारों ने मौत को सुनिश्चित करने के लिए बच्ची के सिर पर पत्थर से कई वार किए.

sanji ramग्राम प्रधान और मंदिर के सेवादार सांजी राम ने मंदिर में ही बच्ची के साथ दुष्कर्म किया

इस पूरी घटना का मास्टर माइंड राजस्व विभाग का रिटायर्ड अधिकारी और रासना गांव में मंदिर के सेवादार 62 वर्षीय सांजी राम ने यह पूरी साजिश इसलिए रची थी जिससे बकरवाल समुदाय को इलाके से हटाया जा सके. सांजी राम ने पुलिसकर्मियों को मामला दबाने के लिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत भी दी थी.

अलीगढ़ मामले में भी आ सकता है इसी तरह का फैसला

हालांकि दोनों मामले एक दूसरे से मिलते भी हैं और नहीं भी. कठुआ मामले में नाबालिक के साथ गैंररेप और हत्या की गई थी जबकि अलीगढ़ मामले में बच्ची के साथ रेप की पुष्टी नहीं हुई है, वो सिर्फ हत्या का मामला है. लेकिन दोनों ही मामले में जिस दर्दनाक तरह से नाबालिग बच्चियों की हत्याएं की गई हैं उससे इन दोनों मामलों की गंभीरता बराबर हो जाती है. दोनों मामलों में संप्रदाय भी शामिल हैं, जिसपर राजनीति तब भी गरमाई और अब भी गरमा रही है. kathua case के दोषी तो करार दिए जा चुके हैं, जुर्म के हिसाब से सजा भी होगी. लेकिन ये सजा ऐसी होनी चाहिए जो अलीगढ़ मामले के दोषियों के लिए भी डर का सबब बने.

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