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Updated: 18 मई, 2020 02:04 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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रमज़ान (Ramadan) के लिहाज से आज 19 तारीख हो चुकी है. चांद 29 का रहा तो 23 मई वरना 24 को ईद (Eid ) हो जाएगी. एक ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया के साथ साथ भारत में भी कोरोना वायरस (Coronavirus) ने 70 हज़ार से ऊपर लोगों को बीमार कर रखा हो और 2500 के आस पास लोग मर चुके हों भारतीय मुसलमान (Indian Muslims ) इस बात को लेकर खासे परेशान हैं कि वो अपना सबसे बड़ा त्योहार कैसे मनाएंगे. क्यों कि धर्म भले ही कोई भी हो त्योहारों को लेकर हमेशा ही सबसे ज्यादा उत्साहित बच्चे होते हैं. 2020 की इस ईद में उनके चेहरे पर मायूसी है. बात सरकार की हो तो उसकी तरफ से भी बार बार यही संदेश दिया जा रहा है कि लोग मस्जिदों (Mosque) में न जाएं और अपने अपने घरों में रहें. सरकार की तरफ से आए इस फैसले के बाद भारतीय मुसलमानों का आहत होना स्वाभाविक था. एक तरफ़ भारत के मुसलमान हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ इस्लाम या ये कहें कि मुसलमानों का सबसे बड़ा मरकज़ सऊदी है. सऊदी अरब (Saudi Arab) में ईद का शुमार प्रमुख त्योहारों में होता है. चूंकि किसी अन्य मुल्क की ही तरह सऊदी अरब में भी कोरोना संकट छाया है इसलिए हुकूमत ने जो फैसला लिया है उसने उन कट्टरपंथियों में पेट में मरोड़ पैदा कर दी है जिनकी ज़िंदगी का एकमात्र एजेंडा धर्म की आग पर अपनी रोटी सेंकना था.

Saudi Arab, Ramadan, Eid, India, Coronavirus, Lockdown      कोरोना वायरस के इस दौर में ईद को लेकर जो फैसला सऊदी ने लिया है वो कई मायनों में ऐतिहासिक है

सऊदी अरब ने ईद जैसे प्रमुख त्योहार को दर किनार कर अपना सारा फोकस इंसानों की जिंदगियां बचाने पर रखा है.बता दें कि जनता को त्योहार के मद्देनजर किसी तरह की कोई ढील न देते हुए सऊदी हुकूमत ने 23 मई से 27 मई के बीच कर्फ्यू को जारी रखने का फैसला किया है.

आदेश सऊदी के आंतरिक मंत्रालय की तरफ से है. आदेश में इस बात को साफ कहा गया है कि फिलहाल सऊदी हुकूमत का लक्ष्य जिंदगियां बचाना और लोगों में सोशल डिस्टेंसिंग की भावना का सृजन करना है.

गौरतलब है कि सऊदी में ईद के दौरान 5 दिन का अवकाश रहता था इसलिए माना यही जा रहा था कि सऊदी अपने लोगों को ईद मनाने की इजाजत देगा. लेकिन जिस तरह से उसने ये फैसला लिया है उसने ये साफ बता दिया है कि मुल्क भावना में नहीं बहा और उसने वही किया जो किसी भी महामारी का सामना कर रहे मुल्क को करना चाहिए.

बात अगर वर्तमान की हो तो सऊदी में सभी कमर्शियल और बिज़नेस इंटरप्राइजेज खुले हैं लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच आसानी से वहां जा सकते हैं और अपने काम निपटा सकते हैं. वहीं अगर जिक्र पवित्र शहर मक्का का हो तो यहां पर पूर्ण कर्फ्यू है.

कोरोना के चलते सऊदी में कर्फ्यू लगाया गया मगर क्यों कि रमज़ान था तो सरकार ने जनता को बड़ी राहत देते हुए उन्हें कर्फ्यू में ढील दी. सऊदी हुकूमत बीमारी की गंभीरता को समझती है और यही वो कारण हैं जिसके चलते उन हिस्सों में लॉक डाउन को बरकरार रखा गया जहां बीमारों या ये कहें कि मरीजों की अधिकता थी. ध्यान रहे कि मौजूदा वक्त में सऊदी अरब में कोरोना के कुल 42,925 मामले हैं जबकि 264 लोग इस खौफनाक बीमारी के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं.

बहरहाल सऊदी का ईद जैसे बड़े त्योहार के दौरान कर्फ्यू जारी रखने का ये बड़ा फैसला उन भारतीय मुसलमानों के लिए सबक है जो इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना में जुट गए हैं. आलोचना करते लोगों को समझना चाहिए कि ज़िन्दगी ज़रूरी है अगर आज हम बच गए तो कल ईद भी मन पाएंगे और दिवाली भी इसलिए अपनी सरकार पर भरोसा रखें.

आप भले ही उनकी आलोचना कर रहे हैं मगर देश का नागरिक होने के नाते सरकार आपको एक नजर से देख रही है और आपकी सुरक्षा के लिए हर वो कदम उठा रही है जो जरूरी हैं. सवाल जनता की सुरक्षा है. जैसे सऊदी में सरकार अपने लोगों की सुरक्षा कर रही है वैसे ही प्रयास भारत में भी किये जा रहे हैं.

खैर बात सऊदी अरब की हुई है तो उसका ये फैसला इस लिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि उसने धर्म और आस्था को तवज्जो न देते हुए इंसान और उसकी ज़िन्दगी को महत्त्व दिया है जिसके लिए वो वाक़ई बधाई की पात्र है.      

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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