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Updated: 12 फरवरी, 2022 05:48 PM
सरिता निर्झरा
सरिता निर्झरा
  @sarita.shukla.37
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आदरणीय मोदी जी,

नमस्कार

आपको पत्र लिखने की कभी नहीं सोची थी. लेकिन अपना सोचा राजनीति में कहां ही होता हैं. नहीं नहीं, मैं राजनीति में नहीं हूं और बड़े स्तर की राजनीति समझने की तो कूवत भी नहीं. आप अक्सर मन की बात करते हैं. कभी कभी आपकी मन की बात केवल चुनावी बात लगती है और कभी आपकी सरकार की रिपोर्ट, तब भी मैं आधे पर ही बंद नहीं करती. देश और उसके इस पद का मान है ये. इस पत्र को नागरिक की नज़र से आंकी गई रिपोर्ट मान लीजियेगा. आपकी सपोर्टर नहीं थी, न ही आपकी पार्टी की धार्मिक राजनीति की. उस राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करने वालों पर कोई बात नहीं क्योंकि रण छोड़ चुके योद्धाओं पर वार हमारी परंपरा नहीं. लेकिन सत्ता मध्य में थी. इससे इंकार कोई नहीं कर सकता.वक़्त के साथ शायद आपने वक़्त की नब्ज़ पकड़ी.

Narendra Modi, Prime Minister, BJP, Letter, Open Letter, Complaint, Notebandi, Coronavirusपीएम ने अगर अच्छे काम किये हैं तो वहीं उनसे तमाम शिकायतें भी हैं

नई उम्र और राज्य का चेहरा बदलने का आपका संकल्प 2002 के बाद से गुजरात के विकास, बिजली पानी की सहूलियतें, सड़कों के जाल और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल खुद महसूस किया जब दस साल उसी राज्य में गुज़ारे. मैं आपकी फैन हो गयी - भक्त नहीं. यू वर टेकन एज़ टफ टास्क मास्टर. ज़रूरत है इसकी.

यकीन हुआ की आप आये तो पार्टी का आधार कुछ भी हो आप देश का आधार विकास और मात्र विकास रखेंगे. आपने कुछ कमाल के काम किये. क्रोनोलॉजी गलत हो सकती है लेकिन ये काम बस दिल के भीतर कतई टच कर गए वो वाले हैं तो सीक्वेंस को मत देखिएगा.

ये काम इत्ते कमाल का था कि लोग्स आपसे प्यार कर बैठे. पाकिस्तान के घर में घुस कर मारा आपने. कोई कुछ भी कहे हर हिंदुस्तानी उस दिन 'भारत माता की जय' का नारा शिद्द्त से लगा रह था. आपने पहली बार 'क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल' का गरल दिखाया था.

नया था ये अनुभव.

आपने नोटबंदी कर दी! बाई गॉड ऐसा कुछ भी होता है या हो सकता है इसका अंदाज़ा हमारी पहले वाली नस्लों को भी नहीं था. डिब्बे कनस्तर से नोट निकलवाए आपने. बोरी भर भर नोट जलवाये आपने. लाइने लगवा दी आपने. एक बात बताऊं उस समय हमारे आसपास के छोटे व्यापारी, दूधवाले सब्जीवाले ने हमे फ्री में सामान दिया कि, 'अरे दीदी न आप भाग रही न हम. मोदी जी हैं न. कोई न बच पायेगा'  और हम सब ने सारी समस्याएं दरकिनार कर दी.

बड़ा भरोसा था, आज भी है लेकिन रातों रात जाने कितनो ने कितना पैसा काले से सफेद किया वो खबरे झूठ ही हो इस पर शक है. हम जैसे लोग लोन चुकाने के डर से कहां ही भागेंगे लेकिन, माल्या नीरव भाई ये भागे. थोड़ा बहुत कुछ किया होगा आपने लेकिन यहां 56 इंच का सीना देखने की इच्छा है. तो कॉलर पकड़ कर लाइए इन्हे या नीलाम करवा दीजिये सारी की सारी प्रॉपर्टी और हां हिसाब पब्लिक रखिये.

हालिया रेड़ में मिला करोड़ो भी हिसाब में जोड़ लीजिएगा. सबकी गणित अच्छी और सच्ची नहीं होती तो बेटर नॉट टूटेक रिस्क. फिर आपने वो तुरुप का इक्का फेंका जिसने सबको क्लीन बोल्ड किया.

आर्टिकल 370 का हटाना.

एक फांस चुभी थी कबसे - आपने निकाली. उन सबको जवाब दिया जो कहते थे की अगर 370 हटा तो कश्मीर में दंगे हो जायेंगे. आपने वो कर दिखाया जो सालों से पेंडिग की लिस्ट में था. इत्तेफ़ाक़ से उधमपुर में कुछ साल गुज़ारे हैं लेकिन तब कश्मीर में खून बिना रोक बहता था. वही रह कर मैंने कश्मीर नहीं घुमा. अब जाउंगी. कश्मीर से कन्या कुमारी तक देश हमारा था है और रहेगा! ये विश्वास पुख्ता किया - शुक्रिया इसका.

फिर एक जिन्न निकला CAA NRC - इस पर चर्चा कुछ ख़ास नहीं क्योंकि फ़िलहाल जिन्न बंद है लेकिन ढक्क्न खुल भी सकता है इसका अंदाज़ा सबको है.

और बहुत से यादगार लम्हें आपने दिए हैं- लेकिन सब पर भारी है आपकी वाक् कला. यू आर एन अमेजिंग ओरेटर. वो टेली प्रॉम्प्टर वाला जो भी रहा हो लेकिन पिछले 9 सालों से हम सब आपकी बातों का जादू देख रहें हैं.

चूल्हे की आंच पर पकते पकते उसने वो डीकॉशन तैयार किया हैकि अब लोग आपकी आवाज़ में कुछ भी सच मान लेते हैं. आपने इक्कीस दिन में कोविड जाने को बोलै हम सब माने. दीप धुप ताली वाली सब किये, कुछ न हुआ. लेकिन जाने दें पहला महामारी था आपका भी. लेकिन सेकेण्ड वेव में जो मुंह छुपा कर चोरी फिर सीनाजोरी किये न आपके जूनियर लोग वो थोड़ा पिंच कर गया.

मतलब सच्ची लाइन लगी थी शमशान में. पता है आपको बताया नहीं होगा वरन आप कुछ करते. आपने किया भी. वैक्सीनेशन ड्राइव. बहुत शुक्रिया. डबल डोज़ लग गई सबको. उसका धन्यवाद. बाकि अब हाथीकि पूंछ रह गयी है तो मास्क लगा कर की घूमते हैं. आप भी फोटो वोटो के चक्कर में मास्क न उतरा करें. नॉट सेफ येट !

लेकिन फिर भी आवाज़ में जादू तो है ही.

आप जब कहते हैं की महंगाई दर काबू में हैं. सत्तर साल में सबसे अधिक काबू में तो 130 -170 रूपये की दाल की कीमत हम भूल जाते हैं और पेट्रोल वो भला पीनी थोड़े ही न. यूं भी पैदल चलने से स्वास्थ अच्छा रहता है ऐसा बाबा रामदेव जी ने कहा है, एंड इंडियन पॉलिटिक्स ऑल्वेज़ हैड बाबा लोग !

आप जब कहते हैं की नौकरियां हैं तो रिटायर्ड बाप जी लोग अपने बेरोज़गार बेटे को कोसते हैं की,'निकम्मे तुम ही होंगे ये कह रहे हैं तो नौकरी तो होगी ही न' वो बात अलग है की पढ़े लिखे लोग जो सर्वे करते हैं उसके मुताबिक हम बोरजगारी के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन माना कोई नहीं. आपका कहा सर चढ़ कर बोलता है.

आप सबसे टेक फ्रेंडली प्रधान सेवक हैं एंड वेरी फैशनेबल टू. व्हाट टैलेंटेड फोटोग्राफर यु हैव! मतलब उससे फोटो शूट करवा के कोई भी बिलकुल गजब लग सकता है. आप तो माशाल्लाह अच्छे दिखते हैं ! लेकिन ये ट्विटर और आपके पेज पर जो हज़ारों राजा हिंदुस्तानी जैसे नामो से गाली गलोज करने वाले भैया जी लोग हैं न दैट इज़ नॉट कूल. दीमक की तरह चाट रहे हैं पीढ़ी को. नौकरी हैं नहीं और उस पर दिमाग में ये नफरत. समझिये विचार बम है हर एक युवा,फट गया तो क्या होगा?

आप पूरे देश को फ्री राशन दे रहे हैं दो साल से ऐसा मेरी मां चाचियां आपको दुआ देते हुए बोलती हैं बिना ये जाने की हमारे हर खरीद पर GST भरते हम नौकरी पेशा लोगो को आपने झुनझुना पकड़ा दिया है. बहरहाल मां तो होती ही भोली हैं. आपकी भी मेरी भी तभी तो नोट बंदी में आपकी माताजी कैश निकालने चली गयी. मतलब इतनी उम्र थी न जाती लेकिन वो गई. आपको स्पोर्ट हर मां करती है लेकिन वो नहीं जिनके बच्चे आपके भक्तों द्वारा बीते 9  सालों के बोये अफीम पर झूम रहे हैं.

आपने जो सबसे कमाल काम किया वो परोक्ष हैं. दिखाई नहीं देता. आपने भारतीयता को गर्व बना दिया. लेकिन हर बार की तरह आपके चमचे इसमें अपनी टांग अड़ा रहे. भारतीयता का कोई लेना देना हिन्दू या मुसलमान से नहीं केवल भारतीय से है. हैं न ? भारतीयता हिंदुत्व नहीं यकीनन आप भी यही मानते हैं न ? धर्म अपना अपना लेकिन देश सबसे ऊँचा और सभीका. है न ? क्योंकि अगर ऐसा नहीं है तो भारत की तस्वीर बदलते बदलते आप भारत की तासीर बदल रहे हैं, मोदी जी.

हम आम लोग हैं कॉमन पीपल्स

अपना घर एक छोटी गाड़ी बच्चो के लिए अच्छा स्कूल फिर कॉलेज और फिर उसकी नौकरी. ज़िंदगी के बस इन्ही सपनो में पूरी उम्र गुज़ार देते हैं हम लोग. साथ में आसपास के दोस्त पड़ोसी तीज त्यौहार होली दिवाली ईद क्रिसमस इन पर घर को सजा कर महंगाई को दर किनार कर थोड़ा ज्यादा खर्च कर ख़ुशी समेटने की कोशिश कर लेते हैं. जाने वाले को दी जाने वाले दुआ में थूक , दिनों और रंगो में मज़हब और मीठे में धर्म खोजने लगे हैं. बदलती तासीर हमारी आम ज़िंदगी में आग की तपिश दे रही है, मोदी जी .

आप शायद न देख पा रहे हो. अक्सर गॉगल्स सही रंग नहीं दिखाते.

इतिहास का नाम बदलना वर्तमान के हाथ में हैं और ये आप कर भी लेंगे लेकिन भविष्य वर्तमान को माफ़ करेगा या नहीं फ़िलहाल इस पर विचार ज़रूरी.मन में सही सोचियेगा ज़रूर.

भारतीय नागरिक

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लेखक

सरिता निर्झरा सरिता निर्झरा @sarita.shukla.37

लेखिका महिला / सामाजिक मुद्दों पर लिखती हैं.

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