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Updated: 20 अगस्त, 2021 11:15 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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तालिबान (Taliban) का मुद्दा देश के लिए विदेश नीति का मसला होना चाहिये. तालिबान का मुद्दा भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का मसला होना चाहिये - न कि घरेलू राजनीति का, लेकिन ये धीरे धीरे चुनावी राजनीति में भी घुसपैठ करने लगा है.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के 'अब्बाजान' वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी - और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाषा पर संयम रखने की सलाह दी थी, लगे हाथ ये ताकीद भी कि पिता को घसीटा गया तो उनके पास भी बोलने के लिए काफी कुछ है. योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम परस्त पॉलिटिक्स को अब्बाजान कह कर निशाना बनाया था.

जैसे ही समाजवादी पार्टी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने तालिबान पर बयान दिया, बीजेपी को अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा करने का मौका ही मिल गया. सपा सांसद के बयान पर पार्टी के पक्ष का इंतजार रहा, लेकिन उससे पहले वो खुद पलट गये और अपनी बात को तोड़ मरोड़ कर पेश किये जाने की बात बोल पल्ला ही झाड़ लिये, लेकिन बात खत्म कहां होने वाली थी, योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सपा सांसद के बयान के बहाने अखिलेश यादव को ही घेरने की कोशिश की - 'एक्सपोज किया जाना चाहिये.'

तालिबान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर गली मोहल्ले तक में बहस होने लगी है. कई लोग तालिबान को एक खास तबके के लिए मिसाल के तौर पर पेश कर रहे हैं और विरोधी पक्ष को एक एजेंडे के तहत टारगेट भी कर रहे हैं. ट्वीट और फेसबुक पोस्ट के साथ साथ व्हाट्सऐप फॉर्वर्ड मैसेज में भी तालिबान विमर्श भागीदारी बढ़ाने लगा है.

कहां तालिबान जैसे संगठन के सत्ता पर कब्जे की कोशिश गंभीर चिंता का मुद्दा होना चाहिये, लेकिन देश के भीतर भी तालिबान को लेकर पक्ष और विरोधी गुट बनने लगा है - ऐसा लगता है जैसे चुनावी माहौल में जो रोल अब तक पाकिस्तान का हुआ करता था, तालिबान उसकी जगह लेने लगा है.

चुनावों में अब तक जो 'पाकिस्तान चले जाने' का डायलॉग हुआ करता था, अब 'अफगानिस्तान भेजे जाने' की बातें होने लगी हैं. सवाल ये है कि तालिबान विमर्श का दायरा महज गॉसिप तक सीमित रहने वाला है या ये चुनावों (UP Election 2022) में वोटों को भी प्रभावित कर सकता है - और अगर ऐसा मुमकिन हुआ तो फायदा किसे होगा और किसे नुकसान?

तालिबान भी तो पाकिस्तान जैसा ही है

उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने को बेताब समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को तालिबान के नाम लेने से भरे से कोई फायदा मिला हो या नहीं, लेकिन बीजेपी ने तो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक को कठघरे में खड़ा करने लगी है. भले ही शफीकुर्रहमान बर्क अपने बयान से मुकर भी चुके हों, लेकिन समाजवादी पार्टी ने बीजेपी के हाथ हमला बोलने का रास्ता ही दे डाला है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी विधान परिषद में विपक्ष के आरोपों का जवाब दे रहे थे. विपक्ष ने योगी सरकार पर कोरोना संकट में लापरवाही के आरोप लगाये थे.

योगी आदित्यनाथ ने नाम तो नहीं लिया लेकिन निशाना सटीक जा बैठा - 'वे कौन चेहरे थे जो कह रहे थे कि वैक्सीन नहीं लगावाएंगे?' बोले, जिन्होंने बगैर वैक्सीन के जान गंवाई, ये उनके अपराधी हैं, लेकिन जैसे ही योगी आदित्यनाथ ने अब्बाजान का जिक्र किया, बवाल मच गया.

yogi adityanathयोगी आदित्यनाथ को तालिबान से भी पाकिस्तान जितना ही राजनीतिक फायदा मिलेगा या कम ज्यादा?

योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'पहले अब्बाजान ने वैक्सीन लगवाई... तब बोले हम भी वैक्सीन लगवाएंगे.' ये कहना भर था कि समाजवादी पार्टी के सदस्य शोर मचाते वेल में पहुंच गये, विरोधी दल के नेता अहमद हसन और दूसरे नेताओं ने मुख्यमंत्री की भाषा पर सवाल उठा दिया. योगी आदित्यनाथ को तो जैसे इंतजार ही रहा, अब्बाजान से तालिबान पर पहुंच गये.

योगी आदित्यनाथ ने कहा, मुझे संसदीय भाषा का ज्ञान दे रहे हैं - इनकी पार्टी के सांसद तालिबान का सपोर्ट कर रहे हैं.

बोले, 'अध्यक्षजी, तालिबान का समर्थन कर रहे हैं कुछ लोग... महिलाओं के साथ क्या क्रूरता बरती जा रही है... बच्चों के साथ क्या क्रूरता हो रही है... लेकिन कुछ लोग बेशर्मी के साथ तालिबान का समर्थन कर रहे हैं... तालिबानीकरण करना चाहते हैं - ये चेहरे समाज के सामने एक्सपोज किए जाने चाहिये'

राजनीतिक विरोधियों को टारगेट करने में तालिबान योगी आदित्यनाथ के लिए कॉम्बो पैकेज साबित हो रहा है - तालिबान में पाकिस्तान का टोन तो है ही, महिलाओं के प्रति तालिबान की सोच ही उसका पूरा परिचय दे देते है.

कट्टर हिंदूवादी नेता की छवि के साथ योगी आदित्यनाथ जिस तरीके से 'अब्बजान' कीवर्ड को लेकर आगे बढ़ रहे थे तालिबान की एंट्री ने उनकी राजनीतिक मुहिम को और हवा ही दे दी है.

कहां योगी आदित्यनाथ को कोरोना काल में अपनी सरकार की लापरवाही पर सदन में जवाब देना पड़ रहा था - और कहां अब्बाजान से लेकर तालिबान की कड़ी ऐसे जुड़ी कि पूरी चर्चा ही बदल गयी. कहां कोरोना संकट के दौरान की बदइंतजामियों को लेकर समाजवादी पार्टी बीजेपी सरकार पर हमलावर हो चुकी थी - और कहां योगी आदित्यनाथ ने तालिबान की याद दिलाकर बचाव की मुद्रा में ला दिया.

यूपी में बीजेपी के लिए तालिबान का एक और फायदा नजर आ रहा है - और उसे लेकर दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व रणनीति भी तैयार करने लगा है.

CAA पर राजनीति का मौका फिर से

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का पूरे देश में विरोध हुआ था. दिल्ली में तो शाहीन बाग का मामला काफी लंबा चला, लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते वो बिखर ही गया. बाद में ये भी लगा कि चुनावी वजहों से मोदी सरकार CAA-NRC को अघोषित तौर पर होल्ड कर लिया हो. पश्चिम बंगाल और असम दोनों ही चुनाव बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे, नतीजे भले ही अलग अलग रहे हों.

बिहार चुनाव के आखिरी दौर में जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के भाषण में जब इन कानूनों का जिक्र आया तो नीतीश कुमार ने कड़ी आपत्ति जतायी थी. नीतीश कुमार ने बड़े ही सख्त लहजे में कहा था कि किसी की मजाल नहीं कि हमारे लोगों को देश से बेदखल करने के बारे में सोच भी सके.

अब तालिबान के चलते ही CAA पर राजनीति एक बार फिर शुरू होने वाली है - और उत्तर प्रदेश तो इसका बड़ा सियासी मैदान ही रहा है. एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरोध प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाये हुए थे, दूसरी तरफ कांग्रेस महासचिव पूरे प्रदेश में जगह जगह पुलिस एक्शन के शिकार लोगों के साथ खड़े होती रहीं. एक बार फिर वैसे ही माहौल की दस्तक सुनायी पड़ने लगी है.

तालिबान से भारतीय दूतावास के सभी लोग लौट आये हैं - भारतीय दूतावास के कर्मचारी, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी, कुछ पत्रकार शामिल हैं. अफगानिस्तान के हालात पर भारत की बराबर नजर बनी हुई है - और बीच बीच में जरूरत पड़ने पर सरकार की तरफ से बयान भी आ रहे हैं.

अफगानिस्तान के हालात की प्रधानमंत्री आवास पर भी समीक्षा बैठक हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों की सकुशल वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये. बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद रहे.

बाकी बातों के बीच, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने जो बातें कहीं वे काफी महत्वपूर्ण हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को न केवल अपने नागरिकों की रक्षा करनी चाहिये, बल्कि हमें उन सिख और हिंदू अल्पसंख्यकों को भी शरण देनी चाहिये जो भारत आना चाहते हैं - और हर संभव मदद करनी चाहिये.

नागरिकता संशोधन कानून बना भी तो ऐसे ही लोगों के लिए है - और अब वो मौका भी आ चुका है जब भारत की नागरिकता लेने के इच्छुक लोगों को सुविधा का फायदा मिल सके और सत्ताधारी बीजेपी को चुनावी फायदा - जो भी दूसरी छोर पर खड़ा नजर आएगा नुकसान भी उठाने का जोखिम बना रहेगा.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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