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Updated: 19 जून, 2022 05:42 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से सेना में भर्ती के लिए 'अग्निपथ' योजना का ऐलान किया है. जिसके बाद से ही देश के कई राज्यों में अग्निपथ योजना के खिलाफ हिंसा और आगजनी के मामले सामने आए हैं. आंदोलनकारियों का प्रदर्शन अभी भी जारी है. हालांकि, मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना को लेकर अपनी ओर से काफी हद तक स्थितियां साफ कर दी है. 4 साल पूरा कर चुके अग्निवीरों को केंद्रीय सुरक्षा बलों से लेकर राज्य की नौकरियों में भी वरीयता मिलेगी. लेकिन, इसके बावजूद अग्निपथ योजना के विरोध में भारत बंद का ऐलान कर दिया गया है. खैर, इस स्थिति में अग्निपथ योजना से जुड़े फायदों पर नजर डालना जरूरी हो जाता है. आइए जानते हैं कि अग्निपथ योजना की उन 10 बातों को जो इसे युवाओं के लिए भरोसेमंद बनाती हैं.

10 things about Agnipath scheme that make it reliable for youthअग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन से पहले इसके बारे में जानकारी कर लेना जरूरी है.

अग्निपथ योजना की भरोसेमंद बातें

1. अग्निपथ योजना को दिवंगत सीडीएस बिपिन रावत ने लाने का फैसला किया था. अब तीनों सेनाओं के प्रमुख अग्निपथ योजना के पक्ष में बात कर रहे हैं. इन सैन्‍य अधिकारियों पर भरोसा न करने का कोई कारण नहीं है. दशकों से अलग-अलग पार्टियों की सरकारों के बावजूद सेना के फैसले तटस्‍थ और देश के समर्थन में ही रहे हैं. जिस योजना का सभी सेना प्रमुख समर्थन कर रहे हो, तो इसे वापस लेने से क्या हासिल हो जाएगा?

2. भारतीय सशस्त्र सेनाएं रोजगार योजना का हिस्सा नही हैं. इन्हें मनरेगा जैसी रोजगार स्‍कीम के रूप में नहीं देखा जा सकता है. असल में भारतीय सेना में सबसे कठिन एंट्री होनी चाहिए. भारतीय सेनाओं में सबसे काबिल और समर्पित लोगों को ही शामिल किया जाना चाहिए. और, चयनित उम्‍मीदवारों को समय-समय पर अलग-अलग कसौटी से गुजारा जाना चाहिए ताकि जो सबसे बेहतर हैं, वही सेना में बने रहें. अगर हमारी सेना को ये महसूस होता है कि इसके लिए कई तरह के मेरिट बेस कॉम्पटीशन होने चाहिए, तो इसे बढ़ावा देना चाहिए.

3. अग्निपथ योजना जैसी रिक्रूटमेंट पॉलिसी कई देशों द्वारा अपनाई जाती है. भारत इस मामले में अपवाद नहीं है. चीन, अमेरिका, रूस, फ्रांस जैसे देशों में ये योजनाएं लागू हैं. इजरायल जैसे देश में नागरिकों को एक बार सेना में जाकर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है. इस नियम से केवल दिव्यांग लोगों को ही छूट मिलती है.

4. पूरी दुनिया में युवा, फिट और सबसे बेहतर जवानों को ही ट्रेनिंग दी जाती है. जो भविष्य में पैदा हो सकने वाले सभी हालातों के लिए पूरी तरह से तैयार हों. क्योंकि, इस पर न केवल उनका बल्कि देश का भविष्य भी टिका हुआ है. यूपीएससी और आईआईटी में भी कई स्तर की चयन प्रक्रिया अपनाई जाती हैं. तो, भारतीय सेना में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है?

5. मेरिट के आधार पर अग्निपथ योजना एक समावेशी स्कीम है. जिसके बाद चार साल की ट्रेनिंग दी जाएगी. ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 11 लाख से ज्यादा रुपये मिलेंगे. इसके साथ ही आपके पास भारतीय सेना में काम करने के लिए कॉम्पटीशन का मौका भी होगा. और, जिन्हें दूसरा मौका नहीं मिल पाएगा, वो एक डिग्री के साथ बाहर आएंगे. उनके पास भी 11 लाख रुपये होंगे. और, देशसेवा का एक प्रमाण पत्र होगा. कई राज्यों ने कहा भी है कि इन अग्निवीरों को राज्य की पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में वरीयता दी जाएगी.

6. जिन्हें लग रहा है कि 75 फीसदी अग्निवीर जो भारतीय सेना में जगह नहीं बना सकेंगे. वह किसी आपराधिक गैंग या आतंकवादी समूहों से जुड़ सकते हैं. तो, ये निहायत ही बेवकूफाना बात है. क्या भारत के लिए ओलंपिक प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनने से नाकाम हुए लोग पत्थरबाजों में शामिल हो जाते हैं? क्या पुलिस की भर्ती में फेल हो जाने वाले अभ्यर्थी गैंगस्टर बन जाते हैं?

7. इस मामले में सबसे अहम ध्यान इस पर भी दिया जाना चाहिए कि देश में मोदी विरोध की एक लहर चल रही है. मोदी सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों के खिलाफ एक वर्ग हमेशा तैयार खड़ा रहता है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो देश में स्वच्छता की ओर एक बड़ा कदम कही जाने वाली शौचालय योजना का मजाक उड़ाते हुए कुछ लोग विरोध कर रहे थे. ऑनलाइन पेमेंट को लेकर तो खुद पी. चिदंबरम ने सवाल खड़े किए थे. जबकि, आज भारत ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के मामले में सबसे आगे है.

8. मोदी सरकार कई अच्छी योजनाएं लाती रही है. हां, किसी योजना में कुछ कमियां हो सकती हैं. लेकिन, उन्हें सुधारा जा सकता है. तो, लोगों को भरोसा करना चाहिए कि अग्निपथ योजना में भी सुधार हो सकते हैं. मोदी सरकार ने इस साल आवेदकों के लिए उम्र सीमा 2 साल बढ़ाकर 23 कर दी है. देखा जाए, तो मोदी सरकार कृषि कानून जैसी कई अच्छी योजनाएं लाई हैं. लेकिन, विपक्ष की ओर से दिए गए समर्थन के बाद भड़की हिंसा और विरोध-प्रदर्शनों के चलते उसे वापस ले लिया गया.

9. अग्निपथ योजना को केवल रोजगार के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए. बल्कि, इसे उन युवाओं की नजर से भी देखना चाहिए, जो किसी मजबूरी के चलते दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर मामूली काम करने लगते हैं. ये योजना उन्‍हें एक नए जीवनस्‍तर की ओर ले जाएगी.

10. जिन्‍हें अग्निपथ योजना नामंजूर है, वे बेशक इसमें शामिल न हों. उन्हें इसमें शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जा रहा है. वे चाहें, तो सेना में होने वाली अन्‍य भर्तियों में जाएं, जहां उनके मनमुताबिक सेवा शर्तें हैं.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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