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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   04-12-2017
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दुनिया में कई तरह की सेक्शुएलिटी होती है. अगर किसी को ये लगता है कि सिर्फ मेल, फीमेल और ट्रांसजेंडर ही होते हैं तो ये गलत है. सेक्स के शब्दकोष में कई सारी टर्म्स का पता लगा है जैसे डेमिसेक्शुअल, पैनसेक्शुअल, बाईक्यूरियस हर शब्द का अलग अर्थ और अलग तरह के लोग. इन सबके बीच अब एक नई तरह की सेक्शुएलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है और वो है डिजिसेक्शुअल (Digisexual).

नाम से साफ है .. यहां डिजिटल सेक्स की बात हो रही है. या इसे वर्चुअल सेक्स भी कह सकते हैं. पिछले साल से ही सेक्स डॉल्स का चलन बढ़ गया है. ऐसे में देखें तो ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि आने वाले समय में लाइफ पार्टनर के तौर पर भी सेक्स डॉल को चुना जाने लगे.

डिजिसेक्शुअल

वैसे भी खबरें आने लगी हैं कि अब आने वाले समय में सेक्स डॉल बच्चे पैदा करेंगी. कंपनियां लगातार ये कोशिश कर रही हैं कि अब सेक्स डॉल्स और ज्यादा असली लगें.

पोर्न में 3D..

पोर्नोग्राफी वेबसाइट्स अब अक्सर 3D वीडियो, कार्टून वीडियो परोसने लगी हैं. इसके अलावा, 3Dx चैट अब लोगों को अवतार (कार्टून कैरेक्टर) की तरह एक दूसरे के साथ वर्चुअल सेक्स करने की इजाजत देती हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा, कनाडा में रिसर्चर्स द्वारा पब्लिश की गई एक रिपोर्ट में ये लिखा गया है कि अब साइकोलॉजिस्ट और साइकोथैरिपिस्ट को इस बात के लिए तैयार होना होगा क्योंकि आने वाले समय में उन्हें इस तरह के मरीज उन्हें मिलेंगे.

इस तरह से तो लगता है कि जैसे-जैसे तकनीक का विकास होगा वैसे-वैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को ये अहसास होगा कि वो डिजिसेक्शुअल हैं.

असल की जगह वर्चुअल...

चाहें बात पोर्न वीडियोज की हो, या फिर सेक्स रोबोट्स की आज के समय में वर्चुअल सेक्स असल से ज्यादा आसान हो गया है. जिस तरह की पसंद हो वैसी सामग्री आपके पास मौजूद होगी. एक क्लिक ने डिजिटल सेक्स को काफी लोकप्रिय बना दिया है.

खिलौने के प्रकार...

यहां बच्चों के खेलने वाले खिलौने नहीं बल्कि सेक्स टॉयज की बात हो रही है. वाइब्रेटर से लेकर डिल्डो तक कई ऐसे तरह के सेक्स टॉय अब आसानी से उपलब्ध हैं. वर्चुअल रिएलिटी तो छोड़िए वर्चुअल कैरेक्टर जैसे गेम ऑफ थ्रोन्स के जॉन स्नो और डिनेरिस टार्गेरियन थीम वाले सेक्स टॉय भी उपलब्ध हैं. ऑनलाइन से लेकर किसी व्यस्त मार्केट में मौजूद छिपी हुई दुकान तक ये सभी जगह उपलब्ध हैं. तरह तरह के चरम सुख देने वाले सेक्स टॉय भी एक तरह से वर्चुअल सेक्स को बढ़ावा देने वाले साधन ही हैं. क्योंकि इसके कारण असल पार्टनर की जरूरत खत्म हो रही है.

डिजिसेक्शुअल

Abyss क्रिएश्नस की अल्ट्रा - रिअलिस्टिक सिलिकॉन सेक्स डॉल अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चलती हैं. हार्मनी नाम के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंजन का इस्तेमाल कर वो और रियल होती जा रही हैं. टेक साइट Cnet ने अपने खास प्रोजेक्ट टर्न्ड ऑन में इसी बात का खुलासा किया है.

यानी अब रोबोट्स भी भावनाओं के साथ किसी इंसान के साथ सेक्स करेंगे. शोध बताती है कि क्योंकि लोग सेक्स रोबोट को अपनी जरूरतों और पसंद के अनुसार कस्टमाइज करवाते हैं तो वे इसके साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं और कई बार इसके साथ ऐसे प्रयोग भी कर सकते हैं जो किसी जीते-जागते इंसान के साथ करना मुश्किल हो सकता है.

कई ऐसे उदाहरण भी हैं जहां सेक्स रोबोट से शादी की गई है. सेक्स डॉल ने लोगों में असली पत्नी की जरूरत को खत्म कर दिया है.

अब खुद ही सोचिए ये शब्द डिजिसेक्शुअल आने वाले समय में किस तरह लोगों की जिंदगी में असर डालेगा. एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर पोर्न देखने वाले लोग भी किसी न किसी तरह से डिजिसेक्शुअल होने की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. तो क्या आने वाले समय में वाकई पार्टनर की जरूरत खत्म होने लगेगी? बात तो सोचने वाली है....

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