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Updated: 02 फरवरी, 2019 05:34 PM
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जहां भी बात तलाक की आती है वहां भारतीय समाज में सबकी निगाहें उठ जाती हैं. तलाक को भारतीय समाज में अभी भी एक अपवाद माना जाता है और ये गलत भी नहीं है क्योंकि वाकई दुनिया में सबसे कम शादियां टूटने वाले देशों में से एक भारत भी है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में ऐसा कौन सा देश है जहां सबसे ज्यादा शादियां टूटती हैं? एक फर्म Unified Lawyers की रिपोर्ट के हिसाब से भारत में सिर्फ 1% शादियां टूटती हैं और ये दुनिया के सबसे कम डिवोर्स रेट वाले देशों में से एक है और इसी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूरोपीय देश लक्समबर्ग (Luxembourg) में सबसे ज्यादा शादियां टूटती हैं. लक्समबर्ग में करीब 87% शादियां तलाक में बदल जाती हैं.

एक ऐसा देश जिसकी आबादी 2018 के अनुमान के हिसाब से 602,005 ही है. 2001 की जनगणना में ये आबादी 439,539 थी. जहां इतनी कम आबादी है वहां लगभग हर शादीशुदा इंसान तलाक की ओर बढ़ता है. ये बहुत छोटा देश है और इस देश को दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट वाले देशों की लिस्ट में पांचवे नंबर पर रखा गया है. ये देश 2,586.4 km2 की जगह में फैला हुआ है यानी लक्समबर्ग दिल्ली NCR से भी छोटा है. इतने छोटे देश में आखिर क्या वजह है कि तलाक की दर इतनी ज्यादा है?

छोटा लेकिन विकसित देश-

लक्समबर्ग भले ही यूरोप के सबसे छोटे देशों में से एक है, लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है. पासपोर्ट भी बहुत मजबूत है क्योंकि यहां का पासपोर्ट 186 देशों में वीजा-फ्री या फिर वीजा ऑन अराइवल की सुविधा देता है. ये देश आर्थिक रूप से कमजोर बिलकुल नहीं है और साथ ही साथ टूरिज्म के लिए भी बेहतर है. क्योंकि यहां लोग आर्थिक तौर पर कमजोर नहीं हैं इसलिए 'तलाक के बाद मेरा क्या होगा?' ये वाली मानसिकता का कोई असर नहीं है. दुनिया के टॉप 10 देशों में जो विकसित हैं वहां तलाक की दर भी ज्यादा है. यही हाल लक्समबर्ग का भी है.

तलाक, शादी, जोड़ा, पार्टनर, लक्समबर्गतलाक का एक कारण ये भी है कि इस विकसित देश में महिलाएं आत्मनिर्भर हैं.

भौगोलिक स्थिती का फर्क-

लक्समबर्ग जैसा छोटा देश तीन बड़े यूरोपीय देशों के इर्द-गिर्द स्थित है. जर्मनी, बेल्जियम और फ्रांस. इनमें से दो देश टॉप 10 तलाक करने वाले देशों की लिस्ट में शामिल हैं. United lawyers की इसी रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी में ये दर 44% है और फ्रांस में ये 55% है. जहां तक बेल्जियम का सवाल है तो 2014-15 के पहले तक इस देश में तलाक दर 70% तक थी. अब तो आप समझ ही गए होंगे कि पड़ोसियों का असर छोटे देश लक्समबर्ग में भी पड़ा है.

जनसंख्या में अंतर-

लक्समबर्ग की छोटी आबादी में भी 50.9% वहां के स्थानीय निवासी हैं और अन्य 50% पुर्तगाली, फ्रांसीसी, जर्मन और अन्य देशों के निवासी हैं. expatica.com ने लक्समबर्ग के मामले में एक रिपोर्ट लिखी थी 'Living in Luxembourg: Divorce' इसमें लिखा गया है कि लक्समबर्ग के आधे से ज्यादा तलाक अंतरजातीय जोड़ों या फिर विदेशियों के साथ किए गए विवाह होते हैं. यानी शादियां टूटने का एक कारण अंतरजातीय जोड़ों को भी रखा जा सकता है. कम आबादी वाले देश में विदेशियों से शादी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है.

बढ़ती जनसंख्या और घटती शादियां-

europa.eu ने लक्समबर्ग की शादी और तलाक की समस्या पर एक डिटेल स्टडी की है. इस स्टडी में ये बात सामने आई है कि 2000 में जो क्रूड मैरिज रेट 4.9 शादी प्रति 1000 लोग थी वो 2013 तक घटकर 1.7 शादियां प्रति 1000 हो गई. इतना ही नहीं शादी करने की उम्र भी बढ़ गई. ये बदलाव भी कहीं न कहीं ये दिखाते हैं कि सिंगल रहना लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

कानून जो तलाक के साथ है-

सबसे अहम बात ये भी है कि कानूनी तौर पर लक्समबर्ग में तलाक लेना बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसके तीन तरीके हैं. पहला है आपसी सहमती से लिया जाने वाला तलाक. इसके लिए तलाक लेने वाले जोड़े को 23 साल से ऊपर का होना होगा और साथ ही उन्हें शादी के दो साल बाद तलाक की अर्जी देनी होगी. ये आपसी सहमती से लिए जाने वाले तलाक के नियम हैं. आपसी सहमती से लिए जाने वाले तलाक में बच्चों और प्रॉपर्टी को लेकर फैसले लिए जाते हैं.

लक्समबर्ग में दूसरा तलाक का तरीका है ‘grounds of fault’ (यानी किसी एक पार्टनर की अगर कोई गलती हो तो.) ये अक्सर शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा होता है. इस आधार पर तलाक लेने के लिए सबूत की आवश्यकता होती है. साथ ही, ऐसे केस में शादी का कांट्रेक्ट पूरी तरह से अवैध हो जाता है.

तीसरा है 'Grounds of separation' जहां किसी वजह से पति-पत्नी सालों से साथ नहीं रह रहे जैसे अगर किसी एक को मानसिक बीमारी हो गई है और 5 साल से ज्यादा का समय हो गया है. या फिर 3 साल से अधिक समय से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं.

कुल मिलाकर ये कारण कहीं न कहीं मानसिकता को भी दिखाते हैं कि इस देश में शादी को लेकर खुलापन है और पति और पत्नी अपनी-अपनी इच्छा से अपनी शादी का फैसला ले सकते हैं. वहां महिलाएं भी उतनी ही आजाद हैं जहां पुरुष और यही कारण है कि कोई किसी पर बोझ नहीं बनता.

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