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Updated: 15 मई, 2019 10:02 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में फिर से अपने मतदाताओं से मुखातिब हो सकते हैं. वाराणसी सहित यूपी की बची हुई 13 सीटों पर 19 मई को वोटिंग होनी है. वाराणसी में चुनाव प्रचार का आखिरी दिन 17 मई है. प्रधानमंत्री ने 26 अप्रैल को नामांकन दाखिल किया था और तब दो दिन शहर में ही रहे.

मोदी से पहले विपक्षी नेता भी वाराणसी के लोगों से समर्थन के लिए पहुंच रहे हैं. विपक्षी नेताओं का कार्यक्रम भी मोदी की ही तरह दो दिन का बना है, लेकिन अलग अलग. पहले प्रियंका गांधी वाड्रा का रोड शो हो रहा है और उसके बाद 16 मई सपा-बसपा गठबंधन की रैली.

वाराणसी में तो विपक्ष पहले ही घुटने टेक चुका है, अब तो कोशिश यही होगी कि पूर्वांचल की बाकी बची 12 संसदीय सीटों तक पहुंच सके.

मोदी के नक्शे कदम पर प्रियंका!

वाराणसी को लेकर कांग्रेस की ओर से खूब हवा बनायी गयी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी वाड्रा उम्मीदवार हो सकती हैं - लेकिन आखिर में टिकट उसे ही थमा दिया जिसकी पांच साल पहले जमानत जब्त हो चुकी है. वाराणसी में कांग्रेस के टिकट पर एक बार भी अजय राय चुनाव मैदान में हैं.

पूर्वांचल में कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी निभा रहीं प्रियंका वाड्रा प्रयागराज से वाराणसी तक बोट यात्रा भी कर चुकी हैं - और इस बार कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोट जुटाने खातिर शहर में रोड शो कर रही हैं.

शहर में रास्ते तो बहुत हैं जिनसे गुजरते हुए काशीवासियों से मेल मिलाप बढ़ायी जा सकती है, लेकिन मालूम नहीं क्या सोच कर कांग्रेस प्रियंका वाड्रा के रोड शो का रूट भी प्रधानमंत्री मोदी के नक्शे कदम पर ही तैयार किया. प्रधानमंत्री मोदी की ही तरह प्रियंका वाड्रा के रोड शो की शुरुआत के लिए लंका पर बीएचयू के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय की मूर्ति को चुना गया. रोड शो के रास्ते भी वही चुने गये जिनसे प्रधानमंत्री मोदी गुजरे और काशीवासी फूल बरसाते रहे.

यूपी विधानसभा चुनावों से पहले वाराणसी में सोनिया गांधी ने रोड शो किया था. रोड शो के दौरान ही तबीयत खराब हो जाने के कारण सोनिया गांधी को बीच में ही दिल्ली लौटना पड़ा था. तब सोनिया गांधी का रोड शो शहर के इंग्लिशिया लाइन पर पुराने कांग्रेसी कमलापति त्रिपाठी की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ खत्म होना था.

priyanka gandhi vadraमोदी की ही तरह मालवीय प्रतिम पर माल्यार्पण के बाद प्रियंका का रोड शो शुरू हुआ

क्या वाराणसी के कांग्रेसवालों को वो बात याद नहीं रही. वे चाहते तो प्रियंका वाड्रा का रोड वैसे ही प्लान कर सकते थे. वो अधूरा रोड शो पूरा करने का एक अच्छा मौका कांग्रेस नेताओं ने यूं ही गंवा दिया.

क्या मोदी के पदचिह्नों पर चल कर रोड शो करने से बेहतर सोनिया के रास्तों पर नहीं होता?

अब तक कांग्रेस ने कुछ अलग किया है तो वो सिर्फ अलग मैनिफेस्टो है. वाराणसी के लिए कांग्रेस ने राष्ट्रीय घोषणापत्र से इतर अलग घोषणापत्र जारी किया है जिसमें एम्स और मेट्रो सहित बहुत सारे वादे भी किये गये हैं.

सपा-बसपा गठबंधन की रैली

16 मई को वाराणसी में सपा-बसपा गठबंधन की रैली होने जा रही है. इस रैली को मायावती और अखिलेश यादव के साथ साथ आरएलडी नेता अजीत सिंह भी संबोधित करने वाले हैं.

ये रैली वाराणसी के सीर गोवर्धन इलाके में हो रही है जो संद रविदास का जन्मस्थल है. ये जगह दलितों की आस्ता का प्रमुख केंद्र तो है ही, सीर गोवर्धन का इलाका समाजवादी पार्टी के समर्थकों के मजबूत वोट बैंक के रूप में भी जाना जाता है.

mayawati, akhilesh yadavमायवती और अखिलेश भी लगाएंगे बनारस में हाजिरी

मायावती वैसे भी हाल फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी पर कुछ ज्यादा ही आक्रामक नजर आ रही हैं. राजस्थान में एक दलित युवती से गैंगरेप की घटना के बाद जब मोदी ने मायावती को कांग्रेस का अशोक गहलोत सरकार से समर्थन वापस लेने की सलाह दी तो बीएसपी नेता आपे से बाहर हो गयीं. मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमले शुरू कर दिये.

वाराणसी रैली का गठबंधन के लिए बहुत महत्व नहीं रह गया है क्योंकि लोग चुनाव को पहले से ही एकतरफा मान कर चल रहे हैं. हां, प्रधानमंत्री मोदी को टारगेट करने का विपक्षी नेताओं के लिए एक मौका जरूर हो सकता है.

मतदान के आखिरी चरण में यूपी में वाराणसी के अलावा महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चन्दौली, मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज सीट पर 19 मई को वोट डाले जाने हैं.

16 मई को प्रधानमंत्री की घोसी, चंदौली और मिर्जापुर में रैली है - और उसके बाद माना जा रहा है कि वोटिंग से पहले मोदी अपने इलाके के लोगों के बीच वक्त बिताने को तरजीह दें. वैसे मोदी के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं है. मुमकिन है मोदी वोटिंग के दिन भी वाराणसी में रुकने का कार्यक्रम बनायें. वैसे तो वोटिंग के दिन शहर का निवासी नहीं होने पर कोई नहीं रह सकता लेकिन प्रत्याशी होने के नाते प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऐसी कोई बाध्यता नहीं होगी.

वाराणसी में विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को घेरने की तमाम कोशिशें की लेकिन सारी नाकाम रहीं. प्रियंका वाड्रा के चुनाव लड़ने पर तस्वीर साफ होने के बाद समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी ही बदल डाला. पहले गठबंधन उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस छोड़ कर समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने वाली शालिनी यादव ने पर्चा भरा लेकिन फिर अखिलेश यादव ने बीएसएफ से बर्खास्त तेज बहादुर यादव को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया. जब तेज बहादुर का नामांकन खारिज हो गया तो फिर से शालिनी यादव उम्मीदवार हो गयीं.

चाहे प्रियंका वाड्रा रोड शो करें या गठबंधन की ओर से मायावती और अखिलेश यादव रैली करें - वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ये भी वैसी ही रस्मअदायगी है जैसे विपक्ष ने प्रत्याशी खड़े किये हैं.

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