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Updated: 08 मार्च, 2019 08:33 PM
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जब भी सपनों की बात होती है, पाश का नाम अपनेआप जबान पर आ जाता है. पाश ने कहा है - सबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना. मगर सपनों का पूरा होना?

सपनों का पूरा होना एक अद्भुत एहसास होता है. कुछ ऐसा ही एहसास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महसूस किया है - और वो भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में. भले ही मोदी के राजनीतिक विरोधी उन्हें सपनों का सौदागर बताते हैं, लेकिन खुद प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक वो सपने देखते हैं और उसे पूरा करने का भी माद्दा रखते हैं.

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम के शिलान्यास के बाद शहर के सांसद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा - 'भोले बाबा के आशीर्वाद से मेरा सपना सच हो गया.'

भोले बाबा का मुक्ति पर्व!

फिल्म मांझी में एक डायलॉग है - 'भगवान के भरोसे मत बैठिए, का पता भगवान हमरे भरोसे बैठा हो.' फिल्मों में भी वही बातें होती हैं जो हो चुकी होती हैं या फिर भविष्य में होने वाली होती हैं.

वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास करते वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुछ ऐसी ही आनंद की अनुभूति हुई लगती है. प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण का काम उन्हीं के द्वारा भूमि पूजन के साथ शुरू हो गया है.

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भी, 'यह चारों तरफ से दीवारों में घिरे भोले बाबा की मुक्ति का पर्व है.'

2014 में मोदी के चुनाव प्रचार में बीजेपी ने एक स्लोगन शुरू किया था - 'हर हर मोदी, घर-घर मोदी'. इस स्लोगन पर तब खासा बवाल हुआ था. तब कांग्रेस के टिकट पर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़े अजय राय ने इस नारे को काशी की जनता और वहां की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया था. अजय राय का कहना रहा कि बीजेपी स्लोगन से साफ झलकता है कि मोदी खुद को बाबा विश्वनाथ के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हों.

narendra modiकितना अच्छा होता है सपनों का पूरा हो जाना!

'हर हर महादेव' बोल कर बनारस में लोग एक दूसरे का अभिवादन करते हैं - जो काशी अविनाशी शिव के नाम स्मरण का एक भावनात्मक तरीका है. बीजेपी के स्लोगन का आधार मूल नारा है - 'हर हर महादेव, घर-घर महादेव'. बीजेपी ने इसमें महादेव यानी काशी विश्वनाथ की जगह मोदी का नाम जोड़ दिया था. ये नारा कुछ दिन चला लेकिन फिर बंद हो गया था.

शिव को लेकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'मुक्ति का पर्व' बताये जाने को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपने अपने तरीके से रिएक्ट कर रहे हैं. लोग पूछ रहे हैं कि जो सबको मुक्ति दिलाता हो उसे मुक्ति का इंतजार भला क्यों?

जिस काम के लिए बुलाया गया वो पूरा हुआ

2014 में जब नरेंद्र मोदी लोक सभा चुनाव लड़ने के लिए अपने वाराणसी पहुंचने को उन्होंने मां गंगा का आदेश बताया था. पांच साल बाद उसी बात को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जतायी कि जिस काम के लिए उन्हें बुलाया गया था उन्होंने पूरा कर दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '2014 के चुनाव के दौरान मैंने कहा था कि मैं यहां आया नहीं हूं, मुझे यहां बुलाया गया है... शायद मुझे ऐसे ही कामों के लिए बुलाया गया था.

चुनावों के चलते रेडियो प्रसारण भले ही थम गया हो लेकिन इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत सारी मन की बातें भी शेयर की. मोदी ने कहा, 'शायद मुझसे भोलेबाबा ने कहा कि बेटे बातें तो बहुत करते हो - आओ यहां काम करके दिखाओ.'

फिर बताया, 'विश्वनाथ धाम एक ऐसी परियोजना है जिसके बारे में मैं लंबे समय से सोच रहा था... सक्रिय राजनीति में आने से पहले ही मैं काशी आ गया था... तब से मुझे लगता है कि मंदिर परिसर के लिए कुछ करना चाहिए... भोले बाबा के आशीर्वाद से मेरा सपना सच हो गया.'

क्या है काशी विश्वनाथ कॉरिडोर

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के जरिये गंगा के घाटों को काशी विश्वनाथ मंदिर से जोड़ा जाएगा. ये कॉरिडोर बन जाने के बाद लोग गंगा में डूबकी लगाने के बाद सीधे काशी विश्वनाथ मंदिर में जा सकेंगे. अब तक गलियों से होकर लंबा रास्ता तक करना पड़ता रहा है. वैसे ये पूरा प्रोजेक्ट 39 हजार वर्ग मीटर में तैयार हो रहा है जिसके लिए सैकड़ों घर गिराये जाने हैं. अब तक गिराये गये घरों के अंदर से 40 मंदिर निकले हैं जो इस परिसर का हिस्सा होंगे.

इसे लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये काशी विश्वनाथ धाम, अब काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर के रूप में जाना जाएगा. इससे काशी की पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनेगी.'

साथ ही प्रधानमंत्री ने इस काम में लगे अफसरो की मेहनत की भी तारीफ की, 'मुझे आज गर्व के साथ कहना है कि योगी जी ने यहां जिन अफसरों की टीम लगाई है वह पूरी टीम भक्ति भाव से इस काम में लगी है. दिन-रात इस काम को पूरा करने में लगी है. लोगों को समझाना, इतनी प्रॉपर्टी को अधिगृहीत करना, विरोधियों को भी नियंत्रित करना यह सब काम अफसरों की टोली ने किया है. मैं उनका अभिनंदन करता हूं.'

हालांकि, मोदी अपने पहले की सरकारों द्वारा काशी विश्वनाथ की उपेक्षा से मोदी काफी क्षुब्ध नजर आये, 'भोले बाबा की पहले किसी ने इतनी चिंता नहीं की... महात्मा गांधी भी बाबा की इस हालत पर चिंतित थे.'

प्रधानमंत्री मोदी का सपना भले पूरा हो गया हो लेकिन दूसरी पारी के लिए चुनाव मैदान में उतरने से पहले कुछ अफसोस भी रह गया, 'अगर तीन साल पहले मुझे यूपी की तत्कालीन सरकार का साथ मिला होता तो आज मैं इसका उद्घाटन कर रहा होता.'

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