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Updated: 09 जनवरी, 2020 07:08 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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एक औरत (Women) का मतलब यही है कि वह घर में रहकर खाना बनाएगी और कपड़े धोएगी, जबकि मर्द घर के बाहर के काम करेंगे. कुछ ऐसा ही कहना चाह रहे हैं सोशल मीडिया (Social Media) पर निरमा के विज्ञापन (Nirma Advt) का विरोध कर रहे लोग. पहले अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के विरोध में #ApologizeAkshay ट्रेंड हुआ था और अब निरमा वॉशिंग पाउडर के विरोध में #BoycottNirma ट्रेंड कर रहा है. लोग पहले अक्षय कुमार को मराठा सैनिकों (Maratha Warriors) का अपमान करने का दोषी बता रहे थे और माफी मांगने के लिए कह रहे थे और अब निरमा को मराठा सैनिकों के अपमान के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि अपमान हुआ कैसे? ऐसा क्या दिखा दिया गया है निरमा के विज्ञापन में? यकीन मानिए, अगर आप थोड़ा भी न्यूट्रल होकर इसकी वजह पर ध्यान देंगे, तो आपको भी ये विरोध निरमा का कम और महिलाओं का ज्यादा लगेगा. बता दें कि एक ओर जहां निरमा के विज्ञापन को लेकर अक्षय कुमार को विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जेएनयू हिंसा (JNU Violence) के विरोध में प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर दीपिका पादुकोण (Deepika Padukon) का भी सोशल मीडिया पर खूब विरोध हो रहा है. लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि एसिड अटैक (Acid Attack) पर बनी उनकी फिल्म छपाक (Chhapaak) का विरोध किया जाए. वैसे ये दोनों विरोध हैं अलग-अलग, लेकिन जुड़े दोनों ही महिलाओं से हैं.

BoycottNirma Twitter Trendनिरमा के विज्ञापन का विरोध ये कहते हुए किया जा रहा है कि उसने मराठा संस्कृति का अपमान किया है.

मराठा सैनिक कपड़े नहीं धो सकता!

सैनिक शब्द सुनते ही दिमाग में एक वीर योद्धा की छवि उभर आती है. वीर योद्धा यानी जंग के मैदान में तलवार चलाने वाला, दुश्मनों को धूल चटाने वाला. अब सोचिए, जिन हाथों में तलवारें हैं, उनके वॉशिंग पाउडर में सने कपड़े हों तो कैसा लगेगा? हां ये ध्यान रहे कि वह कपड़े अपने ही हैं, किसी दूसरे के नहीं. वैसे तो अधिकतर लोगों को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगेगा, क्योंकि एक इंसान जब खुद से खा सकता है, नहा सकता है तो अपने ही कपड़े धोने में क्या बुरा है, लेकिन सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे लोगों को ये बात समझ नहीं आ रही है. उन्हें एक मराठा सैनिक का कपड़े धोना बहुत गलत लग रहा है, भले ही वह उसके खुद के कपड़े क्यों ना हों.

क्या दिखाया गया है विज्ञापन में?

निरमा के विज्ञापन में दिखाया गया है कि मराठा सेना दुश्मनों को धूल चटाकर वापस आई है और महाराज ने खुशियां मनाने की घोषणा की है. इतने में एक सैनिक की पत्नी बोलती है कि काहे की खुशी, कपड़े इतने गंदे कर लिए, घिस-घिस कर हमें ही धोने पड़ेंगे. बस फिर क्या, महाराज बोल देते हैं कि हमारी सेना दुश्मनों को धोना जानती है और अपने कपड़े भी. इसके बाद वह कपड़े धोते हैं और गंदे-मैले कपड़े एकदम सफेद चमकने लगते हैं.

क्या बोल रहे हैं विरोध करने वाले?

- कुछ लोगों को लग रहा है कि ये मराठा संस्कृति का विरोध है. देखिए जरा ये तस्वीर.

BoycottNirma Twitter Trendट्विटर पर #BoycottNirma ट्रेंड कर रहा है.

- कुछ का विरोध तो आपके पल्ले भी नहीं पड़ेगा. एक ट्विटर यूजर ने लिखा है- 'इसके चेहरे के हाव-भाव तो देखो. ये कहीं से योद्धा लग भी रहा है... ये तो कॉमेडियन लग रहा है.' उसका कहना है कि मराठा योद्धा दुश्मन को हराने के बाद भी पार्टी नहीं करते थे.

BoycottNirma Twitter Trendलोगों का मानना है कि विज्ञापन में अक्षय कुमार को मराठा दिखाया है, लेकिन वह योद्धा नहीं बल्कि कॉमेडियन लग रहे हैं.

- कुछ ट्विटर यूजर ने तो इसे देश की अस्मिता से भी जोड़ दिया.

BoycottNirma Twitter Trendकुछ ट्विटर यूजर कह रहे हैं कि शिवाजी राष्ट्र की आन थे और निरमा का विज्ञापन उनके साथ-साथ देश का अपमान है.

- विरोध इस बात को लेकर भी है कि निरमा ने अपने विज्ञापन में योद्धाओं को नाचते हुए दिखाया है.

BoycottNirma Twitter Trendट्विटर पर विरोध इस बात को भी लेकर हो रहा है कि मराठा सैनिकों को नाचते हुए दिखाया गया है.

कुछ सवालों के जवाब दें निरमा का विरोध करने वाले

जो लोग सोशल मीडिया पर पहले अक्षय कुमार का विरोध करते हुए माफी की मांग कर रहे थे और अब निरमा का विरोध कर रहे हैं, उन्हें कुछ सवालों के जवाब देने चाहिए. उन्हें ये साफ करना चाहिए कि एक मराठा योद्धा का अपने कपड़े धोने में क्या बुराई है? योद्धा कई दिनों तक घरों से बाहर रहते थे और युद्ध के मैदान में लड़ते थे. बहुत लंबी-लंबी दूरी तय करते थे. इस दौरान अगर क्या वह अपने कपड़े नहीं धुलते होंगे, नहाते नहीं होंगे या अपने लिए खाने का इंतजाम नहीं करते होंगे? विरोध में खड़े लोग ये बताएं कि वह विरोध इसलिए कर रहे हैं कि मराठा सैनिकों को कपड़े धोने पड़ रहे हैं या विरोध इस बात का है कि महिलाएं कपड़े क्यों नहीं धो रही हैं?

खुद मराठा शिवाजी महिलाओं का बहुत सम्मान करते थे

निरमा का विरोध करने वालों का रवैया दिखा रहा है कि वह महिलाओं का अपमान कर रहे हैं. उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि अगर आज शिवाजी महाराज ये देखते तो उन्हें अच्छा नहीं लगता. वह महिला सम्मान के कट्टर समर्थक थे. उनके सख्त निर्देश थे कि अगर कहीं हमला करना पड़े तो वहां महिलाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. उनके राज में जो महिलाओं का अपमान करता था या शोषण करना था उसे कड़ी सजा मिलती थी. एक बार एक सैनिक मुगल सूबेदार की बहू को लेकर शिवाजी को भेंट करने पहुंचा, उसे लगा कि महाराज खुश होंगे, लेकिन हुआ उल्टा. शिवाजी ने सैनिक को खूब डांटा को ससम्मान उस महिला को वापस उसके घर छोड़कर आने को कहा. अब आप समझ ही गए होंगे कि शिवाजी महाराज महिलाओं का कितना सम्मान करते थे.

निरमा के विरोध में खड़ी सोशल मीडिया की सेना को ये समझना होगा कि परिवार सिर्फ किसी एक से नहीं चलता, बल्कि पति-पत्नी दोनों मिलकर उसे चलाते हैं. ऐसे में अगर पति अपनी पत्नी की खाना बनाने, साफ सफाई करने या कपड़े धोने में मदद कर दे तो ये गलत कैसे हो गया? ये मराठा संस्कृति को बदनाम करने वाला कैसे हो गया? क्या पत्नी की मदद करना गलत है, वो भी उस शख्स के लिए जो महिलाओं के सम्मान का कट्टर समर्थक हो? खैर, इस विरोध में कूद पड़े बहुत से लोगों का आईक्यू लेवल शायद ही इतना हो कि वह इस विज्ञापन का मतलब समझ पाएं.

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