होम -> सियासत

 |  4-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 23 फरवरी, 2017 08:08 PM
अभिनव राजवंश
अभिनव राजवंश
  @abhinaw.rajwansh
  • Total Shares

बीएमसी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा. आज घोषित हुए चुनाव परिणाम में बीजेपी ने 227 में से 81 सीट अपनी झोली में डालने में कामयाब रही, बीजेपी के लिए सीटों कि यह संख्या 2012 के चुनावों में मिले सीटों से पचास ज्यादा है. चुनाव परिणाम ने जहां बीजेपी सेना को फिर से साथ आने के रास्ते खोल दिये हैं तो वहीं बीजेपी का प्रदर्शन महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस को भी सुकून देने वाला होगा. बीजेपी ने न केवल मुम्बई बल्कि पुणे, नाशिक, नागपुर और चिंचवाड़ के निकाय चुनावों में भी में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है, इसे फडणवीस के कामयाबी के रूप में भी देखा जा सकता है. फिलहाल इन परिणामों को बीजेपी के लिए BMC में अच्छे दिनों की आहट कही जा सकती है.

bmc650_022317075824.jpg

इन परिणाम के बाद जो पांच बातें जो निकल कर आयी हैं वो हैं -

1. बीजेपी-सेना फिर आ सकते हैं साथ

मुम्बई महानगरपालिका चुनावों के परिणाम के बाद ये साथ ये साफ हो चुका है कि कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत के लिए जरुरी 114 सीटों के करीब नहीं है. हालांकि गणित के आंकड़ों से शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अन्य 14 को लेकर 114 के आंकड़ों तक पहुंचा जा सकता है, मगर जमीन पर ऐसे होने की संभावना कम ही है. ऐसे में एक चीज जो काफी आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है वो है बीजेपी सेना का फिर से साथ आना, बीजेपी सेना पिछले 15 सालों से मुम्बई महानगरपालिका में है और ऐसी पूरी संभावना है आने वाले पांच साल भी BMC पर इन्ही दो पार्टियों का कब्जा रहेगा. बीजेपी ने चुनावों के समय भी शिव सेना से गठबंधन को लेकर आश्वस्त ही दिखी थी, वर्तमान में शिव सेना केंद्र और राज्य सरकार में भी बीजेपी की भागीदार है.

2. सेना से अलग होकर लड़ना रहा फायदेमंद

बीजेपी के लिए शिव सेना से अलग होकर चुनाव लड़ना एक बार फिर फायदेमंद रहा. बीजेपी अपने दम पर 81 सीट तक पहुचने में कामयाब रही. इससे पहले साल 2014 में हुए विधानसभा चुनावों शिव सेना से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरी थी जिसका फायदा भी बीजेपी को मिला और बीजेपी पहली बार महाराष्ट्र में शिवसेना से आगे निकलने में कामयाब रही. वहीं नगरपालिका चुनावों में मिले जबरदस्त जीत से यह बात फिर साबित हो गयी कि अब भारतीय जनता पार्टी शिव सेना के छोटे भाई कि भूमिका से बाहर आ गयी है.

3. नोटबंदी बीजेपी के लिए फायदे का सौदा

विपक्षी पार्टियां लगातार इस बात पर जोर दे रही थीं कि नोटबंदी का फैसला आम आदमी के खिलाफ है. हालांकि नोटबंदी के बाद हुए चुनाव परिणामों को पैमाना माने तो ऐसा लगता नहीं. नोटबंदी के बाद हुए चंडीगढ़ नगरपालिका के चुनावों में बीजेपी-अकाली ने जीत दर्ज की, लोकसभा के कुछ सीटों पर हुए उपचुनावों में भी बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन किया, तो वहीं आज मुंबई महानगरपालिका में 2012 में 31 सीटों के आंकड़ों को 81 तक ले गयी, इन सबके अलावा बीजेपी ने ओडिशा के पंचायत चुनावों में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है. पिछले पंचायत चुनावों में जहां बीजेपी को मात्र 36 सीटें मिलीं थी तो 2017 में यह आकंड़ा 306 सीटों तक जा पंहुचा है.

4. कांग्रेस के सिमटने का दौर जारी

कांग्रेस के लिए कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है, 2014 के आम चुनावों के बाद से कांग्रेस के पतन का जो दौर  शुरू हुआ है वो रुकने का नाम नहीं ले रहा. कांग्रेस मुम्बई महानगरपालिका चुनावों में अपने 2012 के प्रदर्शन को भी दुहराने में भी नाकामयाब रही. जहां 2012 में कांग्रेस को 52 सीटें मिली थी तो आज आये परिणामों में कांग्रेस 31 सीट तक ही पहुंच सकी. कांग्रेस के मुंबई यूनिट प्रमुख संजय निरूपम ने पार्टी की महाराष्ट्र में स्थिति की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की भी पेशकश की है और साथ इस हार के लिए पार्टी के अंदरूनी कलह को भी सामने ले आये.

5. उत्तर प्रदेश के चुनावों में दिखेगा असर

हालांकि यह दोनों चुनाव साफ तौर पर एक दूसरे से अलग हैं, मगर इन चुनावों के बेहतर परिणाम निश्चित रूप उत्तर प्रदेश के बीजेपी कार्यकर्तायों में ऊर्जा भर सकता है. बीजेपी नेता निश्चित रूप से इन परिणामों को उत्तर प्रदेश के चुनावों में भुनाने कि कोशिश करेंगे, हालांकि यह कितना असरदार होगा यह 11 मार्च को ही पता चल पायेगा.

ये भी पढ़ें-

बीएमसी और महाराष्ट्र निकाय चुनाव के बाद बीजेपी

लेखक

अभिनव राजवंश अभिनव राजवंश @abhinaw.rajwansh

लेखक आज तक में पत्रकार है.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय