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Updated: 28 सितम्बर, 2020 10:22 PM
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सुशांत सिंह राजपूत केस (Sushant Singh Rajput Case) की जांच मुख्य तौर पर सीबीआई कर रही है. साथ ही, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय भी अलग अलग एंगल से जांच कर रहे हैं. ईडी पैसे के लेन देन का पता लगाने की कोशिश कर रहा है तो एनसीबी ड्रग्स को लेकर.

जांच कर रही तीनों एजेंसियों में फिलहाल सबसे आगे तो एनसीबी ही नजर आ रहा है. केस की मुख्य आरोपी रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक सहित सारी गिरफ्तारियां भी एनसीबी की तरह से हुई हैं. जांस की रेस में सबसे पीछे सीबीआई ही नजर आ रही है, जिस पर हर किसी को सबसे ज्यादा भरोसा रहा है?

सीबीआई जांच के आदेश होने तक तो कांग्रेस को छोड़ कर बिहार से जुड़े सभी राजनीतिक दलों में इंसाफ दिलाने का श्रेय लेने की होड़ मची रही, लेकिन बिहार चुनाव (Bihar Election 2020) की तारीख आ जाने के बाद सीबीआई जांच की प्रोग्रेस को लेकर सुशांत के परिवार के अलावा कहीं कोई आवाज नहीं उठ रही है - क्या राजनीतिक दलों ने बिहार में सुशांत केस को चुनावी मुद्दा (Election Issue) बनाने का इरादा छोड़ दिया है?

सुशांत को इंसाफ दिलाने वाले कहां हैं?

पब्लिक मेमरी काफी शॉर्ट मानी जाती है. जैसे ही लोगों को कोई नयी चीज थमा दी जाती है, वे पिछली बातें यूं ही भुला देते हैं. इंसान की इस खास खासियत का सबसे ज्यादा बेजा इस्तेमाल सियासत में ही होता है - और ताजातरीन मिसाल बिहार चुनाव में ही मिल जा रहा है.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बिहार की राजनीति में इंसाफ दिलाने की जो होड़ मची थी, ठंडी पड़ती दिखाई दे रही है. बीजेपी की तरफ से तो स्टिकर और पोस्टर भी छपवाये गये - 'ना भूलेंगे, ना भूलने देंगे!'

मगर, सबके सब धीरे धीरे भूलने लगे हैं, सिवा सुशांत सिंह के परिवार के. जब तक सीबीआई जांच के आदेश नहीं हुए थे, तेजस्वी यादव से लेकर चिराग पासवान तक लगातार ट्वीट और मीडिया के कैमरे के सामने बयानबाजी करते ही रहे. बिहार विधानसभा के सत्र के आखिरी दिन भी तेजस्वी यादव ने सीबीआई जांच को लेकर खूब हंगामा किया. उस दिन विधान परिषद में भी हंगामा हुआ - और तभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी. बिहार के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने तो सुशांत सिंह केस में ही राजनीतिक रिहर्सल भी कर लिया था - लेकिन अब न तो उनके फेसबुक लाइव में और न ही जेडीयू की सदस्यता ले लेने के बाद सुशांत केस का कहीं कोई जिक्र सुनाई नहीं दे रहा है.

इंडिया टुडे के साथ बातचीत में सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह सीबीआई जांच को लेकर निराशा जतायी है. विकास सिंह को लगता है कि सुशांत केस सीबीआई के लिए अब बड़ी प्राथमिकता नहीं रह गया है.

sushant singh rajputसुशांत सिंह राजपूत केस चुनावी मुद्दा बने न बने, इसांफ की लड़ाई का क्या हुआ?

विकास सिंह कहते हैं कि वे लोग शुरू में सीबीआई जांच के पक्ष में नहीं थे, लेकिन जब मुंबई पुलिस ने पटना पुलिस की जांच में अड़ंगे लगाने लगी तो कोई रास्ता नहीं बचा था. विकास सिंह अपनी आशंकाओं के पक्ष में दलील भी देते हैं, सीबीआई टीम और एम्स की टीम एक ही शहर में कई दिनों तक थी लेकिन उसके बाद भी वे लोग एक बार भी मीटिंग नहीं कर पाये.

कुछ दिन पहले विकास सिंह ने सुशांत सिंह की हत्या किये जाने का दावा भी किया था. विकास सिंह ने बताया था, वो डॉक्टर जो एम्स की जांच टीम का हिस्सा रहा है उसने मुझे बताया था कि जो तस्वीरें मैंने उसे भीजे वो बताती हैं कि ये 200 फीसदी गला घोंट कर माने जाने का मामला है, न कि खुदकुशी का. हालांकि, एम्स की तरफ से विकास सिंह के दावों को ये कहते हुए खारिज कर दिया गया कि अभी जांच किसी नतीजे पर पहुंची ही नहीं है.

#JusticeforSushantSinghRajput ट्रेंड तो तब भी कर रहा था जब होटल में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की मुलाकात की खबर आयी थी. दरअसल, देवेंद्र फडणवीस को बीजेपी के बिहार चुनाव में प्रभारी बनाये की बड़ी वजह तो सुशांत सिंह राजपूत केस के चुनावी मुद्दा बनने को लेकर ही रहा, लेकिन अब तो लगता है जैसे इंसाफ की जंग में सन्नाटा छाया हुआ है.

तभी तो शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत को भी मजे लेने का मौका मिल गया है, कहते हैं, 'बिहार में चुनाव विकास, कानून व्यवस्था और सुशासन के मुद्दे पर लड़ा जाना चाहिए, लेकिन अगर ये सारे मुद्दे कमजोर पड़ गये हैं तो मुंबई से मुद्दों से पार्सल के रूप में भेजा जा सकता है.'

संजय राउत ने बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय पर निशाना साधते हुए कहा, 'बिहार के डीजीपी ने इस्‍तीफा दे दिया है और वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे!'

अब तो संजय राउत भी पूछने लगे हैं - 'सुशांत मसले पर सीबीआई जांच का क्‍या हुआ?'

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने सुशांत केस को लेकर देवेंद्र फडणवीस को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है. बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को मुंबई पुलिस का अपमान करने वाला बताते हुए कहा है कि अगर सत्ताधारी जेडीयू का उनको टिकट मिलता है तो ये बहुत तकलीफदेह होगा, खासकर तब जब देवेंद्र फडणवीस बिहार चुनाव में प्रभारी हैं. सचिन सावंत ने ट्विटर पर लिखा है कि देवेंद्र फडणवीस अगर गुप्तेश्वर पांडेय की उम्मीदवारी का विरोध नहीं करते तो महाराष्ट्र की जनता उनसे कई सवाल पूछेगी.

अब कोई नाम भी क्यों नहीं ले रहा?

मोटे तौर सुशांत सिंह केस को लेकर चल रही जांचों के राजनीतिक असर को देखें तो सीबीआई जांच की मांग जहां इंसाफ दिलाने को चुनावी मुद्दा बना रही थी, वहीं एनसीबी की जांच लगता है राजनीति के बीच दीवार बन कर खड़ी हो गयी है - क्योंकि एनसीबी की जांच से और कुछ हुआ हो न हो, सुशांत सिंह राजपूत की छवि जरूर धूमिल हुई है.

बॉलीवुड एक्टर और उनके मैनेजर या उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ के बाद NCB की जांच में आधिकारिक तौर पर ये बातें भी दर्ज हो चुकी हैं कि सुशांत सिंह शूटिंग के दौरान और पार्टियों में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल होता था. सुशांत सिंह के फॉर्म हाउस से भी ऐसी चीजें पायी गयी हैं जिनका ड्रग्स के सेवन में इस्तेमाल होता है - और सबसे ज्यादा ये बातें ही सुशांत की नकारात्मक छवि गढ़ने लगी हैं.

फिर क्या एनसीबी की जांच में बॉलीवुड हस्तियों के बयान के बाद सुशांत सिंह राजपूत केस से बिहार के नेता दूरी बनाने लगे हैं?

कहने को तो देवेंद्र फडणवीस और बाकी नेता भी यही कहते आ रहे हैं कि सुशांत सिंह राजपूत का केस चुनावी मुद्दा नहीं है, लेकिन इंसाफ दिलाने तक लड़ाई जारी रहेगी. अच्छी बात है. चुनावी मुद्दा न सही, लेकिन अब वैसी चर्चा क्यों नहीं होती जैसी पहले हुआ करती रही. किसी न किसी बहाने सुशांत सिंह राजपूत को याद कर ही लिया जाता रहा, चाहे नेताओं के बयान में चाहे उनके ट्वीट में सुशांत का जिक्र न हो ऐसा तो नहीं ही होता था जो अब देखने को मिल रहा है.

इस बीच, सीबीआई के एक प्रवक्ता की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो पेशेवर तरीके से जांच कर रहा है और सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है - और अभी तक किसी भी पहलू से इंकार नहीं किया गया है.'

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