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Updated: 06 जून, 2019 07:53 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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ईद का दिन जब पूरी दुनिया जश्न में डूबी हुई थी तब भारत के ही एक शहर में ऐसी दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा हुआ जिसने दुखी कर दिया. यहां बात हो रही है एक बच्ची ट्विंकल शर्मा की हत्या की. Aligarh Twinkle Sharma Murder case के बारे में अब ट्विटर पर तीन ट्रेंड चल रहे हैं कल से लेकर अब तक में हज़ारों ट्वीट हो चुकी हैं, हज़ारों लोग इस मामले से जुड़कर ट्विटर पर अपनी राय देने में लगे हैं. ट्विंकल शर्मा के साथ जो हुआ वो अव्वल दर्जे की हैवानियत ही थी. एक ढाई साल की बच्ची को बिस्किट देने के लालच में बुलाया गया. उसकी हत्या की गई, उसकी आंखें निकाल ली गईं, उसके शरीर में तेजाब डालकर तीन दिन तक बोरे में भरकर घर में रखा गया, फिर कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया ताकि जानवर उसके शरीर को खा जाएं. ये चंद लाइनें लिखने में दिल भारी हो रहा है तो कल्पना भी नहीं की जा सकती कि ट्विंकल के परिवार का क्या हो रहा होगा. हत्यारे मोहम्मद जाहिद और मोहम्मद असलम बताए जा रहे हैं. पर इस पूरे मामले में जिस तरह का फैसला लोग सुना रहे हैं वो किसी भी हालत में सही नहीं है.

इस मामले को कठुआ गैंग रेप से जोड़ा जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग चीख-पुकार मचा रहे हैं कि आखिर ट्विंकल के लिए इंसाफ कब होगा. चीख पुकार के मामले में कठुआ की बात भी कही जा रही है. मामला जाति और धर्म से भी जुड़ गया है. बॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी गाली दी जा रही है और न जाने किस-किस तरह के ट्वीट मिल जाएंगे. कठुआ रेप कांड और ट्विंकल शर्मा हत्याकांड में कई असमानताएं हैं जो लोगों को नहीं दिख रहीं. उसी के साथ कई ऐसी समानताएं हैं जो लोगों को देखनी चाहिए, लेकिन कोई शायद देख नहीं रहा.

अलीगढ़, अलीगढ़ ट्विंकल शर्मा, ट्विंकल शर्माट्विंकल शर्मा की हत्या अपने साथ कई सवाल लाई है, लेकिन क्या हमारा समाज इतना परिवक्व है कि उन सवालों के जवाब मिल सकें?

कठुआ और अलीगढ़ की असमानताएं देखें तो तस्वीर साफ होगी..

1. एक रेप कांड है और दूसरा हत्या कांड-

यकीनन दोनों ही मामलों में मासूम बच्चियों को अपना निशाना बनाया गया, लेकिन कठुआ गैंगरेप कांड था और अलीगढ़ में हत्याकांड है. लोग ट्विंकल शर्मा के रेप को लेकर ट्वीट कर रहे हैं और दुनिया भर की बातें कह रहे हैं, लेकिन अलीगढ़ पुलिस ने ही ये बात साफ की है और सुबह से वो कई ट्विटर हैंडल पर जाकर ये ट्वीट कर चुकी है कि पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में रेप होने की बात सामने नहीं आई है.

लोग इसे रेप कांड के नाम पर बेच रहे हैं. कठुआ कांड से जोड़ रहे हैं. सेक्युलर, लिबरल, धर्म सभी को कठगहरे में खड़ा किया जा रहा है.

इस तरीके की तस्वीरों से पूरा ट्विटर भरा हुआ है, लेकिन किसी को भी जानकारी नहीं है कि असल में मामला क्या है.

2. कठुआ में लिबरल तो अलीगढ़ में दक्षिणपंथी विरोध..

दो लड़कियों की हत्या हुई, उनके साथ जघन्य काम हुआ, लेकिन दोनों का अंतर देखिए विरोध प्रदर्शन बहुत अलग तरह का हुआ. कठुआ के मामले में लिबरल, सेक्युलर तरह का विरोध था और एक धड़ा ये कह रहा था कि उतने खतरनाक काम को करने वाले आरोपियों को बचाने के लिए भी उतर गया था. अलीगढ़ में विरोध दक्षिणपंथी है. यहां लिबरल लोगों को गालियां दी जा रही हैं. बॉलीवुड को गालियां दी जा रही हैं कि मुस्लिम लड़की के मरने पर विरोध किया था और हिंदू और वो भी ब्राह्मण लड़की के मरने पर नहीं किया गया.

लोग शायद ये भूल गए हैं कि उन्हें विरोध इस जुर्म का करना चाहिए. लोग ये भूल गए हैं कि दोनों ही मामलों में दो लड़कियां मारी गई थीं. दोनों पर अत्याचार हुआ था. यहां तो ये भी भूल गए हैं इंसानियत के नाते ही उन्हें विरोध करना चाहिए. जिस तरह कठुआ मामले में दक्षिणपंथी विरोध की कमी अखर रही थी उसी तरह अलीगढ़ मामले में लिबरल समाज का चुप रहना आंखों में चुभ रहा है.

3. कठुआ में भरपूर राजनीति हुई थी, लेकिन अलीगढ़ में नहीं..

शायद इस मामले की गहराई कोई समझ नहीं रहा है. जैसे कठुआ मामले को भी समझने में लोगों ने देर कर दी थी. धर्म की बातें शुरू होते ही राजनीति शुरू हो जाती है. कठुआ मामले में तो आरोपियों को बचाने के लिए सरकार उतरी थी. हिंदू आरोपियों के बचाव में सभी आ गए थे. अलीगढ़ मामले को भी धर्म से जोड़ा जा रहा है, लेकिन अभी तक राजनीति शुरू नहीं हुई है. चलिए कम से कम यहां तो बच्ची के शव को अखाड़ा नहीं बनाया जा रहा है. और बनाया भी नहीं जाना चाहिए. इस मामले में राजनीति हुई तो शायद दोषियों को सजा मिलते-मिलते काफी समय हो जाए. इस मामले में ऐसा नहीं होना चाहिए. किसी को हक नहीं कि कोई इतनी घिनौनी घटना को राजनीतिक कारणों से अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करे. एक मासूम बच्ची कठुआ में तो धर्म, जाति, राजनीति, हैवानियत की भेंट चढ़ गई और उसके घर वाले अभी भी इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी बच्ची के साथ ऐसा न हो तो शायद देश बदले. कम से कम इस मामले को राजनीतिक गलियारों से दूर रखना चाहिए.

कठुआ और अलीगढ़ मामले में सिर्फ असमानताएं ही नहीं हैं. कई समानताएं भी हैं...

समानताएं और असमानताएं लोग गलत नजरिए से देख रहे हैं. जो समानताएं देखनी चाहिए वो ये हैं..

1. कठुआ और अलीगढ़ दोनों ही मामलों में मासूम लड़कियों को बिना किसी गलती सज़ा दी गई..

कठुआ मामले में हेट क्राइम जिम्मेदार था. बच्ची को उसके परिवार के प्रति नफरत की सज़ा मिली थी. कई लोगों ने मिलकर उसके साथ रेप किया था. कई दिनों तक तड़पाया था फिर बेरहमी से मार डाला था. अलीगढ़ के मामले में 10 हज़ार रुपए के कारण हुए विवाद में लड़की को अगवा कर मार डाला गया. उसके साथ घृणित कर देने वाला जुर्म हुआ. दोनों ही मामलों में विरोध प्रदर्शन हुए, दोनों ही मामलों की सबसे बड़ी समानता ये थी कि परिवार के लिए नफरत बच्ची पर निकाली गई. दोनों ही लड़कियां मासूम थीं. दोनों ही लड़कियों ने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा था. वो इंसान के हैवानी रूप का शिकार हुईं. हमें समानता ये देखनी चाहिए.

2. दोनों ही मामलों में सोशल मीडिया पर गलत फैक्ट फैलाए जा रहे थे..

सोशल मीडिया पर किसी भी गलत बात को फैला देना बहुत आसान है. कठुआ मामले में भी तरह-तरह की बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं. आरोपियों के निर्दोष होने से लेकर मृतक बच्ची के बारे में भी काफी कुछ कहा जा रहा था. वही हाल अलीगढ़ मामले का भी है. बच्ची के बारे में न जाने क्या-क्या फैलाया जा रहा है. केस को जबरन एक तय मोड़ देने के लिए बिना सोचे समझे बहुत कुछ कहा जा रहा है. लेकिन क्या ये सही है?

3. कठुआ और अलीगढ़ दोनों में ही धर्म आड़े आ रहा है

कठुआ केस में मंदिर, हिंदू-मुस्लिम हो रहा था. लोग मंदिर परिसर में रेप और हत्या होने की बात कर रहे थे. अब अलीगढ़ मामले में रमजान-ईद और पंडित लड़की को जोड़ा जा रहा है. ऊपरवाले को आखिर क्यों इस बीच घसीटा जा रहा है? ये इंसानों की गंदी हरकत है. इसे हैवानों से ही जोड़ा जा सकता है.

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Aligarh, Twinkle Sharma, Aligarh Murder Case

लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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