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Updated: 07 जून, 2020 05:47 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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सोनू सूद (Sonu Sood) कोरोना संकट काल में प्रवासी मजदूरों के लिए मसीहा बन कर उभरे हैं. हर तरफ से सोनू सूद के लिए सिर्फ दुआएं ही निकल रही हैं - मुंबई से दरभंगा पहुंची एक महिला ने तो पैदा होते ही अपने बच्चे का नाम सोनू सूद ही रख दिया. सेवा के बदले जो भी सोनू सूद की तारीफ में कसीदे पढ़ता है वो बड़ी ही विनम्रता से उस पर रिएक्ट करते हैं. सोनू सूद की ये तारीफ शिवसेना को रास नहीं आ रही है. शिवसेना के मुख पत्र सामना में संजय राउत ने सोनू सूद की सेवा भावना भी भी राजनीति खोज निकाली है - और उनको महाराष्ट्र में विपक्षी बीजेपी का प्यादा करार दिया है.

सोनू सूद के बहाने विपक्ष पर सीधे हमले में संजय राउत (Sanjay Raut) ने इल्जाम लगाया है कि बीजेपी सोनू सूद का इस्तेमाल महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार पर हमला करने के लिए कर रही है - क्या सोनू सूद महाराष्ट्र की राजनीति का शिकार हो रहे हैं या फिर उनके इस सेवा कार्य के पीछे राजनीतिक वजह ही है.

क्या सोनू सूद एक्टिंग कर रहे हैं?

शिवसेना के मुखपत्र सामना में पार्टी प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने अपने कॉलम 'रोखटोक' में एक्टर सोनू सूद की समाज सेवा पर तरह तरह से सवाल उठाया है. संजय राउत ने सवालों और आरोपों के माध्यम से साबित करने की कोशिश की है कि सोनू सूद जो कुछ भी कर रहे हैं उसके पीछे बीजेपी का हाथ है.

संजय राउत ने लिखा है कि महाराष्ट्र में समाज सेवा की लंबी परंपरा रही है और इस क्रम में वो महात्मा ज्योतिबा फुले और बाबा आम्टे का नाम भी लेते हैं, लेकिन सोनू सूद का नाम उनसे जोड़ कर कटाक्ष करते हैं - अब इस लिस्ट में एक और व्यक्ति शामिल हो गये हैं. वो हैं सोनू सूद. संजय राउत लिखते हैं, 'उनके कई वीडियो और तस्वीरें दिख रही हैं, उनमें सोनू सूद चिलचिलाती धूप में प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे हैं.'

बीजेपी के साथ राजनीतिक विरोध अपनी जगह है लेकिन संजय राउत ने प्रवासी मजदूरों को बस में भेजने के लिए आये पैसों पर सवाल उठाते हुए अभिनेता को बीजेपी का मुखौटा बताने की कोशिश की है.

अपने कॉलम में संजय राउत लिखते हैं, 'लॉकडाउन के दौरान आचानक सोनू सूद नाम से नया महात्मा तैयार हो गया. इतने झटके और चतुराई के साथ किसी को महात्मा बनाया जा सकता है?

sanjay raut, uddhav thackeray, aditya thackerayशिवसेना कोौ सोनू सूद की समाजसेवा से खतरा क्यों महसूस होने लगा?

संजय राउत ने सोनू सूद के काम पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के कामों को एक फ्रेम में दिखाने की भी कोशिश की है, 'कहा जा रहा है कि सोनू सूद ने लाखों प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों में उनके घर पहुंचाया. अर्थात् केंद्र और राज्य सरकार ने कुछ भी नहीं किया. इस काम के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी महात्मा सूद को शाबाशी दी.'

सोनू सूद ने हाल ही में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी. राज्यपाल ने सोनू सूद के कामों की तारीफ तो की ही, हर तरीके के सहयोग का भी भरोसा दिलाया. उत्तराखंड के प्रवासी लोगों को मुंबई से उनके घर तक जाने के लिए फ्लाइट का इंतजाम करने को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सोनू सूद की तारीफ की है.

जब एक इंटरव्यू में सोनू सूद से पूछा गया कि लोगों की मदद का ख्याल उनके मन में कैसे आया तो एक्टर ने बताया कि प्रवासियों की दुर्दशा के बारे में सोचकर वो रात को सो नहीं पाते थे. फिर फैसला किया कि जब तक हर प्रवासी को उनके घर नहीं पहुंचा देंगे, अपना काम जारी रखेंगे.

सोनू सूद ने मदद की शुरुआत कोरोना वायरस रिलीफ फंड में योगदान देकर की थी. फिर कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों को इलाज के लिए अपना जुहू वाला होटल मेडिकल स्‍टाफ को दे डाला. जब सोनू सूद ने मजदूरों को सड़कों पर पैदल चलता देखा तो खुद भी सड़क पर उतर आये और बसों से उनको घर भेजने की व्यवस्था करने लगे.

कुछ दिन पहले सोनू सूद का एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें पानी की धार की तरह उनके पास मदद के लिए लोगों के मैसेज आ रहे थे. फिर सोनू सूद ने कुछ लोगों की मदद न कर पाने के लिए माफी भी मांगी और फिर एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया.

अब तो सोनू सूद की मदद में बॉलीवुड एक्टर स्वरा भास्कर भी आ गयी हैं - और वो उन लोगों की मदद कर रही हैं जिनको सोनू सूद की टीम जवाब नहीं दे पाती.

अगर संजय राउत को शक है कि सोनू सूद बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं तो स्वरा भास्कर को लेकर उनकी क्या राय होगी - क्योंकि स्वरा भास्कर तो हर कदम बीजेपी के विरोधी पक्ष में ही नजर आती हैं. आम चुनाव में बेगूसराय से बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह के खिलाफ स्वरा भास्कर चुनाव प्रचार भी कर चुकी हैं. तब वो सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पहुंची थीं और खास बात ये भी रही कि अपना जन्म दिन भी स्वरा भास्कर ने 2019 में वहीं मनाया था.

संजय राउत का आरोप है कि सोनू सूद एक्टर हैं और वो पैसों के लिए कुछ भी कर सकते हैं. तो क्या संजय राउत ये बताना चाह रहे हैं कि जैसे सोनू सूद पैसे लेकर फिल्मों में काम करते हैं वैसे ही फीस लेकर यूपी, उत्तराखंड और बिहार सहित कई राज्यों के मजदूरों को उनके घर भेजने की एक्टिंग कर रहे हैं?

संजय राउत के नजरिये से देखें तो सोनू सूद के सारे दावे झूठे लगते हैं. मसलन, अब तक तो यही समझ बनी है कि सोनू सूद ये सब अपने पैसों से कर रहे हैं, लेकिन संजय राउत तो ऐसे समझा रहे हैं जैसे सोनू सूद का ये नया बिजनेस है. क्या वास्तव में ऐसा कुछ है?

बीजेपी नेता राम कदम ने संजय राउत के आरोपों पर पलटवार किया है - और मौके का फायदा उठाते हुए महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली महाविकास अघाडी गठबंधन सरकार पर भी निशाना साधा है. राम कदम का कहना है कि उद्धव ठाकरे सरकार कोरोना से निबटने में नाकाम रही है और सोनू सूद पर आरोप लगाकर ये सच्चाई छिपायी नहीं जा सकती, कहते हैं, 'जिस काम की सराहना करने की आवश्यकता है, उस पर भी आरोप?'

सोनू सूद से शिवसेना को आपत्ति क्यों है?

सामना में जो कुछ भी लिखा है वो संजय राउत के मन की बात तो नहीं मानी जा सकती - और वैसे भी वो शेरो-शायरी वाला कोई लहजा नहीं है. ऐसी शेरो शायरी और मन की बात के लिए तो संजय राउत के पास अपना एक ट्विटर अकाउंट है ही. संजय राउत सामना के एक्जीक्यूटिव एडीटर जरूर हैं लेकिन संपादक उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे हैं. मुख्यमंत्री बनने से पहले उद्धव ठाकरे ही सामना के संपादक हुआ करते रहे. ऐसे में संजय राउत के ये सब अपने मन से करने का स्कोप तो लगता नहीं है.

लेकिन संजय राउत ने जिस तरीके से सोनू सूद के काम पर उंगली उठायी है वो उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्टाइल नहीं लगती. शिवसेना की पुरानी स्टाइल हो सकती है जो अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नेता राज ठाकरे के हिस्से में नजर आती है - जबकि उसका उदारवादी स्वरूप उद्धव ठाकरे ने संजो रखा है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना को बाला साहेब ठाकरे वाली शिवसेना से अलग महसूस किया जाता है.

गैर मराठी तबका शुरू से ही शिवसेना के लिए महत्वपूर्ण रहा है. उसके विरोध से ही तो शिवसेना की राजनीति भी चमकती रही है, लेकिन उद्धव ठाकरे इस मामले में संयम और धैर्य का प्रदर्शन करते हैं. ऐसे पैमाने में सोनू सूद भी बाहरी हो जाते हैं, सोनू सूद की पैदाइश मोगा की है जो पंजाब में है.

संजय राउत ने एक और महत्वपूर्ण बात कही है - जल्द ही वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे और सेलीब्रिटी मैनेजर बन जाएंगे.

सवाल है कि मुसीबत में फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे सोनू सूद को टारगेट कर संजय राउत का राजनीतिक मकसद क्या हो सकता है?

ये तो साफ है कि सोनू सूद की तारीफ में उद्धव ठाकरे के काम फीके नजर आ रहे हैं. सवाल तो उठेगा ही कि जब सब सोनू सूद को ही करना पड़ रहा है तो उद्धव ठाकरे की सरकार क्या कर रही है - और ऐसा भी नहीं कि उद्धव ठाकरे की सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पा लिया हो. अब भी महाराष्ट्र पूरे देश में संक्रमण के मामले में नंबर 1 बना हुआ है. ऐसा भी कोई संकेत नहीं मिल सका है जिससे उम्मीद की जा सके कि सरकार सब कुछ जल्द ही काबू कर लेगी.

हो सकता है सोनू सूद पर हमला बोलने से शिवसेना के समर्थकों पर कोई असर न पड़े क्योंकि वैसे भी मदद तो गैर मराठी प्रवासी मजदूरों की हो रही है - लेकिन क्या इससे उद्धव ठाकरे की छवि पर असर नहीं पड़ेगा?

बेशक जो कुछ भी शिवसेना सरकार के खिलाफ जाएगा, फायदा बीजेपी को ही मिलेगा - लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल से जूझ रहे प्रवासी मजदूरों की मदद कर रहे सोनू सूद की सेवा भावना पर सवाल उठाकर संजय राउत ने उद्धव ठाकरे के सारे किये कराये पर पानी नहीं फेर दिया है?

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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